रामायण काल में भगवान राम के पुत्र कुश की राजधानी कुशावती को 483 ईसा पूर्व बुद्ध
ने अपने अंतिम विश्राम के लिए चुना । मल्‍लों की राजधानी होने के कारण प्राचीनकाल
में इस स्‍थान का अत्‍यंत महत्‍व था । बौद्ध धर्मावलंबियों के अनुसार लुंबनी,
बोधगया और सारनाथ के साथ ही इस स्‍थान का विशद् महत्‍व है । हिंदू राजाओं के काल
में चीन से ह्वेन सांग, फाह्यान और इत्‍सिंग ने अपने यात्रा वृत्तांत में इस स्‍थान
के गौरव का वर्णन किया है । कुशीनगर का सबसे ज्‍यादा महत्‍व बौद्ध तीर्थ के रूप में
है । 1876 में यह स्‍थान एक बार फिर प्रकाश में आया, जब तत्‍कालीन पुरातत्‍ववेत्‍ता
लॉर्ड कर्निंघम ने महापरिनिर्वाण मूर्ति की खोज की । आइए करें सैर - कुशीनगर की
सीमा में प्रवेश करते ही भव्‍य प्रवेशद्वार आपका स्वागत करता है । इसके बाद आम तौर
पर पर्यटकों की निगाह महापरिनिर्वाण मंदिर की ओर पड़ती है । कुशीनगर का महत्‍व
महापरिनिर्वाण मंदिर से है । इस मंदिर का स्‍थापत्‍य अजंता की गुफाओं से प्रेरित है
। मंदिर के डाट हूबहू अजंता की गुफाओं के डाट की तरह हैं । यह मंदिर उसी स्‍थान पर
बनाया गया है, जहाँ से यह मूर्ति निकाली गई थी । मंदिर के पूर्व हिस्‍से में एक
स्‍तूप है । यहाँ पर भगवान बुद्ध का अंतिम संस्‍कार किया गया था । मूर्ति भी अजंता
के भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण मूर्ति की प्रतिकृति है । वैसे मूर्ति का काल
अजंता से पूर्व का है । इस मंदिर के आसपास कई विहार (जहाँ बौद्ध भिक्षु रहा करते
थे) और चैत्‍य (जहाँ भिक्षु पूजा करते थे या ध्‍यान लगाते थे) भग्‍नावशेष और खंडहर
मौजूद हैं जो अशोककालीन बताए जाते हैं । मंदिर परिसर से लगा काफी बड़ा सा पार्क है,
जहाँ पर्यटकों का जमावड़ा लगा रहता है । वैसे इस पूरे परिसर में अलौकिक शांति का
वातावरण है । महापरिनिर्वाण मंदिर से कुछ दूर आगे माथा कुँवर का मंदिर है । इसके
स्‍थानीय लोगों में भगवान विष्‍णु के अवतार होने की मान्‍यता भी प्रचलित है । इस
मूर्ति के भी करीब पाँच सौ वर्ष पुराना होने का प्रमाण मिलता है । माथा कुँवर की
मूर्ति काले पत्‍थर से बनी है । इसकी ऊँचाई करीब तीन मीटर है । मूर्ति भगवान बुद्ध
के बोधि प्राप्‍त करने से पूर्व की ध्‍यान मुद्रा में है । यहाँ बुद्ध चिरनिद्रा
में हैं - भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण के बाद 16 महाजनपदों में उनकी अस्‍थियों और
भस्‍म को बाँट दिया गया । इन सभी स्‍थानों पर इन भस्‍मों और अस्‍थियों के ऊपर
स्‍तूप बनाए गए । कुशीनगर में मौजूद रामाभार का स्‍तूप इन्‍हीं में से एक है । करीब
50 फुट ऊँचे इस स्‍तूप को मुकुट बंधन विहार कहा जाता है । हालाँकि स्‍थानीय
वाशिंदों में यह रामाभार स्‍तूप के नाम से ही आज भी जाना जाता है । महापरिनिर्वाण
मंदिर के उत्तर में मौजूद जापानी मंदिर अपने विशिष्‍ट वास्‍तु के लिए प्रसिद्ध है ।
अर्द्धगोलाकर इस मंदिर में भगवान बुद्ध की अष्‍टधातु की मूर्ति है । मंदिर सुबह 10
से शाम 4 बजे तक दर्शनार्थियों के लिए खुला रहता है । मंदिर के चार बड़े - बड़े
द्वार हैं, जो सभी दिशाओं की ओर बनाए गए हैं । इस मंदिर की देखरेख जापान की एक
संस्‍था की ओर से की जाती है । जापानी मंदिर के ठीक सामने संग्रहालय है । इसमें
बुद्धकालीन वस्‍तुएं, धातुएं, कुशीनगर में खुदाई के दौरान पाई गई मूर्ति, सिक्‍के,
बर्तन आदि रखे गए हैं । इसके साथ ही मथुरा और गांधार शैली की दुर्लभ मूर्तियाँ भी
यहाँ देखने को मिलेंगी । मंदिर में थाई शैली की भगवान बुद्ध की अष्‍टधातु की मूर्ति
है । मंदिर का वास्‍तु थाईलैंड के मंदिरों जैसा ही है । इसकी संरक्षिका थाईलैंड की
राजकुमारी हैं । मंदिर के शीर्ष पर सोने की परत लगाई गई है । वाट थाई मंदिर -
वर्तमान में सबसे आकर्षण का केंद्र यहाँ पर हाल ही में निर्मित वाट थाई मंदिर है ।
मंदिर का निर्माण थाईलैंड सरकार के सौजन्‍य से किया गया है । सफेद पत्‍थरों से बने
इस मंदिर के दो तल हैं । इस मंदिर में थाई शैली की भगवान बुद्ध की अष्‍टधातु की
मूर्ति है । मंदिर का वास्‍तु थाईलैंड के मंदिरों जैसा ही है । इसकी संरक्षिका
थाईलैंड की राजकुमारी हैं । मंदिर के शीर्ष पर सोने की परत लगाई गई है । पौधों का
विशेष आकार भी पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है । मंदिर परिसर में मौजूद चैत्‍य सभी
के आकर्षण का केंद्र बन जाता है । लोग बरबस इस सोने की परत चढ़े चैत्‍य के साथ फोटो
खींचना चाहते हैं । कुशीनगर के विस्‍तार के साथ ही यहाँ पर सबसे अधिक बनाए गए
मंदिरों में से एक चीनी मंदिर है । मंदिर में भगवान बुद्ध की मूर्ति अपने पूरे
स्‍वरूप में चीनी लगती है । इसकी दीवारों पर जातक कथाओं से संबंधित पेंटिंग अत्‍यंत
ही आकर्षक है । मंदिर के बाहर सुंदर फव्वारा है । महापरिनिर्वाण मंदिर से पहले बीच
तालाब में बना भगवान बुद्ध का मंदिर और इसके सामने बना विशाल पगोडा पर्यटकों के
आकर्षण का केंद्र है । जल मंदिर तक जाने के लिए तालाब के ऊपर पुल का निर्माण किया
गया है । इसमें कछुओं और बतख के साथ ही मछलियों को अठखेलियाँ करते देखना बहुत
अच्‍छा लगता है । ठीक सामने मौजूद पगोडा के ऊपर बँधी घंटियाँ सुरम्‍य और शांत
वातावरण में जब बजती हैं तो लगता है कि ये सभी दिशाओं में अहिंसा और प्रेम का संदेश
दे रहीं हों । जलमंदिर के सामने भगवान शिव को समर्पित बिरला मंदिर मौजूद है ।
दक्षिण भारतीय शैली में बने इस मंदिर में शिव की ध्‍यान मुद्रा में सफेद संगमरमर की
मूर्ति है । इसके बगल में ही बिरला धर्मशाला है । कैसे पहुँचें? कुशीनगर गोरखपुर से
52 किलोमीटर की दूरी पर नेशनल हाईवे नं 28 पर स्‍थित है । यहाँ पहुँचने के लिए सबसे
नजदीकी रेलवे स्‍टेशन गोरखपुर रेलवे जंक्‍शन है । गोरखपुर से हर घंटे कुशीनगर
(कसया) के लिए बसें मिलती रहती हैं । गोरखपुर से देश के लगभग सभी प्रमुख शहरों के
लिए ट्रेन की सुविधा उपलब्‍ध है । इसके साथ ही गोरखपुर से दिल्‍ली, मुंबई और
कोलकाता के लिए हवाई सुविधा भी उपलब्‍ध है । दिल्‍ली और लखनऊ से पर्यटन विभाग की ओर
से भी विदेशी और घरेलू पर्यटकों के लिए वाहन और रहने की व्‍यवस्‍था की जाती है ।
कहाँ ठहरें? कुशीनगर में सैलानियों के ठहरने के लिए हर श्रेणी के आरामदायक होटल
मौजूद हैं । यहाँ लोटस, निक्‍को होटल, होटल रेसीडेंसी और पथिक निवास में ठहरने के
लिए बेहतर होगा कि पहले से बुकिंग करवा ली जाए । इनमें से पथिक निवास उत्तरप्रदेश
पर्यटन विकास निगम की ओर से संचालित होता है । वहीं धर्मशालाओं में भी साल भर भीड़
रहती है । इसमें बिरला धर्मशाला और बुद्ध धर्मशाला प्रमुख हैं । इसके अलावा अलग -
अलग देशों के मंदिरों की धर्मशाला भी हैं । बौद्ध भिक्षुओं के लिए कुछ मंदिरों में
विहार की व्‍यवस्‍था है । युग - युगांतर से उत्तराखंड भारतीयों के लिए आध्यात्मिक
शरणस्थल और शांति प्रदाता रहा है । प्रागैतिहासिक काल से ऋषि - मुनियों और साधक,
परिव्राजकों को यह आकर्षित करता आ रहा है । हिमालय प्रकृति का महामंदिर है । यहाँ
केदारनाथ तीर्थ उत्तराखंड का महत्वपूर्ण स्थल है । यहाँ जाते समय पैरों के नीचे
यत्र - तत्र हिम राशि खिसकती दिखाई पड़ती है । बर्फ के पास ही अत्यंत मादक सुगंध
वाले सिरंगा पुष्पकुंज मिलने लगते हैं । इनके समाप्त होने पर हरी बुग्याल 'दूब'
मिलती है । इसके पश्चात केदारनाथ का हिमनद और उससे निकलने वाली मंदाकिनी अपने में
असंख्य पाषाण खंडों को फोड़कर निकले झरनों और फव्वारों के जल को समेटे उद्दाम गति
से प्रवाहित होती दिखाई देती है । इन सबके ऊपर केदारनाथ का 6 हजार 940 मीटर ऊँचा
हिमशिखर ऐसा दिखाई देता है, मानो स्वर्ग में रहने वाले देवताओं का मृत्युलोक को
झाँकने का यह झरोखा हो । ऋषिकेश से केदारनाथ की दूरी 223 किमी है, जिसमें अंतिम दस
किमी का अंश जो गौरीकुंड से केदारनाथ है वह पैदल, घोड़े या पालकी से जाना पड़ता है
। यह उत्तराखंड का सबसे विशाल शिव मंदिर है, जो कटवाँ पत्थरों के विशाल शिलाखंडों
को जोड़कर बनाया गया है । ये शिलाखंड भूरे रंग के हैं । मंदिर लगभग 6 फुट ऊँचे
चबूतरे पर बना है । मंदिर के गर्भगृह में अर्धा के पास चारों कोनों पर चार सुदृढ़
पाषाण स्तंभ हैं, जहाँ से होकर प्रदक्षिणा होती है । अर्धा, जो चौकोर है, अंदर से
पोली है और अपेक्षाकृत नवीन बनी है । सभा मंडप विशाल एवं भव्य है । उसकी छत चार
विशाल पाषाण स्तंभों पर टिकी है । गवाक्षों में आठ पुरुष प्रमाण मूर्तियाँ हैं, जो
अत्यंत कलात्मक हैं । मंदिर के पीछे पत्थरों के ढेर के पास भगवान ईशान का मंदिर है
। इस ढेर के पीछे शंकराचार्य का समाधि स्थल है । यहाँ आधुनिक शैली का स्मारक बना है
। वर्तमान में इसमें पाँच मातृकाएँ स्थापित हैं । निःसंदेह वे पहले नौ रही होंगी ।
केदारनाथ में अनेक नाकविहीन मूर्तियों के विग्रह बिखरे पड़े हैं । यहाँ से लगभग 1
किमी दूरी पर चौर सरोवर अपने गहरे और नीले जल के कारण पर्यटकों के लिए आकर्षण स्थल
है । यहाँ महात्मा गाँधी की अस्थि विसर्जन किए जाने से इसे गाँधी स्मारक भी कहते
हैं । पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की
कश्मीर नीति की तल्ख आलोचना की है । उन्होंने कहा है कि पाक सरकार की लचर कश्मीर
नीति के कारण यह मुद्दा पाकिस्तान के हाथ से लगभग निकल चुका है । नवाज शरीफ ने
जेद्दा में एक अमेरिकी टेलीविजन चैनल से बातचीत करते हुए कहा कि उनकी सरकार भारत से
समान संप्रभु भागीदार की हैसियत से बातचीत करती थी, लेकिन परवेज मुशर्रफ की नीति
इसके उलट है । मुशर्रफ की पाकिस्तान नीति लचर रही है । पाकिस्तान की नीति में
अस्थिरता है । इससे पाकिस्तान की साख कमजोर होती जा रही है । उन्होंने मुशर्रफ पर
एजेंडा बदलने और पीछे हटने का आरोप भी लगाया । उन्होंने चैनल से बातचीत करते हुए
कहा कि अमेरिका के दबाव के बावजूद भारत के परमाणु परीक्षण के जवाब में उनकी सरकार
ने परमाणु परीक्षण किया था । अमेरिका ने तब उन पर परमाणु परीक्षण नहीं करने के लिए
दबाव बनाया था, लेकिन देश के संप्रभु चरित्र की रक्षा के लिए उन्होंने अमेरिकी दबाव
की अनदेखी की । उन्होंने यह भी कहा कि तब तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी
वाजपेयी ने खुद अपनी मर्जी से लाहौर की यात्रा की थी और लाहौर घोषणा पर हस्ताक्षर
हुआ था । इसमें कश्मीर समस्या का भी जिक्र था । शरीफ ने कहा कि तब वाजपेयी ने मुझसे
कहा था कि वे वर्ष, १९९९ को कश्मीर समस्या के समाधान वर्ष के रूप में याद करना
चाहेंगे । अब स्थिति बिल्कुल अलग है । अब तो मुशर्रफ एक बयान देते हैं और अगले दिन
उस पर पलट जाते हैं । ऐसे में कश्मीर पर हमारा दृष्टिकोण कमजोर हुआ है और यह मुद्दा
एक तरह से हमारे हाथ से निकल गया है । शरीफ का यह भी कहना है कि पाकिस्तान के
परमाणु वैज्ञानिकों के खिलाफ मुकदमा चलाया जाना गलत है । उन्होंने कहा कि इसके पीछे
पाकिस्तान और उसके परमाणु कार्यक्रम को निशाना बनाने का उद्देश्य छिपा हुआ है । ऐसा
पाकिस्तान बाहरी दबाव में कर रहा है । उन्होंने इससे इनकार किया कि अपने निर्वासन
के दौरान उन्होंने मुशर्रफ के साथ कोई सौदेबाजी की थी । उन्होंने कहा कि मुशर्रफ की
सरकार ने तब सौदेबाजी करने की कोशिश की थी, लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया था ।
कांची मठ के परमाचार्य चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती का वार्षिक आराधना समारोह शुक्रवार
को शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती की गैरमौजूदगी में संपन्न हो गया । यह पहला मौका है,
जब समारोह की अध्यक्षता के लिए जयेंद्र सरस्वती उपस्थित नहीं थे । शंकररमन
हत्याकांड के सिलसिले में ११ नवंबर को गिरफ्तार होने के बाद से शंकराचार्य न्यायिक
हिरासत में हैं और वेल्लूर जेल में बंद हैं । यज्ञों, वैदिक मंत्रों और विद्वानों
को अलंकृत करने के बीच यह समारोह तीन दिन तक चला और शुक्रवार को मठ के अंदर स्थित
समाधि में श्रद्धालुओं के बीच आराधना और पूजा के साथ संपन्न हुआ । परमाचार्य के
दिसंबर १९९३ में मुक्ति प्राप्त करने के बाद से हर वर्ष आराधना समारोह आयोजित किया
जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं । हालांकि इस बार
जयेंद्र सरस्वती की गैरमौजूदगी मौके पर मौजूद विशिष्ट व्यक्तियों के बीच चर्चा का
विषय जरूर रही, लेकिन देश भर से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में कोई कमी नहीं
देखी गई । समारोह के दौरान कनिष्ठ आचार्य विजयेंद्र सरस्वती ने यज्ञ और भजन के बाद
पूर्ण आहुति देने के बाद स्वर्ण कलश ग्रहण किया । मौके पर मौजूद कर्नाटक के एक मठ
पीठाधिपति के स्वर्णाहल्ली स्वामी ने आदिस्थानम को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की ।
संसदीय कमेटी ने बजट पर बढ़ती निर्भरता के लिए रेलवे की निंदा की है । कमेटी का
सुझाव है कि देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम रेलवे को अपने रुख में
बदलाव करते हुए उपभोक्ता के लिए सरल और बाजारोन्मुखी बनना होगा । इससे वह एक
वाणिज्यिक उपक्रम होने के नाते बजट पर अधिक निर्भर न रहकर अपने संसाधन खुद जुटा
सकेगा । लोकसभा में पेश की गई अपनी रिपोर्ट में कमेटी का कहना है कि रेलवे को
केंद्रीय मदद अब ५० फीसदी से भी अधिक मिलने लगी है । एक व्यापारिक उपक्रम होने के
कारण सबसे पहले रेलवे को अपनी योजना के वित्त का भी प्रबंध करना चाहिए और
परियोजनाओं को आंतरिक स्रोतों से पूरा करना चाहिए । योजना आयोग की राय पर गौर करते
हुए कमेटी ने कहा है कि असली समस्या रेलवे को मिलने वाली कुल आर्थिक मदद नहीं है ।
बल्कि, आंतरिक व अतिरिक्त बजटीय मदद का न होना ही इसकी मुख्य समस्या है । दसवीं
योजना के दौरान सरकार रेलवे को २७,६०० करोड़ रुपये की बजटीय सहायता को मंजूरी दे
चुकी है । इस योजना की ७० फीसदी रकम पहले तीन सालों में ही उपलब्ध कराई जा चुकी है
। १४ सदस्यीय इस कमेटी की अध्यक्षता बासुदेव आचार्य ने की । अपने तर्क के समर्थन
में उन्होंने योजना आयोग के नजरिए का उल्लेख करते हुए कहा कि ट्रैकों की लंबाई,
वृहद क्षेत्रफल और भारी आबादी को देखते हुए चीन और भारत की रेल प्रणाली में खासी
समानताएं हैं । जबकि, चीन में बजट से पूरा किए जाने वाला रेलवे का खर्च सिर्फ ११
फीसदी है । जबकि भारत में यह रकम ५० फीसदी हो जाती है । चीन के पास बजट के अलावा
अतिरिक्त संसाधनों की भरमार है । वह आंतरिक संसाधनों के जरिए ५७ फीसदी रकम का
प्रबंध करता है और बाजार से ३२ फीसदी रकम हासिल करता है । हालांकि भारत के मामले
में यह क्रमशः २४ और २२ प्रतिशत ही है । इसलिए भारत में रेलवे के सभी कार्यक्रम और
योजनाएं तकरीबन पूरी तरह से सरकार से मिलने वाले बजट पर ही निर्भर हैं । इसके बजाय
भारत को अब धीरे - धीरे स्वपोषित वाणिज्यिक प्रणाली की ओर बढ़ना चाहिए । बजट का
प्रावधान केवल उन क्षेत्रों तक ही सीमित होना चाहिए जो कि वाणिज्यिक संस्थान
प्रायोजित नहीं करना चाहता । खुफिया ब्यूरो के निदेशक पद की दौड़ में शामिल वरिष्ठ
अधिकारी एन. सी. पाधी को सचिव (सुरक्षा) नियुक्त किया गया है । मध्यप्रदेश कैडर से
१९६८ बैच के आईपीएस अधिकारी पाधी खुफिया ब्यूरो (आईबी) प्रमुख पद के प्रबल
दावेदारों में से एक थे । नियुक्तियों को लेकर मंत्रिमंडल समिति ने ३१ मई को सुधीर
कुमार के रिटायर होने के बाद सचिव (सुरक्षा) पद पर पाधी की नियुक्ति को मंजूरी दे
दी है । पाधी का कार्यकाल अगले वर्ष जुलाई तक होगा । सरकार के इस फैसले से बिहार से
१९७० बैच के आईपीएस अधिकारी पी. सी. हलधर खुफिया ब्यूरो के अगले निदेशक के प्रबल
दावेदार हो गए हैं । ब्यूरो के निदेशक ई. एस. एल. नरसिम्हन इस वर्ष ३० नवंबर को
रिटायर होंगे । केंद्र सरकार कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका के तीनों अंगों
को लोकपाल के दायरे में लाने पर विचार कर रही है । राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व
मुख्य न्यायाधीश को इससे बाहर रखा जाएगा । जनशिकायतों की सुनवाई को नए लोकपाल
विधेयक में सबसे ज्यादा तरजीह दी जाएगी । सरकार ने इसके विभिन्न पहलुओं पर विचार के
लिए समिति गठित की है । लोकपाल को सक्षम पुलिस व सीबीआई जैसी एजेंसी का समर्थन दिए
जाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं । कानून व न्याय मंत्री हंसराज भारद्वाज के
मुताबिक सरकार कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका को लोकपाल के जरिए ज्यादा
कार्यक्षम व बेदाग बनाना चाहती है । जेएमएम प्रकरण के बाद संसद सदस्यों व निर्वाचित
प्रतिनिधियों को लोक सेवक करार दिया जा चुका है और उनसे उसी किस्म की ईमानदारी की
उम्मीद की जाती है । न्यायाधीशों के पास जांच की पर्याप्त एजेंसी नहीं होती । अब
जनता में यह महसूस किया जाने लगा है कि न्यायाधीशों के मामले में भी जांच व दंड का
प्रावधान होना चाहिए । जब उनसे पूछा गया कि लोकपाल के दायरे में न्यायपालिका को
लाने के मुद्दे पर क्या भारत के प्रधान न्यायाधीश से राय ली जाएगी? उन्होंने कहा कि
मंत्रियों की समिति न्यायाधीश की राय नहीं लेगी और स्वतंत्र रूप से अपने सुझाव देगी
। भारद्वाज ने यह घोषणा की कि मंत्रियों की इस समिति की अध्यक्षता रक्षा मंत्री
प्रणव मुखर्जी करेंगे । इसमें स्वयं उनके और विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्री कपिल
सिब्बल के अलावा चार से पांच मंत्री रहेंगे । उल्लेखनीय है कि एनडीए सरकार ने
लोकपाल की दिशा में काफी प्रयास किए और तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी व
उनके कई वरिष्ठ साथियों ने प्रधानमंत्री को भी लोकपाल के दायरे में रखने का प्रयास
किया था । भारद्वाज के मुताबिक 'प्रणव मुखर्जी की कमेटी ने उस समय भी प्रधानमंत्री
को लोकपाल के दायरे से बाहर रखने का सुझाव दिया था । डॉ. मनमोहन सिंह ने तो
प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाने का कई बार समर्थन किया है । लेकिन हम
लोगों का मानना है कि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्य न्यायाधीश को कम से कम
इससे बाहर होना चाहिए । प्रधानमंत्री को केवल संसद के प्रति ही उत्तरदायी होना
चाहिए और राष्ट्रपति पर तो कोई बहस भी नहीं होनी चाहिए भारद्वाज का मानना है कि
जजों के बारे में न्यायपालिका किसी जल्दी में नहीं दिखती । इसलिए सरकार ने तय किया
है कि इस बारे में सभी के लिए समान कानून लाया जाए । जिसमें लोगों को यह जानने का
हक भी मिले कि किसी प्रकरण की स्थिति क्या चल रही है? लोकपाल के जरिए ही भ्रष्ट
जजों के महाभियोग की प्रक्रिया को भी तय किया जाएगा । हालांकि प्रशासनिक पदों पर
भ्रष्टाचार पर निगाह रखने के लिए मुख्य सतर्कता आयोग (सीवीसी) का पद हाल ही में
सृजित किया गया था । भारद्वाज का मानना है कि सीवीसी सीबीआई के निदेशक और प्रवर्तन
निदेशालय के निदेशकों की नियुक्ति का अनुमोदन करने का अधिकार रखता है, लेकिन उसके
पास उतने कानूनी अधिकार नहीं हैं । संसद सदस्यों के मामले में भी अब तक संसदीय
समिति या स्पीकर के जरिए जांच हुई है लेकिन उनके लिए भी कोई ठोस कानूनी उपाय नहीं
है । भारद्वाज का कहना है कि वह व्यापक लोकपाल विधेयक के जरिए इसे संपूर्ण बनाना
चाहते हैं जिसमें आम लोग भी प्रशासनिक स्तर पर अपने काम रुकने या भ्रष्टाचार की
शिकायतें कर सकें । भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने टाटा टेलीसर्विस
लिमिटेड और रिलायंस इंफोकॉम लिमिटेड द्वारा फिक्सड वायरलेस फोन को वॉकी और
अनलिमिटेड कार्डलेस फोन बताने पर कड़ा रुख अपनाया है । प्राधिकरण ने दोनों कंपनियों
से फिक्सड वायरलेस फोन के 'वॉकी' और 'अनलिमिटेड कार्डलेस' फोन की तरह प्रचारित करने
वाले विज्ञापनों को हटाने को कहा है । प्राधिकरण ने इसके लिए १३ जनवरी तक दोनों
पक्षों से जवाब देने को कहा है । ट्राई को कई शिकायतें मिली थी कि दूरसंचार सेवा
उपलब्ध कराने वाली कंपनियां टाटा टेलीसर्विस और रिलायंस इंफोकॉम अपने फिक्सड
वायरलेस फोन सेवा का इस तरह से प्रचार कर रही हैं कि इन सेवाओं के मोबाइल के समान
होने का भ्रम होता है । कंपनियां इसके एवज में एसेस डेफिसिट चार्ज यानि एडीसी ले
रही हैं, जबकि यह फिक्सड वायरलेस फोन है । गौरतलब है कि लोकल फिक्सड फोन पर एडीसी
नहीं देनी पड़ती है । जबकि मोबाइल पर यह दर लागू होती है । दूरसंचार सेवा मुहैया
कराने वाली टाटा टेलिसर्विस लिमिटेड और रिलायंस इंफोकॉम ने बाजार में कुछ समय पहले
फिक्सड वायरलेस फोन उतारे थे । ट्राई द्वारा यह आदेश दूरसंचार नियामक प्राधिकरण
अधिनियम १९९७ की धारा १३ और ११ (१) (बी) के तहत दिया गया है । यदि आप मोबाइल फोन का
इस्तेमाल करते हैं, तो सतर्क हो जाएं । आपके सेलफोन पर वायरस हमला कर सकते हैं ।
मोबाइल फोन की स्क्रीन पर फ्लैश होने वाले 'अनबिलिवेबल' और 'ऐस' नाम के ये वायरस
आपके हैंडसेट को क्षति पहुंचा सकते हैं । भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने यह चेतावनी
जारी करते हुए कहा कि नए मोबाइल फोन पर वायरस से आने वाली ऐसी कॉल, हैंडसेट को
क्षति पहुंचा सकती हैं । सूत्रों का कहना है कि मोबाइल फोन उपभोक्ताओं को १२ अंकों
वाली कॉल भी नहीं लेनी चाहिए । यह भी फोन वायरस हो सकता है । मोहम्मद अली जिन्ना पर
की गई टिथी से उठे विवाद में भाजपा पूरी तरह लालकृष्ण आडवाणी के साथ खड़ी है ।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी खुलकर आडवाणी के बचाव में सामने आ गए और
बोले, पाकिस्तान के जनक ने स्वतंत्रता संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी ।
दूसरी ओर आडवाणी पर बयान वापस लेने का दबाव डालने वाले राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने
उनके भाजपा अध्यक्ष पद से इस्तीफे को पार्टी का अंदरूनी मामला करार दिया । उन्होंने
आरोप लगाया कि आडवाणी ने जो कुछ कहा उसके गलत अर्थ निकाले गए हैं । जिन्ना को
पाकिस्तान का जनक बताते हुए वाजपेयी ने कहा कि कायदे आजम चाहते थे कि भारत और
पाकिस्तान के लोग सद्भावना से रहें, लेकिन पाकिस्तान के नेताओं ने उनका समर्थन नहीं
किया । उन्होंने कहा कि सरोजनी नायडू जैसी कांग्रेस की वरिष्ठ नेता ने भी जिन्ना पर
इसी तरह की टिथी की थी । आडवाणी से बयान वापस लेने की मांग करने वाले संघ ने उन पर
इस्तीफे के लिए किसी तरह का दबाव डालने के आरोप से इनकार किया । लेकिन उन्होंने कहा
कि हम जिन्ना को सेकुलर बताए जाने से सहमत नहीं हैं । आडवाणी को मनाने उनके आवास पर
पहुंचे भाजपा नेता साहिब सिंह वर्मा ने कहा, विहिप नेता प्रवीण तोगड़िया के बयान से
अध्यक्ष जी आहत हैं । विहिप को इस तरह की भाषा का प्रयोग नहीं करना चाहिए । मैं
चाहता हूं कि संघ परिवार दबाव बनाकर प्रवीण तोगड़िया का बयान वापस कराए या फिर
उन्हें विहिप से बाहर कर दिया जाए । दूसरी ओर भाजपा की तेजतर्रार नेता उमा भारती ने
कहा कि आडवाणी के इस्तीफे और पाकिस्तान में की गई उनकी टिप्पणियों से जुड़े मुद्दे
पर बहस की जरूरत है । इसके साथ ही उन्होंने संघ परिवार को संयम बरतने की नसीहत दे
डाली । पार्टी के अल्पसंख्यक नेता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि हमने लाल कृष्ण आडवाणी
से इस मुददे पर बात की है और हम चाहते हैं कि वे अध्यक्ष बने रहें । झारखंड
विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सीटों के बंटवारे को लेकर यूपीए में दरार पैदा हो गई है
। कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोरचा ने आज राज्य की ८१ सीटों में से ६८ सीटें आपस
में बांट ली । दूसरी ओर केंद्र में सत्तारूढ़ यूपीए के एक प्रमुख घटक राजद और उसे
बाहर से समर्थन दे रहे माकपा ने इसे एकतरफा करार दिया है । कांग्रेस - झामुमो के
समझौते से बौखलाए राजद प्रवक्ता ने इसे सरासर विश्वासघात बताया है । माकपा पोलित
ब्यूरो के सदस्य सीताराम येचुरी ने कहा कि यह समझौता हमारी सोच से अलग है । सीटों
के इस विवाद से राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ एक मजबूत गठबंधन खड़ा करने की
कोशिशों पर पानी फिर गया है । हालांकि कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी के
मुताबिक 'यूपीए एक ठोस गठबंधन है और राज्य की मौजूदा सरकार को सत्ता से बाहर करने
में कोई संदेह नहीं है इससे पहले आज कांग्रेस ने गठबंधन धर्म निभाते हुए झारखंड
मुक्ति मोरचा के साथ विधानसभा सीटों के बंटवारे में पूरी दरियादिली का परिचय दिया
और झामुमो को ३५ सीटें दे दीं, जो उसकी ३३ सीटों के मुकाबले दो कम हैं । बदले में
झामुमो सुप्रीमो और कोयला मंत्री शिबू सोरेन ने चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद का
फैसला यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के हाथ सौंप दिया । अब कांग्रेस की उम्मीदें
सीपीआई की ओर से मिलने वाली दो सीटों पर टिकी हैं । कांग्रेस और झामुमो ने राज्य की
बाकी १३ सीटें राजद और वाम दलों के लिए छोड़ी हैं । सीटों के तालमेल का फैसला सोरेन
व सोनिया गांधी के बीच हुई मुलाकात के बाद लिया गया । इससे पहले कांग्रेस व झारखंड
नेताओं के बीच हुई बैठक में समझौते की रूपरेखा तय की गई थी । कांग्रेस की ओर से इस
बैठक में अर्जुन सिंह, माखन लाल फोतेदार और कांग्रेस महासचिव व बिहार व झारखंड के
प्रभारी हरिकेश बहादुर ने हिस्सा लिया । जबकि झारखंड मुक्ति मोर्चा की ओर से इस
बैठक में शिबू सोरेन व स्टीफन मरांडी शामिल थे । लेकिन, इस समझौते से राजद और माकपा
की भवें तन गई हैं । राजद प्रवक्ता शिवानंद तिवारी ने इस समझौते को गठबंधन धर्म के
विपरीत बताया है । उन्होंने कहा कि यह सरासर विश्वासघात है । हाल ही में जेडीयू के
चार विधायक भी राजद में शामिल हो गए थे । पादरी या नन अब धार्मिक और शैक्षिक कार्यो
तक ही सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वे काले कोट पहनकर देश भर की अदालतों में जिरह करते
भी नजर आ सकते हैं । केरल हाईकोर्ट ने अपने एक ऐतिहासिक फैसले में उनके लिए रास्ता
साफ कर दिया है । अदालत ने कहा कि पादरी या नन होने का आशय यह नहीं है कि वे कानूनी
पेशे में प्रवेश नहीं कर सकते । जस्टिस के. बालाकृष्णन ने अपने आदेश में कहा कि
पादरी और नन का काम कोई रोजगार या पेशा नहीं है । कोई भी केवल जीवनयापन के मकसद से
इसे नहीं अपनाता । लिहाजा इसे पेशा नहीं माना जा सकता, जैसा कि बार काउंसिल के नियम
२ (एच) में कहा गया है । हालांकि अदालत ने कहा है कि अधिवक्ता के रूप में वही पादरी
और नन पंजीकृत नहीं हो सकते हैं, जो इस कार्य को पूर्णकालिक आधार पर करते हैं ।
अदालत ने बार काउंसिल की इस दलील को खारिज कर दिया कि धार्मिक कार्यो को अंजाम देना
भी एक पेशा है, लिहाजा पादरी, नन और संन्यासिन कानूनी पेशे में प्रवेश के अधिकारी
नहीं हैं । अदालत का मानना है कि ऐसे लोगों के आने से पेशे में पवित्रता, ईमानदारी
और पारदर्शिता बढ़ेगी, क्योंकि कानूनी पेशे को ऐसे लोगों की जरूरत है, जो पूरी
निष्ठा और निस्वार्थ भाव से दबे कुचले लोगों और पर्यावरण संरक्षण के मसले उठाएं ।
याचियों ने केरल बार काउंसिल पंजीकरण समिति के फैसले को चुनौती दी थी । समिति ने
याचियों के आवेदन को खारिज कर दिया था । याचियों ने अपनी दलील में कहा कि यदि कोई
वकील अदालत में प्रैक्टिस कर रहा है और वह पादरी या नन बन जाता है तो उसे वकील के
रूप में वकालत जारी रखने से अयोग्य नहीं ठहराया जाता । इसी तरह नियम किसी पादरी या
नन को कानूनी पेशे में प्रवेश से नहीं रोकते । अदालत ने कहा कि ऐसे लोग अपना जीवन
ईश्वर और मानवता को समर्पित कर देते है । इसलिए उन्हें किसी पेशे से जुड़ा नहीं
माना जा सकता । अदालत के फैसले पर सिस्टर टीना ने खुशी जताई है । उन्होंने अलपुझा
से फोन पर बताया कि अंततः ईश्वर ने हमारी प्रार्थना सुन ली है । उन्होंने कहा कि
पिछले एक सप्ताह से वे अदालत द्वारा अपने पक्ष में फैसला दिए जाने के लिए ईश्वर से
प्रार्थना कर रही थी । ईश्वर का शुक्र है कि अदालत ने हमारे पक्ष में फैसला दिया है
। उन्होंने कहा कि अब मैं जरूरतमंद लोगों के लिए अदालत में बहस कर सकूंगी । मेरे
जैसे दूसरे पादरी और ननों को भी वकालत के पेशे से जुड़ने का मौका मिलेगा । वोल्कर
रिपोर्ट पर केंद्र सरकार ने सोमवार को यू टर्न लिया । प्रधानमंत्री ने नटवर सिंह से
विदेश विभाग ले लिया । यह विभाग अब वह खुद देखेंगे । नटवर फिलहाल बिना विभाग के
मंत्री रहेंगे । सरकार ने वोल्कर रिपोर्ट के तथ्यों की न्यायिक जांच कराने के लिए
पूर्व मुख्य न्यायधीश आर. एस. पाठक की अध्यक्षता में आयोग का गठन किया है । इसके
अलावा कांग्रेस और राजग ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफी अन्नान को लिखकर इस संबंध
में सारे दस्तावेज मांगे हैं । राजग ने सोमवार राष्ट्रपति को भी इस संबंध में
ज्ञापन सौंपा । मालूम हो कि वोल्कर रिपोर्ट से संबंधित तथ्यों व आंकड़ों को जमा
करने के लिए सरकार ने रविवार शाम को ही संयुक्त राष्ट्र में पूर्व अवर सचिव
वीरेंद्र दयाल की अध्यक्षता में समिति का गठन किया था । तेल दलाली मामले में दो -
दो जांच आदेश के बाद नटवर सिंह पर इस्तीफा देने का दबाव बढ़ गया था । पर उन्होंने
इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया । शाम को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उन्हें
अपने सरकारी आवास पर बुलाया । इस मौके पर वित्त मंत्री पी. चिदंबरम भी मौजूद थे ।
करीब दो घंटे तक गहन मंत्रणा के बाद नटवर सिंह को विदेश मंत्रालय से हटाने का फैसला
किया गया । कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के इस फैसले का स्वागत किया है । नटवर सिंह को
मंत्रिमंडल में बनाए रखने का बचाव करते हुए पार्टी प्रवक्ता अभिषेक मनु संघवी का
कहना है कि सिर्फ आरोप की बुनियाद पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता । लेकिन
नटवर की जिद को देखते हुए प्रधानमंत्री को यह रास्ता निकालना पड़ा । हालांकि, नटवर
सिंह की दलील थी कि उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत निरुपम सेन से कई
बार बात की है । सेन से यह पता लगाने के लिए कहा गया है कि उनका और कांग्रेस का नाम
इस रिपोर्ट में कैसे आया । पर सरकार और पार्टी इस दलील से सहमत नहीं थीं । पार्टी
में आम राय थी कि जांच के वक्त विदेश मंत्रालय नटवर सिंह के पास नहीं होना चाहिए ।
खुद मनमोहन सिंह भी पार्टी नेताओं की इस राय से सहमत थे । इस मामले की न्याययिक
जांच की घोषणा करते हुए प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार संजय बारू ने सोमवार को कहा
कि न्यायमूर्ति आर. एस. पाठक की ओर से की जाने वाली जांच का दायरा व जांच के
मुद्दों की घोषणा जल्द कर दी जाएगी । जरूरत पड़ने पर नटवर सिंह से भी पूछताछ की जा
सकती है । बारू के मुताबिक, वीरेंद्र दयाल समिति वोल्कर रिपोर्ट से संबंधित तथ्यों
और आंकड़ों को एकत्र करने के लिए संयुक्त राष्ट्र व अन्य सदस्य देशों की यात्रा
करेगी । जबकि पाठक की अगुआई में आयोग दयाल समिति के जुटाए गए तथ्यों के आधार पर
जांच करेगा । उनके साथ उनकी पत्नी और वकील भी थे । एक दिन पूर्व ईडी ने अंदलीब और
उनके रिश्तेदारों के आवासों पर रेड कार्नर नोटिस चस्पा कर दिया था । हालांकि ईडी और
आयकर विभाग ने अंदलीब से रविवार को ८ घंटे तक पूछताछ की थी लेकिन अंदलीब ने इस
नोटिस के जवाब में खुद को पेश किया । इस बीच नटवर ने वोल्कर रिपोर्ट को मृत रिपोर्ट
का दर्जा दिया । उन्होंने कहा कि पॉल वोल्कर ने जब खुद स्वीकार किया कि उन्होंने
कोफी अन्नान को संकट से उबारने के लिए इसकी भाषा में फेरबदल किया तो इससे इसकी
गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है । जनता दल (यूनाइटेड) के नेतृत्व वाली बिहार
सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि वह केंद्रीय मंत्री और राजद नेता
मोहम्मद तस्लीमुद्दीन पर लगे हत्या के प्रयास के अभियोग को नहीं हटाना चाहती ।
राज्य सरकार का कहना है कि यह आरोप बहुत ही गंभीर और गैर जमानती किस्म का है ।
पिछले साल बिहार में सत्ता परिवर्तन के बाद जद (यू) और भाजपा गठबंधन की सरकार आने
पर उसने इस मामले पर अपना रुख स्पष्ट किया । नितीश कुमार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को
बताया कि वह विवादास्पद राजद नेता पर मुकदमा जारी रखने के पक्ष में है ।
तस्लीमुद्दीन अररिया की अदालत में आपराधिक मुकदमे का सामना कर रहे हैं । मंगलवार को
अदालत में पेश किए गए नितीश कुमार सरकार के ताजा हलफनामे में कहा कि वह राबड़ी देवी
शासन से इतर तस्लीमुद्दीन के खिलाफ मुकदमा जारी रखना चाहते हैं । जबकि पूर्ववर्ती
सरकार ने तस्लीमुद्दीन के खिलाफ मामला वापस लेने का मन बनाया था । उल्लेखनीय है कि
राबड़ी देवी सरकार ने २००४ में तस्लीमुद्दीन के खिलाफ मामले को वापस लेने का
हलफनामा भरा था । हालांकि बिहार के कानून विभाग के संयुक्त सचिव संजय कुमार की ओर
से जारी इस हलफनामे में कहा गया कि २००४ में सुनवाई अदालत में मुकदमा वापस लेने की
याचिका का आधार अब मौजूद नहीं है । ताजा हलफनामे में कहा गया कि तस्लीमुद्दीन के
खिलाफ अभियोग बहुत गंभीर और गैर जमानती है । आर्थिक सर्वेक्षण २००३ - ०४ में शिक्षा
और स्वास्थ्य को आर्थिक विकास की मानव पूंजी घोषित किया गया है और इसे विकास के
बुनियादी ढांचे के बराबर का दर्जा दिया गया है । विकास की उच्च दर को हासिल करने और
सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देने के लिए इन बुनियादी क्षेत्रों का विकास जरूरी है ।
गरीबी की जड़ अशिक्षा है और यदि २००७ तक गरीबी में ५ फीसदी की कमी लानी है तो
शिक्षा और स्वास्थ्य पर निवेश में बढ़ोतरी करनी होगी । सर्वेक्षण में कहा गया है कि
न्यूनतम साझा कार्यक्रम के अनुरूप शिक्षा पर व्यय को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाकर
जीडीपी का ६ फीसदी करने से सामाजिक क्षेत्र की काफी मुश्किलों का हल निकल आएगा ।
इसलिए सरकार का विचार है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति २००२ के तहत जन स्वास्थ्य में
निवेश को जीडीपी के ०.९ फीसदी से बढ़ाकर २०१० तक जीडीपी के २.० फीसदी तक लाया जाए ।
सर्वेक्षण में इस बात का खुलासा किया गया है कि वर्ष २००३ - ०४ के दौरान केंद्रीय
स्वास्थ्य क्षेत्र की योजनाओं के लिए आबंटित रकम में २००२ - ०३ के मुकाबले कोई
वृद्धि नहीं की गई । आर्थिक सर्वेक्षण २००३ - ०४ में कहा गया है कि राष्ट्रीय
शिक्षा नीति १९८६ के तहत निरक्षरता को पूरी तरह से समाप्त करने हेतु एक व्यापक
नीतिगत रूपरेखा तैयार की गई है और सकल घरेलू उत्पाद के ६ फीसदी की दर से शिक्षा पर
खर्च करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है । गौरतलब है कि वर्ष २००२ - ०३ के दौरान
शिक्षा पर केंद्र और राज्य सरकार द्वारा कुल मिलाकर जीडीपी का मात्र ३ फीसदी ही
व्यय किया गया । सर्वेक्षण के दौरान कुछ सुखद पहलू भी सामने आए हैं । पहली बार
जनसंख्या वृद्धि की तुलना में साक्षरता में अधिक वृद्धि हुई है और निरक्षर लोगों की
संख्या घटने लगी है । साक्षरता की वृद्धि दर १९५१ के १८.३ फीसदी से नाटकीय रूप से
बढ़कर २००१ में ६४.८ फीसदी हो गई । वर्ष १९९१ - २००० के दौरान साक्षर लोगों की
संख्या में ५९ फीसदी की दर से वृद्धि हुई जबकि इसी अवधि के दौरान साक्षरता में १२.६
फीसदी की रफ्तार से बढ़त हुई । पहली बार ऐसा हुआ है कि महिला साक्षरता की दर
पुरुषों को मात दे गई हो । इस तरह साक्षरता में लिंग भेद का अनुपात घटा है । आर्थिक
सर्वेक्षण २००३ - ०४ में कहा गया है कि प्राथमिक कक्षा में नामांकन के मामले में
लड़कियां लड़कों से आगे रही है । स्कूली शिक्षा के प्रत्येक स्तर पर लड़कियों की
भागीदारी बढ़ी है । उत्तर पूर्व के राज्य लड़कियों की प्राथमिक शिक्षा के मामले में
काफी आगे रहे हैं । उच्च शिक्षा में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ी है और १९९७ - ९८
के ७.२६ मिलियन से बढ़कर २००२ - ०३ में ९.२ मिलियन हो गई । इस दौरान उच्च शिक्षा
में महिलाओं की भागीदारी बढ़ कर ४० फीसदी हो गई । राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष व
रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने कहा है कि गोधरा मामले की फाइल दोबारा खोलने के
विरोध में ही विपक्ष उन पर दबाव बना रहा है । लालू ने कहा कि वह किसी के दबाव में
आने वाले नहीं । उन्होंने कहा कि गोधरा कांड में विभिन्न जांच रिपोर्टों का वह
अध्ययन कर रहे हैं और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा । मनमोहन सिंह
सरकार में दागी मंत्रियों पर विपक्ष के विरोध से क्षुब्ध लालू ने राष्ट्रीय
जनतांत्रिक गठबंधन पर 'दोहरे मानक' अपनाने का आरोप लगाया । उन्होंने कहा कि पिछली
सरकार में भी कई मंत्रियों के खिलाफ आपराधिक मामले थे, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री
ने इसे अपना विशेषाधिकार बताया था । लालू ने आरोप लगाया कि राजग के कई मंत्री
राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे हैं और वह उसे उजागर करेंगे । उन्होंने
आरोप लगाया कि पूर्व उप प्रधानमंत्री आडवाणी एक अंतर्राष्ट्रीय मामले में शामिल हैं
। उन्होंने यह मामला इंटरनेट से खोज निकाला है । उन्होंने कहा कि विपक्ष उनका मनोबल
तोड़ना चाहता है । लेकिन ऐसा नहीं होगा क्योंकि वह किसी की दया पर मंत्री नहीं बने
बल्कि अपने दम पर बने हैं । संसद भवन में प्रेस कांफ्रेंस बुलाकर लालू ने १३
दिसंबर, २००० को लोकसभा में नियम - १८४ के तहत अयोध्या मामले में आरोपी मंत्रियों
के मुद्दे पर हुई बहस का ब्योरा रखा । बहस कांग्रेस नेता जयपाल रेड्डी के प्रस्ताव
पर हुई थी । लोकसभा में बहस के दौरान प्रधानमंत्री वाजपेयी ने अपने मंत्रियों
लालकृष्ण आडवाणी, डॉ मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती का खुलकर बचाव किया था ।
वाजपेयी ने कहा था, जिन मंत्रियों को मंत्रिमंडल से हटाने की बात की जा रही है,
उनके त्यागपत्र लेने का सवाल ही नहीं पैदा होता है । वे अगर त्यागपत्र भी दे देंगे
तो मैं त्यागपत्र वापस कर दूंगा वहीं राज्यसभा में वाजपेयी ने कहा, 'मंत्री नियुक्त
करना मेरी जिम्मेदारी है और प्रधानमंत्री के नाते त्यागपत्र लेना भी मेरी
जिम्मेदारी है । क्या सदन तय करेगा कि किसे मंत्री होना चाहिए वाजपेयी के बयानों का
हवाला देते हुए लालू ने कहा कि राजग के प्रधानमंत्री जहां अपने मंत्रियों का बचाव
कर रहे थे वहीं अब वे हमारे इस्तीफे की मांग कर रहे हैं । लालू ने कहा कि जयललिता
और उमा भारती के खिलाफ भी आरोप हैं लेकिन वे अपने पदों पर बनी हैं । लालू ने विपक्ष
को चेतावनी दी है कि वे अपनी मुहिम खत्म करें वरना वह भी उनके दोहरे चरित्र का
पर्दाफाश करेंगे । कारगिल युद्ध के बारे में गठित सुब्रह्मण्यम समिति की रिपोर्ट को
खारिज करते हुए अवकाश प्राप्त ब्रिगेडियर सुरिंदर सिंह ने आरोप लगाया है कि सामरिक
दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण द्रास सेक्टर की एक महत्वपूर्ण चौकी अब भी पाकिस्तान के
कब्जे में है । कारगिल क्षेत्र में पाकिस्तानी घुसपैठ के बारे में सबसे पहले
जानकारी देने वाले अवकाश प्राप्त ब्रिगेडियर सुरिंदर सिंह ने कहा है कि टाइगर हिल
के निकट नियंत्रण रेखा के ३०० मीटर अंदर स्थित प्वाइंट ५३५३ अब भी पाकिस्तान के
कब्जे में है । कारगिल युद्ध के समय ब्रिगेडियर सिंह ब्रिगेड कमांडर थे ।
ब्रिगेडियर सिंह ने सुब्रह्मण्यम समिति की रिपोर्ट की किसी निवर्तमान जज से जांच
कराने की मांग की है । ब्रिगेडियर सिंह ने आरोप लगाया है कि इस समिति का गठन सरकार
की विफलता को छिपाने के साथ - साथ वरिष्ठ अधिकारियों को बचाने के लिए किया गया था ।
लड़ाई के दिनों को याद करते हुए ब्रिगेडियर सिंह ने कहा कि टाइगर हिल और तोलोलिंग
पर हमले के दौरान पाकिस्तानी सैनिकों ने प्वाइंट ५३५३ से हमारी सेना पर काफी
गोलीबारी की थी । उन्होंने कहा कि उपग्रह के चित्रों से भी यह पता चला है कि
पाकिस्तानी सेना ने इस चौकी पर अपना कब्जा जमाया हुआ है । ब्रितानी हुकूमत की
ग्रीष्मकालीन राजधानी रही शिमला की शीतल बयार में फुरसत के दिन गुजारने आई प्रियंका
गांधी वढेरा ने सोमवार को रिट्रीट के दीदार करने की हसरत पूरी कर ली । अपने पति
राबर्ट वढेरा के साथ रिट्रीट पहुंची प्रियंका बचपन की यादों में खो गई । वह उस
हैलीपेड को भी निहारना नहीं भूलीं जिसकी यादें उनके पापा यानि राजीव गांधी से जुड़ी
हैं । अपने तयशुदा कार्यक्रम के अनुसार उन्होंने सुबह - सुबह रिट्रीट के लिए कूच
किया । होटल वाइल्ड फ्लावर हॉल से कुछ फासले पर स्थित रिट्रीट को राष्ट्रपति के
ग्रीष्मकालीन रिहाइश के तौर पर जाना जाता है । यहां राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री
गर्मियों की छुट्टियां बिताने आते रहे हैं । प्रियंका की दादी पूर्व प्रधानमंत्री
स्व. इंदिरा गांधी और पिता स्व. राजीव गांधी की रिट्रीट सर्वाधिक पसंदीदा जगहों में
से रही है । प्रियंका को इस जगह पर अपनी दादी के साथ बचपन के कुछ दिन गुजारने का
अवसर मिला है । बचपन की वे यादें उनके स्मृति पटल पर आज तक ओझल नहीं हो पाई हैं ।
पता चला है कि प्रियंका देवदार के घने जंगलों के बीच फैले खूबसूरत रिट्रीट भवन
परिसर में टहलीं । उन्होंने अपने पति के साथ बचपन के उन क्षणों को भी बांटा, जो
उनकी स्मृतियों में अभी भी हैं । वह उस हेलीपैड को निहारना भी नहीं भूलीं जिसकी
यादें उनके पिता के शौक से जुड़ी हैं । बताते हैं कि विमान उड़ाने के शौकीन राजीव
की पहल पर ही हेलीपैड के दिन बहुतेरे थे । कल्याणी के नाम से जाना जाने वाला यह
हेलीपैड दर्शनीय है । इस हेलीपैड पर प्रियंका के पिता उड़ान भी भर चुके हैं ।
रिट्रीट की निर्जन दुनिया से निकलकर प्रियंका दोपहर तक होटल वापस लौट आई । इसके बाद
वह कहीं घूमने नहीं निकलीं । अलबत्ता शाम के वक्त जरूर वह होटल परिसर में कुछ देर
टहलीं । मंगलवार को प्रियंका के लौट जाने की संभावना है । उनके दौरे की गोपनीयता को
लेकर होटल प्रबंधन ने अपने मुलाजिमों को खास हिदायतें जारी की थीं । इन्हीं का
प्रभाव था कि आज होटल से जुड़े सूत्रों ने प्रियंका के कार्यक्रम को लेकर मुंह नहीं
खोले । प्रियंका के लौट जाने से मीडिया कर्मियों में खासी मायूसी है । उनके भरसक
प्रयासों के बावजूद प्रियंका से मुलाकात करने की हसरतें पूरी नहीं हो पाई ।
कांग्रेस के खुर्राट नेताओं ने भी प्रियंका की नितांत निजी यात्रा में दखलंदाजी
करने से परहेज किया । प्रियंका से मिलने की उन्होंने खास चाह नहीं दिखाई । हालांकि
चर्चाएं तो ये भी थीं कि मुख्यमंत्री व पीसीसी चीफ वढ़ेरा दंपत्ति को भोज की दावत
दे सकते हैं । गत रात्रि से मनाली की ऊंची चोटियों पर हिमपात व निचले क्षेत्रों में
बारिश होने से समूचा क्षेत्र ठंड की चपेट में आ गया है । रविवार की रात से ही मनाली
की हामटा पास, रोहतांग पास, लद्दाखी पीक, देऊ टिब्बा, चंद्रखणी जोत, पतालसु पीक,
मनाली पीक, हनुमान टिब्बा, ब्यास कुंड, शिरघण तुंग, शलीणधार, ७ सिस्टर पीक,
फ्रेंडशिप पीक तथा पीर पंजाल श्रृंखलाओं की अनेकों चोटियों पर ताजा हिमपात हुआ ।
ताजा हिमपात होने से घाटी के तापमान में गिरावट आने के कारण लोगों ने गर्म वस्त्र
पहनने शुरू कर दिए । जबकि मनाली में घूमने आए पर्यटक अपने होटल के कमरों से बाहर
होटल के प्रांगण में निकले और बारिश में भीगकर बारिश की भीनी - भीनी बूंदों का मजा
लेने लगे । वहीं स्थानीय लोगों के लिए यह बारिश वरदान से कम नहीं मानी जा रही है
क्योंकि सेब की अच्छी फसल के लिए समय - समय पर बारिश का होना जरूरी माना जाता है ।
वहीं पर पशुओं के चारे व अन्य फसलों की बिजाई के लिए यह बारिश अति उत्तम मानी जा
रही है । समय - समय पर हो रही बारिश तथा तापमान की अनुकूलता के कारण इस वर्ष अच्छी
फसल होने की उम्मीद जताई जा रही है । गत रात्रि से ही घाटी में काले बादल मंडराने
शुरू हो गए थे मगर घाटी में इंद्रदेव की नाराजगी से बारिश की हल्की - हल्की बौछारें
शुरू हुई । प्राप्त सूत्रों के अनुसार घाटी के ऊंचे क्षेत्रों में ड्रिलबु पीक व
संमजोतर पीक में हल्का हिमपात होने से घाटी के तापमान पर काफी गिरावट दर्ज की गई
जिससे घाटी के लोगों ने पुनः गर्म कपड़ों को पहनना शुरू कर दिया । श्रीराम जन्मभूमि
मंदिर - बाबरी मस्जिद प्रकरण के सर्वमान्य समाधान के लिए ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल
लॉ बोर्ड से नए प्रस्तावों के तहत बातचीत की तैयारी है । कांची कामकोटि पीठ के
शंकराचार्य स्वामी जयेंद्र सरस्वती ने समाधान के लिए पुनः प्रयास आरंभ कर दिया है ।
अयोध्या विवाद के हल के लिए अयोध्या प्रकरण समाधान समन्वय समिति का गठन किया गया है
। बोर्ड से बातचीत के लिए नए प्रस्ताव पर चर्चा को अयोध्या में इसी माह के तीसरे
हफ्ते बैठक होने वाली है । केंद्र में नई सरकार के गठन के साथ अयोध्या विवाद के
समाधान के लिए भी नए सिरे से प्रयास शुरू हो गए हैं । इस बार इसकी कमान कांची
कामिकोटि के शंकराचार्य स्वामी जयेंद्र सरस्वती के हाथ है । शंकराचार्य की जिन
लोगों से आमने - सामने बात नहीं हो पाई उनसे दूरभाष पर संपर्क करके अयोध्या प्रकरण
के समाधान पर सक्रिय योगदान देने के लिए भी कहा है । विवाद के समाधान के लिए लगातार
बातचीत का दौर और संपर्क जारी रखने के लिए अयोध्या प्रकरण समाधान समन्वय समिति का
गठन किया गया है । यह समिति शंकराचार्य के निर्देश में कार्यो का निष्पादन करेगी ।
इसमें सदस्य के तौर पर अयोध्या से विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र, फैजाबाद से खालिक
अहमद खान, चेन्नई से शंकराचार्य के प्रमुख सचिव सुंदर, अहमदाबाद से कृष्ण कुमार
सिंघल व नई दिल्ली से अयोध्या जामा मस्जिद ट्रस्ट के अध्यक्ष व प्रबंध न्यासी
अल्लामा सैयद असगर अब्बास रिजवी नामित किए गए हैं । रिजवी समिति के संयोजक बनाए गए
हैं । रिजवी ने भी समिति के गठन की पुष्टि की है । श्री रिजवी ने बताया कि समिति ने
अब तक अयोध्या प्रकरण के समाधान के लिए विचार मंथन चक्र चलाया । उन्होंने बताया कि
विभिन्न दलों के नेताओं के साथ शंकराचार्य जी ने अखिल भारतीय इमाम संगठन के अध्यक्ष
मौलाना जमील इलियासी, इस्लामिक कौंसिल आफ इंडिया के अध्यक्ष कारी मुहम्मद मियां
मजहरी, सिया मौलाना सैयद कल्वे रुशेद, हेलाल कमेटी फैजाबाद के पदाधिकारी सहित
देवबंद के खालिद अंसारी, ऑल इंडिया सिया कांफ्रेंस के सैयद जमीर सुल्तान सहित दूसरे
मौलानाओं से भी विचार - विमर्श किया । अयोध्या विवाद के हल के लिए नए सिरे से ऑल
इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से बातचीत की रणनीति भी है । इसके लिए प्रस्ताव पर
चर्चा शुरू होने वाली है । यह समाधान प्रस्ताव ३० सितंबर २००४ तक तैयार हो जाने की
उम्मीद है । इसकी पहली बैठक जून के तीसरे सप्ताह में अयोध्या में आयोजित होगी ।
इसकी पुष्टि समिति के संयोजक श्री रिजवी भी करते हैं । श्री रिजवी बताते हैं कि
समाधान प्रस्ताव सभी संबंधित पक्षों से विचार - विमर्श किया जाएगा तथा अंतिम तौर पर
शंकराचार्य जी महाराज और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना नदवी
साहब ही समाधान प्रस्ताव पर निर्णय करेंगे । वह बताते हैं कि समिति शंकराचार्य जी
के प्रति उत्तरदायी होगी । यह भारत सरकार अथवा अन्य शासकीय स्तर पर तभी संपर्क
करेगी, जब शंकराचार्य जी की तरफ से उनके प्रमुख सचिव लिखित तौर पर सूचित करेंगे ।
श्री रिजवी ने बताया कि अक्तूबर २००४ में दिल्ली के विज्ञान भवन में एक समाधान
सम्मेलन आयोजित किया जाएगा । इसकी अध्यक्षता शंकराचार्य जी करेंगे । सम्मेलन में
अयोध्या प्रकरण से जुड़े सभी पक्षों को आमंत्रित किया जाएगा । समाधान प्रस्ताव को
सम्मेलन में पारित करवाकर उसे प्रधानमंत्री सरदार मनमोहन सिंह को इस आशय से सौंपा
जाएगा कि भारत सरकार उच्चतम न्यायालय में याचिका पर समाधान प्रक्रिया सुनिश्चित कर
सके । उन्होंने साफ किया कि इस विषयक की जानकारी के लिए शंकराचार्य जी के प्रमुख
सचिव श्री सुंदर व समन्वय समिति के सदस्यगण ही अधिकृत प्रवक्ता हैं । आर्थिक
सर्वेक्षण में जताई गई आशंकाओं के बीच बृहस्पतिवार को पेश होने वाले केंद्रीय बजट
में कुछ साहसी निर्णय लिए जाने की उम्मीद है । सरकार वित्तीय घाटे और खर्च पर अंकुश
लगाने के साथ वेतनभोगी वर्ग को टैक्स में राहत दे सकती है । वित्त मंत्री पी.
चिदंबरम कल यूपीए सरकार का पहला बजट पेश करेंगे । इस बात की पूरी उम्मीद है कि
पूर्ववर्तियों से सबक लेते हुए वह एक ही हिस्से में बजट पेश करें । इस बजट में आयकर
छूट सीमा 70,000 - 1,00,000 करने तथा बुनियादी शिक्षा के लिए धन जुटाने के मकसद से
प्रत्यक्ष करों पर दो फीसदी उपकर लगाए जाने की आशा है । सूत्रों के मुताबिक बजट के
साथ ही चिदंबरम तीन दस्तावेज - माक्रो - इकॉनामिक फ्रेमवर्क स्टेटमेंट, मीडियम टर्म
फिस्किल पॉलिसी स्टेटमेंट तथा फिस्कल पॉलिसी स्ट्रेटजी स्टेटमेंट पेश करेंगे ।
मीडियम टर्म फिस्कल पॉलिसी स्टेटमेंट के तहत मुख्य वित्तीय मानकों के लिए तीन साल
का 'रोलिंग टॉरगेट' तय किया जाएगा । यह वित्तीय घाटे को कम करने के लिए सरकार के
प्रयासों का मुख्य आधार बनेगा । सूत्रों ने बताया कि वित्तीय जिम्मेदारी और बजट
प्रबंधन कानून 2003 'एफआरबीएम' की शर्तो के मुताबिक वित्तीय घाटे को सकल घरेलू
उत्पाद के 4.3 फीसदी से कम रखने का उपाय किया जा सकता है । विकास दर 7 - 8 फीसदी
रखने के मद्देनजर बजट में सुधार उपायों के जारी रखने की उम्मीद है । इसमें
बुनियादी, कृषि और सामाजिक क्षेत्रों में सार्वजनिक निवेश भी शामिल है । वहीं कम से
कम 10 फीसदी औद्योगिक विकास दर को हासिल करने के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश
(एफडीआई) व्यवस्था उदार बनाए जाने की संभावना है । सूत्रों ने बताया कि वैश्विक
स्तर पर ब्याज दरों में उछाल आने तथा पिछले कुछ हफ्तों में मुद्रास्फीती बढ़ने के
मद्देनजर बजट में लघु बचत दरों को 8 - 8.5 फीसदी ही रखे जाने की उम्मीद है ।
प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों दोनों में ही कोई खास परिवर्तन की संभावना नहीं है ।
सूत्रों ने बताया कि वित्त मंत्री 3 फीसदी अधिभार हटा सकते हैं, लेकिन उसके बदले 2
फीसदी उपकर लगाया जा सकता है । आर्थिक सर्वे में सीमा शुल्क को आसियान स्तर पर लाने
की जरूरत पर बल दिया गया है, इसलिए कच्चे मालों की दरों में कुछ बदलाव किया जा सकता
है, लेकिन पीक रेट 20 फीसदी ही रहेगा । इसके अलावा टेक्सटाइल क्षेत्र को भी कुछ
टैक्स राहत मिल सकती है । राज्यसभा सांसद और रिलायंस समूह के उपाध्यक्ष अनिल अंबानी
ने अपना फोन टैप किये जाने का सनसनीखेज आरोप लगाया है । उनका कहना है कि रिलायंस
इंफोकॉम के एक निदेशक और दो अधिकारी मिल कर इस आपराधिक कृत्य को अंजाम दे रहे हैं ।
उन्होंने गृह मंत्री शिवराज पाटिल को लिख कर इस मामले की जांच की मांग की है ।
रिलायंस इंफोकॉम के अध्यक्ष मुकेश अंबानी हैं और कंपनी ने बृहस्पतिवार को इस आरोप
का खंडन किया है । उन्होंने इसे आधारहीन और द्वेषपूर्ण बताया है । गौरतलब है कि
रिलायंस समूह में स्वामित्व विवाद के निपटारे के लिए किसी फॉर्मूले पर अमल की बात
चल रही है और ताजा घटनाक्रम को इससे जोड़कर भी देखा जा रहा है । ऐसी खबरें हैं कि
रिलायंस इंफोकॉम, रिलायंस कैपिटल और रिलायंस एनर्जी अनिल के हिस्से में आ सकतीं हैं
। अनिल ने पाटिल को लिख कर कहा कि विश्वस्त सूत्रों से उन्हें पता चला है कि इस
आपराधिक कृत्य के पीछे सारा दिमाग रिलायंस इंफोकॉम के एक निदेशक का है । पत्र में
अनिल ने निदेशक का नाम भी लिखा है । माना जा रहा है कि सरकार ने प्रारंभिक जांच के
लिए यह खुफिया एजेंसियों के पास भेज दिया है । गृह मंत्रालय ने धमकी भरे फोन मिलने
की शिकायत के बाद अनिल को पिछले महीने ही सुरक्षा प्रदान की थी । अनिल ने इस निदेशक
की मदद करने वाले रिलायंस समूह के दो वरिष्ठ अधिकारियों के नामों का भी उल्लेख किया
है । अनिल का कहना है कि उनके मोबाइल और लैंड लाइन फोन को टैप करने में लिप्त लोगों
के पास जीएसएम चिप क्लोनिंग मशीनें और अन्य टैपिंग उपकरण हो सकते हैं, जो इस्राइल
और अन्य देशों में बिक्री के लिए उपलब्ध हैं । अनिल ने कहा कि यदि इन लोगों ने यह
हरकत की है तो संसद के चुने हुए सदस्य और एक नागरिक के तौर पर उनके संवैधानिक
अधिकारों के संपूर्ण उल्लंघन और उनकी निजता का आपराधिक हनन है । अनिल ने इसमें लिखा
है कि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए वह एक सक्षम सरकारी एजेंसी से मामले की
तत्काल जांच के आदेश देने का अनुरोध करते हैं । पूर्वी दिल्ली जिला पुलिस कार्यालय
परिसर से सटे भोलानाथ नगर स्थित तिमंजिला हौज़री फैक्टरी में आग लगने से 12 कारीगर
काल के गाल में समा गए । पांच कारीगर जान बचाने के लिए दूसरी मंजिल से कूद गए और
घायल हो गए । घायलों को अलग - अलग अस्पताल में भर्ती कराया गया है । फैक्टरी में
लाखों रुपये का सामान जलकर राख हो गया । फैक्टरी से सटे दो मकानों की दीवारों में
दरार आ गई । आग पर काबू पाने के लिए दमकल की करीब तीन दर्जन गाड़ियां भेजी गई और
लगभग 75 से अधिक दमकलकर्मियों को चार घंटे तक जूझना पड़ा । पूर्वी जिला पुलिस
अधिकारियों का कहना है कि शवों को सब्जी मंडी पोस्टमार्टम हाउस भेजा गया है ।
अधिकांश शवों की पहचान कर ली गई है । इस संबंध में फैक्टरी मालिक राकेश ग्रोवर और
ठेकेदार हरिकिशन के खिलाफ मामला दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी गई है । हादसे की
जानकारी मिलने पर दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और यमुनापार विकास बोर्ड
अध्यक्ष डॉक्टर नरेंद्र नाथ घटनास्थल पर पहुंचे । आग की घटना बुधवार सुबह करीब
साढ़े दस बजे भोलानाथ नगर गली नंबर - 16 स्थित फैक्टरी नंबर 25ए - 16 विश्वास नगर
में हुई । बताया जाता है कि इस फैक्टरी में पेरिस ब्यूटी के नाम से अंतःवस्त्र बनाए
जाते हैं । फैक्टरी मालिक राकेश ग्रोवर हैं जिनका ग्रोवर एंड संस के नाम से काफी
बड़ा कारोबार है । प्रतिदिन की तरह सुबह कर्मचारी फैक्टरी पर पहुंचे और काम में लग
गए । फैक्टरी की पहली मंजिल तथा दूसरी मंजिल पर फोम तथा अन्य हौज़री का सामान रखा
था । एक कारीगर थिनर से कपड़े साफ कर रहा था कि अचानक एक मशीन में स्पार्क हो गया
और आग लग गई । फोम तथा कपड़ों में लगी आग ने चंद ही मिनटों में उग्र रूप ले लिया ।
वहीं कुछ कारीगर दूसरी मंजिल से कूद गए । घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने बताया कि ऊपर
से कूदने की वजह से संजय नामक कारीगर के पैरों में चोट आई । फैक्टरी से आग की लपटें
बराबर के मकानों तक पहुंचने लगीं तो लोगों में खलबली मच गई । मकान नंबर 1993ए
निवासी मंगल सेन जैन तथा 1993बी निवासी राजीव जैन ने बताया कि आग की वजह से उनके
मकानों की दीवारों में दरार आ गई और ऊपरी हिस्सा टूट गया । मंगल सेन के मकान की
दीवार तो पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई । करीब 11 बजे दमकल विभाग तथा पुलिस नियंत्रण
कक्ष को आग लगने की सूचना दी गई । करीब पौने दो बजे आग पर काबू पाया गया । इस घटना
में 12 लोगों की मौत हो गई । दूसरी मंजिल से शवों को नीचे उतारकर पोस्टमार्टम के
लिए सब्जी मंडी मुर्दाघर भेजा गया । घायल संजय को हेडगेवार अस्पताल में भर्ती कराया
गया है जबकि चार अन्य को प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया । उपायुक्त मधुप तिवारी ने
बताया कि इस संबंध में फैक्टरी मालिक राकेश ग्रोवर तथा ठेकेदार के खिलाफ लापरवाही
से हुई मौत तथा आगजनी की धारा 304ए तथा 337 के तहत मामला दर्ज किया गया है । राकेश
ग्रोवर की और भी कई यूनिट हैं लेकिन इस यूनिट का ठेकेदार हरिकिशन है । इन दोनों की
तलाश की जा रही है । कांग्रेस चाहती है कि राज्यसभा का उपसभापति पद चुनावी संघर्ष
के बजाय आम सहमति से तय हो । कांग्रेस इस पद पर अपना दावा मजबूती से पेश करेगी ।
हालांकि अब तक भाजपा व एनडीए नेतृत्व की ओर से कांग्रेस के इस तर्क को कोई समर्थन
नहीं मिला है कि सदनों के प्रमुखों के चार पदों में से कम से कम एक पद सत्ताधारी दल
को मिलना चाहिए । भाजपा की नेता सुषमा स्वराज ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि
भैंरो सिंह शेखावत उपराष्ट्रपति हैं और उन्हें किसी दल का व्यक्ति नहीं माना जा
सकता । यदि राज्यसभा का उपसभापति पद कांग्रेस को दिए जाने पर सहमति बनती है तो हाल
ही में राज्यसभा सदस्य बनीं मोहसिना किदवई का नाम सबसे ऊपर माना जा रहा है ।
मोहसिना किदवई को कांग्रेस नजमा हेपतुल्ला के माकूल जवाब की तरह देख रही है ।
कांग्रेस के पास संसद के पीठासीन अधिकारियों के चार में से कोई पद नहीं है । लोकसभा
अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी वाम मोरचे से हैं, जो यूपीए में शामिल नहीं है बल्कि बाहर से
समर्थन दे रहें हैं । कांग्रेस का तर्क यह भी है कि लोकसभा उपाध्यक्ष का पद परंपरा
के मुताबिक विपक्ष को प्रस्तावित था और एनडीए ने अकाली दल को यह पद दे दिया । इसके
उलट भाजपा के तर्क हैं । जबकि बाकी तीनों पदों में सदन के सदस्य को ही लिया जाता है
। भाजपा का तर्क यह भी है कि एनडीए के सत्ता में रहते हुए लोकसभा में अध्यक्ष और
उपाध्यक्ष का पद भी उनके पास नहीं था । एक बार यह पद टीडीपी के पास था और बाद में
शिवसेना के पास था । टीडीपी ने भी बाहर से समर्थन दिया था । उपाध्यक्ष पद कांग्रेस
के पास ही था । पी. एम. सईद उपाध्यक्ष थे । राज्यसभा में भी नजमा हेपतुल्ला
कांग्रेस के सदस्य के रूप में ही राज्यसभा में आई थीं और बाद में वह भाजपा के टिकट
पर अब आई हैं । इस बात की संभावना है कि संसदीय कार्यमंत्री गुलाम नबी आजाद इस
मामले में अगले कुछ दिनों में एनडीए के शीर्ष नेताओं से बात कर सकते हैं । लालकृष्ण
आडवाणी से बातचीत के बाद इस मामले में आम सहमति के प्रयास किए जा रहे हैं । लेकिन
फिलहाल यह मामला कांग्रेस की प्राथमिकता में सबसे ऊपर नहीं है । मंगलोर की १५
वर्षीय एक छात्रा की पाती ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के दिल को छू
लिया । मुशर्रफ ने इस छात्रा को लिखकर आश्वस्त किया है कि दोनों पड़ोसी देशों के
बीच मधुर संबंध होने के उसके सपनों को साकार किया जाएगा । केंद्रीय विद्यालय की
१०वीं की छात्रा सृष्टि कृष्णमूर्ति के पिता और स्कूल के प्रधानाचार्य ने बताया कि
सृष्टि ने भारत - पाक क्रिकेट सीरीज़ के बाद 'सिंबायोसिस' शीर्षक से एक कविता लिखकर
मुशर्रफ को भेजी थी । हालांकि सृष्टि को इस बात की कतई उम्मीद नहीं थी कि मुशर्रफ
कविता के रूप में लिखे गए उसके पत्र का जवाब देंगे । इस कविता में सृष्टि ने उम्मीद
जताई है कि दोनों देशों के बीच अच्छे संबंध केवल खेल के मैदान तक ही सीमित नहीं
रहेंगे । कविता में उसने कहा है कि वह यह सोच कर रोमांचित हो उठती है कि हम सभी के
अंदर एक आत्मा है । सृष्टि के पिता ने बताया कि भारत - पाक संबंधों में पुल का काम
करने वाली क्रिकेट सीरीज से प्रसन्न पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने सृष्टि को भेजे गए
पत्र में उसकी बुद्धिमत्ता की जमकर तारीफ की है । बजट पूर्व आर्थिक सर्वेक्षण में
सरकार से सिफारिश की गई है कि इंटरनेट से ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ने के उपाय
किए जाएं । सर्वे के मुताबिक ब्रॉडबैंड सुविधा में विकास कई देशों में सबसे बड़ी
समस्या बनी हुई है, वहीं दक्षिण कोरिया जैसे कुछ देशों में ब्रॉडबैंड के जरिए
इंटरनेट ने घरों में पहुंच बना ली है । वर्ष २००३ - ०४ में टेलीफोन कनेक्शन में
तकरीबन ४० फीसदी वृद्धि दर्ज करने के बाद सर्वे में यह उम्मीद जताई गई है कि वर्ष
२००४ - ०५ में यदि इसी गति से बढ़ोतरी हुई तो वर्ष २००५ - ०६ के अंत तक ग्राहकों की
संख्या १५ करोड़ तक पहुंच जाएगी । सर्वे में इस बात पर चिंता जताई गई है कि इसके
बावजूद मार्च २००६ तक टेलीफोन घनत्व केवल १४ रहेगा । हालांकि मोबाइल फोन में वृद्धि
दर को देखते हुए वर्ष २००५ - ०६ तक टेलीफोन घनत्व १७ तक पहुंचने की उम्मीद की गई है
। मार्च २००४ तक इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों की संख्या ३६ लाख से बढ़कर ४२ लाख हो
गई है । यह वृद्धि १५ फीसदी है । सर्वे में कहा गया है कि बेसिक व सेलुलर सेवाओं के
लिए एकीकृत लाइसैंस व्यवस्था पिछले साल शुरू की जा चुकी है । प्रतियोगिता की वजह
से, खासकर सेलुलर क्षेत्र में, एसटीडी और आईएसडी शुल्क में आई गिरावट की सर्वे में
सराहना की गई है । इस रकम का इस्तेमाल ग्रामीण व गैर - आर्थिक क्षेत्रों में
टेलीकॉम सुविधा के विस्तार के लिए किया जा रहा है । हालांकि मोबाइल फोन के मामले
में सार्वजनिक क्षेत्र के ग्राहकों की संख्या २६.४ लाख से बढ़कर ६० लाख हो गई है ।
श्रीलंका में १६ जुलाई से शुरू हो रहे एशिया कप के लिए घोषित १४ सदस्यीय भारतीय
क्रिकेट टीम में तेज गेंदबाज अजीत अगरकर को जगह नहीं दी गई है । वहीं पाकिस्तान के
खिलाफ पिछली वन - डे सिरीज में टीम से बाहर रहे स्पिनर अनिल कुंबले व हरभजन सिंह को
टीम में स्थान मिला है । भारतीय क्रिकेट बोर्ड के सचिव एस. के. नायर द्वारा बुधवार
को यहां घोषित टीम में पार्थिव पटेल को अतिरिक्त विकेटकीपर के रूप में स्थान दिया
गया है । अगरकर को बाहर करने के अलावा टीम में कोई बड़ा परिवर्तन नहीं किया गया है
। राष्ट्रीय चयनकर्ताओं ने पाकिस्तान के खिलाफ हालिया सिरीज में सफलता हासिल करने
वाले भारतीय दल के अधिकांश खिलाड़ियों को टीम में बरकरार रखा है । ऑफ स्पिनर हरभजन
की चोट की वजह से छह माह तक टीम से बाहर रहने के बाद वापसी हुई है, जबकि कुंबले
पाकिस्तान के खिलाफ वन - डे सिरीज में नहीं खेल पाने के बाद टीम में वापसी कर रहे
हैं । बाएं हाथ के तेज गेंदबाज जहीर खान व आशीष नेहरा भी श्रीलंका में १६ जुलाई से
शुरू हो रहे एशिया कप टूर्नामेंट के लिए टीम में जगह बनाने में कामयाब रहे । कुंबले
व हरभजन के साथ इन दोनों तेज गेंदबाजों की टीम में मौजूदगी का मतलब हुआ कि भारत
लंबे अरसे बाद किसी टूर्नामेंट में अपने पूरी क्षमता वाले गेंदबाजी आक्रमण के साथ
उतरेगा । एशिया कप के लिए घोषित २० संभावित खिलाड़ियों में से अगरकर के अलावा रोहन
गावस्कर, हेमांग बदानी, रमेश पवार, अमित भंडारी और मुरली कार्तिक टीम में जगह नहीं
पा सके । टीम सौरव गांगुली (कप्तान), राहुल द्रविड़, सचिन तेंदुलकर, युवराज सिंह,
वीवीएस लक्ष्मण, वीरेंद्र सहवाग, मोहम्मद कैफ, पार्थिव पटेल, अनिल कुंबले, हरभजन
सिंह, जहीर खान, आशीष नेहरा, इरफान पठान व लक्ष्मीपति बालाजी । पंजाब, हरियाणा और
चंडीगढ़ में बुधवार सुबह हुई हल्की बारिश से लोगों के चेहरे खुशी से जरूर खिल उठे
लेकिन मानसून के लिए अभी उन्हें कुछ दिन और इंतजार करना होगा । मौसम विभाग ने बताया
कि इन जगहों पर बुधवार सुबह हुई बारिश, मानसून की वर्षा नहीं थी । लोगों को इसके
लिए कुछ और दिन इंतजार करना पड़ेगा । चंडीगढ़ व दिल्ली के सफदरजंग स्थित मौसम विभाग
का कहना है कि इन राज्यों में मानसून के लिए स्थिति अनुकूल नहीं बन पाई है । इन
राज्यों में मानसून प्रवेश करने में कुछ दिन और लगेंगे । मौसम विभाग के मुताबिक
यमुनानगर जिले के छछरौली और फरीदाबाद जिले के पलवल में बुधवार को मानसून पूर्व
बारिश हुई । चंडीगढ़ में बुधवार सुबह से ही आकाश में काले घने बादल छाये हुए थे ।
सुबह हुई हल्की बारिश से तापमान कम हुआ है और लोगों को गर्मी से राहत मिली है ।
यूपीए सरकार ने आठ फीसदी की विकास दर को बनाए रखने के लिए अपनी प्राथमिकताएं तय
करते हुए इसे हासिल करने के लिए कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य व बुनियादी क्षेत्र पर
विशेष घ्यान देने की बात कही है । बुधवार को लोकसभा में आर्थिक सर्वेक्षण पेश करते
हुए वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने अर्थव्यवस्था की सुनहरी तसवीर के साथ कुछ खतरों की
ओर भी इशारा किया । खासकर पेट्रोलियम पदार्थो की अंतर्राष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी
रुझान को देखते हुए महंगाई और ब्याज दरों में तेजी आ सकती है । इससे सरकार के
अनुमान धरे के धरे रह सकते हैं । खासकर, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की बढ़ती
कीमतों का देश की आर्थिक विकास दर पर पड़ने वाले असर को लेकर सर्वे काफी गंभीर है ।
इसमें कहा गया है कि बाहरी दबाव के साथ आंतरिक दबाव भी झेलने होंगे । उद्योग जगत की
ओर से ऋण की मांग में बढ़ोतरी और राजकोषी घाटे में वृद्धि के कारण निम्न ब्याज दरों
के फायदे छूमंतर हो सकते हैं । ब्याज दरों में तेजी से महंगाई भी बढ़ सकती है ।
सर्वे में कर न देने की प्रवृत्ति पर भी चिंता जाहिर की गई है । सर्वे में कहा गया
है कि उच्च शिक्षा की फीस बढ़ाने की जरूरत है । अच्छे मानसून के कारण खाद्यान्नों
की पैदावार २००२ - ०३ के १७.४२ करोड़ टन से बढ़ कर २००३ - ०४ के २१.०८ करोड़ टन
पहुंच गई । इस दौरान अनाज और दलहन दोनों की पैदावार में वृद्धि हुई । सामान्य
मानसून की संभावना के मद्देनजर २००३ - ०४ में खाद्यान्नों की पैदावार बढ़ने की
उम्मीद है । सर्वे में कहा गया है कि कृषि क्षेत्र में कार्य कर रहे अतिरिक्त
श्रमिकों को उद्योग में रोजगार देने और इसके लिए कृषि प्रसंस्करण उद्योगों को
बढ़ावा देने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा । सरकार ने मुद्रा स्फीति पर नियंत्रण
रखने की वचनबद्धता दोहराई है । केंद्र सरकार के अनुसार यद्यपि टेलीकॉम, सड़क और
बंदरगाह जैसी सुविधाओं के क्षेत्र में मांग और पूर्ति का अंतर कम हुआ है, पर इन
सुविधाओं के अभाव के कारण आर्थिक विकास में बाधा आ रही है । आर्थिक सर्वेक्षण २००४
में कहा गया है कि सामाजिक इन्फ्रास्ट्रक्चर को भौतिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के बराबर
महत्व देने की गरज से राष्ट्रीय साझा न्यूनतम कार्यक्रम के अनुरूप शिक्षा और
स्वास्थ्य पर विशेष बल दिया जाएगा । नतीजतन, बजट अनुमान २००३ - ०४ में शिक्षा और
स्वास्थ्य पर सार्वजनिक व्यय को बढ़ा कर जीडीपी का क्रमशः ६ फीसदी और २ - ३ फीसदी
करने का निर्णय लिया गया है । आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि वर्ष २००३ - ०४
के दौरान भारतीय अर्थवयवस्था में ८.१ फीसदी की दर से वृद्धि हुई है । उद्योग और
सेवा क्षेत्र में वृद्धि से भी जीडीपी की बढ़त को सहयोग मिला है । कृषि क्षेत्र में
९.१ फीसदी की दर से वृद्धि हुई है और इसका जीडीपी में भारी योगदान रहा । वर्ष २००३
- ०४ के दौरान मूल्यों में कमोबेश स्थिरता बनी रही । मुद्रास्फीति की औसत दर ५.५
फीसदी रही । मूल्यों की बढ़त में निर्माण क्षेत्र का भारी योगदान रहा । मई २००४ तक
विदेशी मुद्रा भंडार ११९.३ अरब डॉलर की ऊंचाई को छू गया । केंद्र सरकार ने बुधवार
को कहा कि ब्रिटेन द्वारा निर्मित हॉक उन्नत प्रशिक्षण विमान (एजेटी) भारत को
सितंबर, २००७ से मिलने शुरू हो जाएँगे । इन विमानों के लिए भारतीय वायु - सेना के
७५ पायलेटों को अगले साढ़े तीन साल में ब्रिटेन में प्रशिक्षित किया जाएगा । एक
सवाल के जवाब में राज्यसभा में रक्षा मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि सरकार ने हॉक
एजेटी के लिए ब्रिटिश सरकार के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किया है । इसके तहत भारत
को फरवरी, २००८ तक कुल ६६ में से २४ हॉक एजेटी विमान मिल जाएँगे । शेष ४२ विमानों
का निर्माण हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड में किया जाएगा । सेना को इन विमानों की
आपूर्ति मार्च, २००८ से शुरू होगी, जो मई २०१० तक चलेगी । रक्षा मंत्री ने इस बात
से इन्कार किया कि ब्रिटिश एरोस्पेस ने 'मैन - डिज़ाइन वर्क' के लिए पाँच करोड़
अमेरिकी डॉलर की माँग की है और इसे पूरा नहीं किए जाने पर सौदा रद्द करने की धमकी
दी है । पायलेटों के प्रशिक्षण के बारे में मुखर्जी ने कहा कि हर तीन महीने में छह
से आठ पायलेटों को ब्रिटेन में प्रशिक्षित किया जाएगा । उन्होंने बताया कि अभी पहले
बैच का प्रशिक्षण शुरू नहीं हुआ है । मंत्री ने बताया कि दूसरे और तीसरे बैच का
प्रशिक्षण क्रमशः २० सितंबर, २००४ और ३ मार्च, २००५ से शुरू किए जाने की बात है ।
हाईपर प्लेन के बारे में जानकारी देते हुए मुखर्जी ने कहा कि रक्षा वैज्ञानिकों ने
हाईपर प्लेन की आरंभिक परिकल्पना तैयार कर ली है । इसके आधार पर शैक्षणिक संस्थानों
की भागीदारी से कुछ तक़नीकी पैकेज विकसित कर लिए गए हैं । इसके साथ ही उन्होंने
बताया कि अभी तक हाईपर प्लेन विकसित करने की परियोजना को मंजूरी नहीं दी गई है ।
उन्होंने बताया कि १५५ मिमी ५२ कैलिबर की हॉविटजर प्रणाली पर अभी कुछ और परीक्षण
किए जाने हैं । चैरीटेबल अस्पताल बनाने के नाम पर ७० लोगों ने सरकार से भूमि ली है
। मगर तय शर्तो के अनुसार उन्होंने गरीब मरीज़ों का इलाज करने से इन्कार कर दिया ।
दिल्ली हाईकोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए जाँच का आदेश दिया है । इसके अलावा सभी
अस्पतालों को फिलहाल दो हजार रुपये मासिक आय वाले परिवार का अस्पताल में निःशुल्क
इलाज करने का निर्देश दिया है । न्यायमूर्ति विजेन्द्र जैन और न्यायमूर्ति रेखा
शर्मा की खंडपीठ के समक्ष मंगलवार को अदालत के ही निर्देश पर गठित कमेटी ने विस्तृत
रिपोर्ट दाखिल की । अदालत ने इसके आधार पर निर्देश दिया कि सस्ती दर पर भूमि
प्राप्त करने वाले अस्पताल किसी भी मरीज़ को भर्ती करने के दौरान उससे आय संबंधी
कोई भी दस्तावेज या फिर बीपीएल कार्ड इत्यादि नहीं माँगेगा । दाखिले के समय मरीज़
से फार्म भराकर कि उसकी आय दो हजार रुपये मासिक से ज्यादा नहीं है और इलाज शुरू कर
दें । इसके बाद ही इसकी जाँच की जाए । अदालत ने कमेटी की इस रिपोर्ट को भी गंभीरता
से लिया कि सस्ती दर पर भूमि लेने वाले २८ अस्पतालों का कोई पता नहीं है और बताए
पते पर उनका कोई रिकार्ड ही नहीं है । अदालत ने इसकी विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को
कहा है । इसी प्रकार खंडपीठ ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वे कमेटी की रिपोर्ट
के अनुसार सभी अस्पतालों में नोटिस बोर्ड लगवाएँ जिसमें तय निशुल्क बेड की संख्या
और अन्य प्रकार की जानकारी दी जाए । इसके अलावा सभी नियमों की आम लोगों को जानकारी
देने के लिए इसका प्रचार किया जाए । कमेटी ने रिपोर्ट में कहा कि उन्होंने बत्रा,
एस्कॉर्टस, जी. एम. मोदी, बिमला देवी, एमकेडब्ल्यू, दीपक मैमोरियल अस्पताल इत्यादि
का दौरा किया और पाया कि किसी भी अस्पताल में गरीब मरीज़ के इलाज के लिए तय नियमों
का पालन नहीं हुआ । अधिकांश अस्पतालों से इससे संबंधित रिकॉर्ड नहीं है और
अस्पतालों ने २५ प्रतिशत की अपेक्षा कुछ ही बेड गरीबों के लिए रखे हैं । इसके अलावा
भर्ती के लिए नियम ऐसे हैं कि उसमें गरीबों की भर्ती मुश्किल है । कमेटी ने पाँच
हजार मासिक आय तक के परिवार को निःशुल्क इलाज की सुविधा देने की सिफारिश की ।
रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाक़ात की । प्रतिनिधिमंडल ने बिहार में बिजली की
स्थिति से प्रधानमंत्री को अवगत कराते हुए राज्य में परमाणु रिएक्टर की स्थापना की
माँग रखी । प्रधानमंत्री ने इस संबंध में परमाणु ऊर्जा आयोग को लिखने का भरोसा दिया
है । प्रतिनिधिमंडल में केंद्रीय मंत्री पी. सी. गुप्ता, कांति सिंह, एम. ए. ए.
फातमी और सांसद विजय किशन, रघुनाथ झा, कुमकुम राय व वीरचंद पासवान शामिल थे ।
दिल्ली पुलिस ने हवारा और उसके साथी को दिल्ली के ही किसी स्थान से गिरफ्तार करने
का दावा किया है । जबकि कुछ प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हवारा और उसके साथी को
दिल्ली पुलिस की स्पेशल ब्रांच ने पंजाब यूनीवर्सिटी के मुख्य द्वार से काबू किया
है । हालांकि, जिला पुलिस इस बात की पुष्टि करने को तैयार नहीं है । बताया जाता है
कि दिल्ली के सिनेमा घरों में हुए विस्फोटों के एक आरोपी को नवांशहर से धरने के बाद
दिल्ली पुलिस को उससे पूछ - ताछ में हवारा और उसके साथी के ठिकाने के बारे में पता
लगा । पूछ - ताछ में दिल्ली पुलिस को पता लगा कि हवारा और उसका साथी पटियाला की
पंजाब यूनीवर्सिटी में कुछ लोगों से मिलने गया है । इसके बाद दिल्ली पुलिस ने पूरी
योजना के साथ पटियाला में डेरा डाला । मंगलवार को ११ से १२ बजे के बीच यूनीवर्सिटी
के मुख्य द्वार पर एक कार रुकी, जिसमें दो लोग बैठे हुए थे । वहीं पर सादे कपड़ों
में मौजूद दिल्ली पुलिस ने इस कार पर धावा बोल दिया । भनक लगते ही कार में बैठे
दोनों व्यक्ति भागने लगे । एक मार्केट की ओर भागा और एक की पिस्तौल व मोबाइल गिर
गया । मार्केट की ओर भागे व्यक्ति को पुलिस ने दौड़ाकर उसकी कनपटी पर पिस्तौल लगाकर
काबू कर लिया । दूसरा भागने के चक्कर में यूनीवर्सिटी के आसपास लगी कंटीली तारों
में फंस गया । दिल्ली पुलिस दोनों को पकड़ने के बाद वहाँ से फौरन रवाना हो गई ।
इसकी सूचना पटियाला पुलिस को भी नहीं दी गई । सूत्र बताते हैं कि हवारा की
गिरफ्तारी को लेकर पंजाब पुलिस और दिल्ली पुलिस के बीच काफी विवाद भी चला । पंजाब
पुलिस का कहना था कि उसके अधिकार क्षेत्र में हवारा को पकड़ने की कार्रवाई उसको
जानकारी देने के बाद होनी चाहिए थी । यही कारण है कि हवारा की गिरफ्तारी दिल्ली
पुलिस ने काफी देर बाद खोली । पटियाला पुलिस को इस कार्रवाई की भनक काफी देर बाद
लगी । मंगलवार की रात एसएसपी ए. एस. रॉय की अगुआई में पुलिस टीम ने यूनीवर्सिटी
जाकर वहाँ के सुरक्षा अधिकारी से भी इस संबंध में बात की । एसएसपी ए. एस. रॉय का
कहना है कि हवारा के यहाँ से गिरफ्तार होने के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है
। भारत के कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल वी. एन. कॉल ने कहा है कि सार्वजनिक उपक्रमों के
विनिवेश का लेखा ऑडिटरों के सामने एक नई चुनौती के रूप में खड़ा हुआ है । कॉल
सोमवार से शुरू हुए २५ विकासशील देशों के वित्त नियंत्रकों एवं ऑडिटरों के लिए
आयोजित एक माह के अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन कर रहे थे । इस
कार्यक्रम में भारत के अलावा अफगानिस्तान, बांग्लादेश, कोरिया, थाईलैंड, वियतनाम,
मॉरीशस, नेपाल, ओमान, श्रीलंका, घाना व उजबेकिस्तान के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं ।
कॉल ने कहा कि आम जनता के हित में विनिवेश की पूरी प्रक्रिया की आर्थिक जानकारी
उपलब्ध कराना ऑडिटरों की जिम्मेदारी है । उन्होंने कहा कि नियामक अधिकरणों और
सार्वजनिक उपक्रमों की पारदर्शिता लेखा के मामले में महत्वपूर्ण होती जा रही है ।
आर्थिक उदारवाद व भूमंडलीकरण के प्रभाव से आज सार्वजनिक उपक्रमों को प्रतिस्पर्धा
का सामना करना पड़ रहा है । इस स्थिति में सार्वजनिक उपक्रमों को अपने काम - काज के
तरीके में बदलाव लाने की जरूरत है । कॉल ने कहा कि विकासशील देशों में इस तरह के
परिवर्तन ज्यादा हो रहे हैं । इसलिए ऑडिटरों को बदलते माहौल में सार्वजनिक उपक्रमों
का लेखा तैयार करने के लिए नए कौशल विकसित करने होंगे । इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का
आयोजन इंटरनेशनल सेंटर फॉर इन्फॉर्मेशन सिस्टम्स एंड ऑडिट द्वारा नोएडा में किया जा
रहा है । जनता दल यू के वरिष्ठ नेता नितीश कुमार ने पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान
विशेष पर्यवेक्षक रहे एल. वी. सप्तऋषि को चुनाव आयोग पर आरोप लगाने के कारण
बर्खास्त करने की माँग की है । नितीश ने यूपीए सरकार से चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक
संस्था पर दोषारोपण करने के लिए राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख व केंद्रीय रेल मंत्री
लालू यादव के खिलाफ़ भी कार्रवाई करने की माँग की है । नितीश ने सप्तऋषि द्वारा
उठाए मुद्दे को 'किसी से' प्रेरित बताया । राजद प्रमुख लालू यादव पर हमला करते हुए
नितीश ने उन्हें भारतीय राजनीति की बीमारी बताया । उन्होंने कहा कि लालू को
संवैधानिक संगठनों की आलोचना करने की आदत सी पड़ गई है । नितीश ने लालू के खिलाफ
कार्रवाई करने की माँग की । नितीश ने सप्तऋषि व लालू यादव के बीच साँठ - गाँठ की
जाँच कराने की भी माँग की । पासवान ने कहा कि आयोग ने राज्य में लोकसभा व विधानसभा
चुनाव निष्पक्ष व प्रभावी ढंग से पूरा कराया । पासवान ने कहा कि उनके मन में चुनाव
आयोग के प्रति काफी इज्जत है । आयोग एक संवैधानिक संस्था है और इसमें कोई संदेह
नहीं है कि वह पूर्ण रूप से तटस्थ है । अफ्रीका की गरीबी और मौसम परिवर्तन पर चर्चा
करने आए दुनिया के ८ सबसे धनी देश (जी - ८) आतंकवाद पर चर्चा करते नज़र आए । अंततः
इन नेताओं को संशोधित घोषणा जारी करनी पड़ी, जिसमें आतंकवाद से लड़ने की चुनौती
फेहरिस्त में सबसे ऊपर थी । ग्लेनईगल्स में जी - ८ के जो नेता तापमान परिवर्तन और
अफ्रीका की गरीबी की बात कर रहे थे, वे इस्लामी आतंकवाद के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय
मुहिम में तेजी की वकालत करने लगे । लंदन पर हुए हमले के कारण आतंकवाद जी - ८ के
एजेंडे के केंद्र में आ गया । उन्होंने वाशिंगटन स्थित इन वरिष्ठ सुरक्षा
अधिकारियों से अधिकतम चौकसी बरतने को कहा । हालांकि, उनके प्रेस सचिव स्कॉट
मैकक्लेलन ने बाद में जोर देकर कहा कि बुश ने आतंकवादी हमले के कारण बीच में शिखर
बैठक नहीं छोड़ी थी । वैसे जी - ८ के एजेंडे में आए बदलाव से बुश की परेशानी भी कम
हुई । दुनिया के कई नेताओं के साथ तापमान परिवर्तन के मुद्दे पर उनका मतभेद जगजाहिर
है । वे क्योटो प्रोटोकॉल को अमेरिकी अर्थ - व्यवस्था के खिलाफ मानते रहे हैं । अगर
लंदन में धमाके नहीं होते तो इस शिखर बैठक में तापमान परिवर्तन प्रमुख मुद्दा बना
रहता और इस पर जी - ८ देशों में मतभेद भी लक्षित हो सकते थे । यूं तो समूह - ८ अभी
भी तापमान परिवर्तन पर एक समझौते का प्रयास कर रहा है, लेकिन धमाकों के बाद अब उसके
लिए आतंकवाद ही प्रमुख मुद्दा बन गया है । फॉर्म सब्सिडी खत्म करने पर हालाँकि
उन्हें अमेरिका और ब्रिटेन से चतुराई वाला समर्थन मिला लेकिन शिराक़ से हुई मुलाकात
इसलिए खास है कि फ्रांस डब्लूटीओ में इस मुद्दे पर जंग छेड़े हुए है । जम्मू -
कश्मीर के पुंछ जिले में शुक्रवार को सेना और आतंकियों के बीच हुई मुठभेड़ में
लश्कर - ए - ताइबा के तीन आतंकी मारे गए । आतंकवादी घुसपैठ की फिराक में थे । इस
मुठभेड़ में एक जेसीओ सहित सेना के चार जवान भी शहीद हो गए । सेना के प्रवक्ता
लेफ्टिनेंट कर्नल वी. के. बत्रा ने कहा कि इस गुट का प्रमुख अनंतनाग जिले के कुलगाम
का एक मज़हबी नेता था । पुंछ में हुई मुठभेड़ के बारे में एक सरकारी अधिकारी ने
बताया कि १३वीं सिख लाईट इनफेंट्री द्वारा लश्कर - ए - ताइबा गुट के आतंकियों को
नियंत्रण - रेखा पर चुनौती देने पर मुठभेड़ रात ११.४५ बजे शुरू हुई । आतंकी तालाचीड
इलाके में नियंत्रण - रेखा पार कर घुसपैठ करने की कोशिश कर रहे थे । सेना द्वारा
चुनौती देने पर आतंकियों ने गोली चलानी शुरू कर दी । सेना की जबावी कार्रवाई में
तीन आतंकी मारे गए । मुठभेड़ में नायक सूबेदार अवतार सिंह सहित चार जवान भी शहीद हो
गए । मुठभेड़ वाले स्थान से तीन एके एसॉल्ट राइफल, १७ मैगजीन, ८ ग्रेनेड, ४ आईइडी,
एक रेडियो सेट, दो पिस्तौल व कुछ अन्य हथियार बरामद किए गए हैं । जहाँ एक तबका
फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने वाले कृषि मूल्य लागत आयोग को
समाप्त करने का पक्षधर है । वहीं कृषि मामलों की स्थायी समिति कृषि मूल्य लागत आयोग
में किसानों के प्रतिनिधित्व की पक्षधर है । समिति का कहना है कि इससे फसलों का
न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारण में आयोग को किसानों से पूरी जानकारी मिल पाएगी ।
इसके अतिरिक्त समिति ने किसानों को दिए जाने वाले ऋण पर ६ फीसदी ब्याज दर लागू करने
की सिफारिश की है । इसके अलावा ऋण सीमा को ५० हजार रुपए से बढ़ाकर १.५ लाख किया
जाना चाहिए और इस पर ७ फीसदी के हिसाब से ब्याज दर लागू होनी चाहिए । कृषि मूल्य
लागत आयोग को ज्यादा स्वतंत्र और मजबूत बनाने के लिए लोकसभा की कृषि मामलों की
स्थायी समिति प्रयास कर रही है । समिति का मानना है कि किसानों को उनकी फसल का पूरा
मूल्य नहीं मिल पाता है और इसलिए आयोग में किसानों का भी प्रतिनिधित्व होना चाहिए ।
हालांकि अभी तक समिति में किसानों का प्रतिनिधित्व नहीं है । समिति का कहना है कि
इससे आयोग सीधे किसानों के संपर्क में रहेगा और उनकी समस्याओं को बेहतर तरीके से
निपटाया जा सकेगा । स्थायी समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर राम गोपाल यादव का कहना है कि
स्थायी समिति यह महसूस करती है कि राज्य सरकारें फसलों के लिए जो मूल्य तय करने के
सुझाव देती हैं । आयोग उन मूल्यों को लागू नहीं करता है और उनकी सिफारिशों से कम
मूल्य निर्धारित करता है । इससे किसानों को उनकी फसल की कम कीमत मिलती है । उनका
कहना है पिछले साल उत्तर प्रदेश सरकार ने धान के लिए ७२० रुपये प्रति क्विंटल मूल्य
निर्धारित करने की सिफारिश आयोग से की थी । क्योंकि धान के लिए उत्तर प्रदेश में
लागत मूल्य ६५० रुपये था । लेकिन आयोग ने धान के लिए ५६० रुपये प्रति क्विंटल का
मूल्य निर्धारित किया । यानि प्रदेश सरकार की सिफारिशों से काफी कम मूल्य किसानों
को मिला । राम गोपाल यादव इसके भी पक्षधर हैं कि आयोग को मूल्य निर्धारण के दायरे
में कई अन्य फसलों को भी शामिल करना चाहिए । हालांकि अभी तक महज २५ फसलों का ही
मूल्य आयोग द्वारा निर्धारित किया जाता है । उनका कहना है कि कई ऐसी फसलें भी हैं
जिनका मूल्य किसानों को मिल नहीं पाता है और इसके लिए सरकार को पहल करनी होगी ।
यादव का कहना है कि कृषि में सबसे बड़ी समस्या निवेश ऋण पर लगने वाले ब्याज दर की
है । क्योंकि वर्तमान में किसानों को दिए जाने वाले ऋणों की ब्याज दरें काफी ज्यादा
हैं और इन ब्याज दरों को नाबार्ड द्वारा राज्यों को दिए जाने वाले ऋण पर लागू होने
वाली ब्याज दर के समान ही होना चाहिए । उनका कहना है कि समिति इसकी पक्षधर है कि
किसानों को ६ फीसदी ब्याज दर पर ऋण मुहैया कराया जाना चाहिए । भारतीय स्वास्थ्य
मंत्री ए. रामदास ने भारत में अनिवासी भारतीय डॉक्टरों द्वारा चलाई जा रहीं
परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने का वादा किया है । उन्होंने अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ
फिजीशियंस ऑफ इंडियन ऑरिजिन (एएपीआई) के पूर्व अध्यक्ष नवीन शाह को यह आश्वासन दिया
। नवीन शाह मैरीलैंड के लैनहम इलाके स्थित डॉक्टर्स हॉस्पिटल के प्रमुख हैं । शाह
ने कहा कि उन्होंने रामदास से वाशिंगटन में लंबी बातचीत की । उन्होंने एनआरआई
डॉक्टरों द्वारा चलाई जा रही परियोजनाओं को सफल बनाने में भरपूर योगदान देने का
वादा किया है । एनआरआई डॉक्टरों से जुड़े दूसरे मसलों पर भी इन दोनों के बीच बातचीत
हुई । मंत्री ने मेरी बातों को ध्यान से सुना । उल्लेखनीय है कि भारत में अनिवासी
भारतीय डॉक्टरों के सहयोग से कई परियोजनाएं चल रही हैं । शाह ने बताया कि ६ महीने
पहले भी इन मसलों पर उन्होंने दिल्ली में मंत्री से बातचीत की थी । शाह ने कहा कि
रामदास चाहते हैं कि भारत में मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का भरपूर विस्तार
हो । उन्होंने बताया कि मंत्री ने कई वादों को पूरा करने का आश्वासन दिया है ।
रामदास ने यह भी संकेत दिया कि जो राज्य ईएमएस सेंटर की स्थापना करेगा, उसे
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से वित्तीय मदद दी जाएगी । उन्होंने भारत में कई
और संक्रामक रोग चिकित्सा केंद्रों की स्थापना का भी वादा किया । शाह के मुताबिक
रामदास ने दो जाने - माने आयुर्वेद विशेषज्ञों को अमेरिका में आयुर्वेद चिकित्सा
पद्घति की पढ़ाई के लिए अमेरिका भेजने का वादा किया है । उन्होंने आयुर्वेद के
क्षेत्र में संयुक्त भारत - अमेरिका शोध परियोजना को भी सफल बनाने का वादा किया ।
आज देश के कर्जदार हर १०० किसानों में से १० अनुसूचित जनजाति, १८ अनुसूचित जाति व
४४ अन्य पिछड़े वर्ग से हैं । इस बात की जानकारी राष्ट्रीय सैंपल सर्वे से मिली है
। आंध्र प्रदेश के कर्जदार किसानों में ११ फीसदी अनुसूचित जनजाति, १७ फीसदी
अनुसूचित जाति व ४७ फीसदी अन्य पिछड़े वर्ग से हैं । जबकि तमिलनाडु में यह अनुपात
इस प्रकार से है ४ फीसदी अनुसूचित जनजाति, २२ फीसदी अनुसूचित जाति व ७३ फीसदी अन्य
पिछड़े वर्ग से हैं । यहाँ सामान्य श्रेणी का सिर्फ एक फीसदी किसान ही कर्जदार है ।
देश में किसानों की स्थिति के बारे में जानकारी को लेकर सबसे पहले २००३ में
सर्वेक्षण कराया गया था । इसका उद्देश्य रहन - सहन के आधार पर किसानों की स्थिति का
आकलन करना था । इसमें उपभोक्ता व्यय, कृषि व गैर कृषि व्यवसाय, उत्पादक
परिसंपत्तियाँ, आय और कर्ज के आधार पर किसानों की स्थिति का सर्वेक्षण किया गया था
। बिहार में राष्ट्रपति शासन लागू करने के विवादास्पद फैसले के बारे में सुप्रीम
कोर्ट ने कहा है कि राज्यपाल बूटा सिंह के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जाँच की जाएगी ।
अदालत ने कहा है कि इस बात की जाँच की जाएगी कि क्या राज्यपाल ने दुर्भावनाओं से
ग्रस्त होकर केंद्र को रिपोर्ट भेजी थी, जिसकी वजह से राष्ट्रपति शासन लगाया गया ।
केंद्र की सलाह को स्वीकार करते हुए जस्टिस वाई. के. सब्बरवाल, जस्टिस के. जी.
बालकृष्ण, जस्टिस बी. एन. अग्रवाल, जस्टिस अशोक भान और जस्टिस अजित पसायत की खंडपीठ
ने संविधान के अनुच्छेद ३६१ के तहत अदालती कार्यवाही के मामले में राज्यपाल को
प्राप्त विशेषाधिकार का हवाला देते हुए कहा कि अदालत राज्यपाल को नोटिस जारी नहीं
करेगी । हालांकि अदालत ने यह साफ कर दिया कि राज्यपाल ने अगर दुर्भावनाओं से ग्रस्त
होकर इस बाबत फैसला लिया है तो यह उनके विशेषाधिकार के दायरे से बाहर है और अदालत
को इस मामले की जाँच का अधिकार है । खंडपीठ ने विधानसभा भंग करने के राज्यपाल के
फैसले के खिलाफ दायर याचिका की अगली सुनवाई की तारीख २७ सितंबर से घटाकर २० सितंबर
कर दी है । अदालत ने चुनाव आयोग द्वारा बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा के मद्देनज़र
सुनवाई की तारीख घटा दी है । लेकिन जवाब से संतुष्ट नहीं होने पर अदालत ने अटॅर्नी
जनरल मिलन बनर्जी, एडिशनल सॉलीसिटर जनरल गोपाल सुब्रह्मण्यम् और पूर्व अटॅर्नी जनरल
सोली जे. सोराबजी से राय ली । इन तीनों ने एक मत से कहा कि राष्ट्रपति शासन को अवैध
करार देने पर चुनाव आयोग को चुनाव प्रक्रिया रद्द करनी पड़ेगी । सशस्त्र बलों के
आधुनिकीकरण में हो रही देरी को जड़ से मिटाने के लिए सरकार ने रक्षा बजट में २७
फीसदी की वृद्धि करते हुए ७७,००० करोड़ रुपये आवंटित किए हैं । जबकि संशोधित अनुमान
६३,००० करोड़ रुपये था । वहीं पंजी प्रावधान के मामले में थल सेना की अनदेखी की गई
है तो वायु और नौ सेना के आवंटन में मामूली बढ़ोतरी हुई है । प्रधानमंत्री मनमोहन
सिंह ने कहा कि पिछले तीन - चार सालों में रक्षा बजट की अनदेखी की गई है । सरकार ने
पिछले साल के १६,९०६ करोड़ रुपये के पूँजी प्रावधान को दोगुना करते हुए ३३,४८२
करोड़ रुपये किया है । केंद्रीय बजट २००४ - ०५ में रक्षा प्रावधान में वृद्धि करते
हुए पी. चिदंबरम् ने कहा कि आधुनिक हथियारों के अधिग्रहण के लिए यह 'जरूरी' हो गया
है कि इस साल आवंटन अधिक हो । पूँजी प्रावधान को दोगुना किए जाने से संकेत मिलते
हैं कि सरकार का फ्रांसीसी पनडुब्बी 'स्कॉर्पियो', मिग - २१ के स्थान पर १२५
बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान और थल सेना की फायरपॉवर में इजाफा करने के लिए चार हजार
करोड़ रुपये की योजना पर आगे बढ़ने का विचार है । रक्षा बजट में इस वृद्धि के
बावजूद भारत का रक्षा खर्च सकल घरेलू उत्पाद का सिर्फ २.५ फीसदी है जो चीन के ६
फीसदी और पाकिस्तान के ५.५ फीसदी की अपेक्षा बहुत कम है । पिछले साल के बजट अनुमान
की अपेक्षा मौजूदा वृद्धि १७.९१ फीसदी अधिक है । अगर पूँजी प्रावधानों पर नजर
दौड़ाई जाए तो थल सेना के लिए बजट अनुमान में कमी आई है जबकि वायु और नौ सेना के
लिए मामूली वृद्धि की गई है । मौजूदा वर्ष में थल सेना के लिए आवंटन २७,८२८९९ करोड़
रुपये रखा गया है जबकि पिछले साल के संशोधित अनुमान में यह राशि २८,२७६ करोड़ रुपये
रखी गई थी । जबकि नौ सेना के लिए पिछले साल संशोधित अनुमान ४,९१० करोड़ रखा गया था
जिसे मौजूदा वित्त वर्ष में बढ़ा कर ५,२९३ करोड़ रुपये कर दिया गया है । वहीं, वायु
सेना के लिए ७८४७.२९ करोड़ रुपये को बढ़ाकर ८४६८.४० करोड़ रुपये कर दिया गया है ।
वित्त मंत्री पी. चिदंबरम् और रक्षा मंत्री प्रणब मुखर्जी स्वदेशी रक्षा शोध को
बढ़ावा देने पर जोर देते आए हैं लेकिन रक्षा शोध सेवा और विकास के लिए पिछले साल की
अपेक्षा तीन सौ करोड़ रुपये की कटौती की गई है । डीआरडीओ को मौजूदा बजट में २३४३.१६
करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं जबकि पिछले साल के संशोधित अनुमान में २६९९.२० करोड़
रुपये की बात कही गई थी । बीते तीन सालों के दौरान कार खरीदने वाले अपने को ठगा
महसूस कर सकते हैं । कैग की रिपोर्ट के मुताबिक २००१ से २००४ के दौरान वित्त
मंत्रालय द्वारा कारों पर कर घटाने के बावजूद मारुति, टाटा मोटर्स, होंडा और
महेंद्रा एंड महेंद्रा जैसी दिग्गज कंपनियों ने उपभोक्ताओं को किसी तरह की रियायत
नहीं दी । संसद में पेश अपनी रिपोर्ट में कैग ने इसे लेकर वित्त मंत्रालय की खिंचाई
की है । उसके निशाने पर रेल मंत्रालय भी है । रिपोर्ट के मुताबिक २००० - ०४ के
दौरान रेलवे ने सड़क और ओवर बिज्र के निर्माण के लिए मिले फंड के इस्तेमाल में
बेरुखी दिखाई । नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट के मुताबिक मध्यम और
लग्जरी सेगमेंट की कारों के मामले में उत्पाद शुल्क में कटौती का पूरा लाभ
उपभोक्ताओं तक नहीं पहुँचा । इसके चलते सरकार को कार कंपनियों से मिलने वाले राजस्व
में ३८ फीसदी का नुकसान हुआ । गौरतलब है कि वित्त मंत्रालय ने २००० - ०१ के दौरान
कारों पर १६ फीसदी उत्पाद शुल्क घटाया था । इसी तरह २००१ - ०२ के दौरान कारों का
विशेष उत्पाद कर २४ फीसदी के बजाय १६ फीसदी कर दिया गया । इसके बाद २००२ - ०३ के
दौरान इसमें आठ फीसदी की और कटौती की गई । इससे २००१ - ०२ के दौरान शुल्क ४० फीसदी
से घटकर ३२ फीसदी हो गया । जबकि २००३ - ०४ के दौरान शुल्क ३२ फीसदी से घटकर २४
फीसदी रह गया । रिपोर्ट के मुताबिक मार्च २००१ से फरवरी २००२ के दौरान पाया गया कि
मारुति, टाटा मोटर्स, होंडा सिएल और महेंद्रा एंड महेंद्रा ने शुल्क में कटौती के
अनुरूप कारों के दाम नहीं घटाए । बल्कि कुछ कंपनियों ने तो दस महीने बाद ही कारों
के दाम बढ़ा दिए । रिपोर्ट के मुताबिक पाँच कार निर्माता कंपनियों से सरकार को ३०
सितंबर २००३ तक २४४४.११ करोड़ रुपये का राजस्व मिलना था । लेकिन इन कंपनियों ने
इसमें से ९२७.३१ करोड़ रुपये अपने पास ही रख लिए । इमराना बलात्कार कांड का विवाद
अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि असम के नागौन जिले में १९ वर्षीय महिला का इमराना जैसा
मामला सामने आया है । इसका उसके ससुर ने बलात्कार किया । उसके बाद उस बांग्लादेशी
आव्रजक युवती की शिकायत पर स्थानीय जमात ने उल्टे उसे उसके पति को तलाक देने का
फरमान सुनाया है । नागौन के एसपी के. के. सरमा ने शुक्रवार को यहाँ बताया कि १९
वर्षीय एक मुस्लिम युवती यहाँ अपने मां - बाप के साथ रह रही है । उसने ढिंग पुलिस
स्टेशन में कल बृहस्पतिवार को ही इस बारे में एफआईआर दर्ज कराई । सरमा के अनुसार उस
युवती के साथ २५ मई को उसके पचास वर्षीय ससुर मोइनुद्दीन ने तब बलात्कार किया जब वह
ढिंग पुलिस थानान्तर्गत दक्षिण जेरामाई गाँव के अपने घर में अकेली थी । उन्होंने
बताया कि यह परिवार बांग्लादेशी आव्रजकों का है । इन लोगों ने इस बलात्कार की सूचना
पुलिस को नहीं दी और स्थानीय धार्मिक बुजुर्गों के पास गए जिन्होंने युवती को उसके
पति को तलाक देने का फरमान सुना दिया । जबकि ससुर को कोई सजा तो दूर उसे 'आजादी'
बख्श दी । एक छोटी सी जमीन का मालिक उसके पति ने भी अपनी आठ माह की पत्नी को अपनाने
से इनकार कर दिया । पुलिस अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने एक पुलिस दल उस गाँव में
भेजा जब उन्हें अज्ञात व्यक्ति से इस घटना के ब्यौरे के साथ इस बारे में शिकायत
मिली । उन्होंने बताया कि पीड़िता का चिकित्सकीय परीक्षण करा कर मजिस्ट्रेट के
समक्ष उसका बयान भी दर्ज कराया गया है । पुलिस अब फरार चल रहे मोइनुद्दीन की तलाश
कर रही है । इससे पहले पिछले महीने दारुल उलूम देवबंद ने २८ वर्षीय पांच बच्चों की
माँ से उसके ससुर के बलात्कार करने पर महिला को अपने पति के साथ नहीं रहने का फरमान
सुनाया था । इस फरमान का ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भी समर्थन किया था ।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शुक्रवार को आतंकवाद को कायरतापूर्ण कृत करार देते हुए
कहा कि लोकतंत्र में आस्था रखने वाले देशों को मिलकर इसका मुकाबला करना चाहिए ।
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय ने आज मनमोहन सिंह को नागरिक कानून में डॉक्टरेट की मानद
उपाधि प्रदान की । इस अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि
लोकतंत्र और कानून के शासन में आस्था रखने वालों को चाहिए कि वे मिलकर आतंकवाद का
मुकाबला करें । गौरतलब है कि बृहस्पतिवार को लंदन में आतंकी हमला हुआ था । इस घटना
पर शोक जताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि संकट की इस घड़ी में भारतीय ब्रिटेन के
साथ हैं । अयोध्या में आतंकी हमले का जिक्र करते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि आतंकवाद
विश्व के सभी देशों के लिए खतरा बन गया है । यह शांति और मानवीयता को तहस - नहस कर
रहा है और हमें इसका मुकाबला मिलकर करना चाहिए । सिंह पांच दशक पूर्व विश्वविद्यालय
के छात्र रहे थे । सिंह ने १९५७ में विश्वविद्यालय के नफील्ड कॉलेज से अर्थशास्त्र
में डी. फिल. की डिग्री हासिल की थी । उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारे
गये कुख्यात डकैत निर्भय गुर्जर की विधवा सीमा परिहार ने अपने दिवंगत पति के शव पर
अपना दावा पेश किया है । उसने कहा है कि वह हिंदू रीति - रिवाज के मुताबिक वाराणसी
में शव का अंतिम संस्कार करेगी । मंगलवार को इटावा में पत्रकारों के साथ बात - चीत
में सीमा ने कहा कि 'निर्भय को अपने पापों की सजा मिल चुकी है । उनकी पत्नी होने के
नाते अब मुझे अपने कर्तव्य का पालन करना है । मैं उनके शव का अंतिम संस्कार काशी
(वाराणसी) में करना चाहती हूँ सीमा ने आगे कहा कि गुर्जर के शव के औपचारिक दावे के
लिए मैं जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से मुलाकात करूँगी । पुलिस महानिदेशक यशपाल
सिंह ने कहा कि मुठभेड़ में निर्भय गुर्जर को मारकर एसटीएफ टीम ने अदम्य साहस का
परिचय दिया है और वे प्रशंसा के पात्र हैं । उन्होंने आगे कहा कि बहादुरी भरे
कारनामों के मद्देनज़र पुलिसकर्मियों के लिए बारी से पहले प्रोन्नति देने का
प्रावधान है । गौरतलब है कि सीमा जब लालाराम गिरोह में थी तभी उसने गुर्जर से शादी
रचाई थी । समझा जाता है कि बाद में जब लालाराम ने सीमा के साथ जबरन शारीरिक संबंध
बनाया तो गुस्साए गुर्जर ने लालाराम गिरोह से अलग होकर अपना एक अलग गिरोह बना लिया
। वरुण गांधी ने आज कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र में वंशवाद का कोई स्थान नहीं है ।
उन्होंने भाजपा में अपने प्रवेश का भी समर्थन किया । भाजपा के मुखा बीजेपी टुडे को
दिए साक्षात्कार में वरुण ने कहा कि वंशवाद तो सामंतवाद का एक हिस्सा है । वरुण के
अनुसार वंशवाद के लिए नेता ही जिम्मेदार हैं । उन्होंने कहा कि अगर लोगों को बेहतर
शिक्षा और अवसर मिले तो उनमें आत्म विश्वास बढ़ता है और वे जीवन में परिवार का
समर्थन नहीं लेंगे । वरुण ने कहा कि जिस तरह से भाजपा ने गठबंधन सरकार को संचालित
किया और भारत को विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिष्ठा प्रदान की उससे प्रभावित होकर ही
वे भाजपा में शामिल हुए । उन्होंने कहा कि मैं भाजपा के राष्ट्रवाद और आत्मविश्वास
की विचार धारा से पूरी तरह प्रभावित हूँ । उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को इस बात पर
आश्चर्य हो सकता है कि गांधी परिवार का सदस्य होने के बावजूद मैं भाजपा में कैसे
शामिल हो गया, लेकिन हम पार्टी नहीं विचार धारा का सम्मान करते हैं । उन्होंने
भारतीय राजनीतिकों की कमजोरी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि आजकल राजनीति
शक्ति और धन उपभोग करने का माध्यम हो गयी है । शायद ही कोई राजनेता सही अर्थों में
लोगों की सेवा करना चाहता है । उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की याद दिलाते
हुए कहा कि राजनीति में भी व्यक्तिगत बलिदान की जरूरत है । वरुण के अनुसार वे अपनी
राजनीतिक पृष्ठभूमि का लाभ नहीं उठाना चाहते । लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) अध्यक्ष
राम विलास पासवान ने बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव में एक बार फिर से
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) व भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ किसी प्रकार के
तालमेल की संभावना से इनकार किया है । बुधवार को दिल्ली से पटना पहुंचने पर
पत्रकारों से बातचीत में रामविलास पासवान ने कहा कि राजद व भाजपा को लेकर वे अपने
पहले के रुख पर कायम हैं । राज्य में यूपीए के घटकों के बीच चुनावी गठबंधन की
संभावनाओं को खारिज करते हुए पासवान ने कहा कि बिहार में यूपीए गठबंधन प्रभावी नहीं
है । यह पूछे जाने पर कि क्या सोनिया गांधी के कहने पर उनकी पार्टी राजद के साथ
चुनावी तालमेल करेगी इस प्रश्न को पासवान ने कल्पनात्मक प्रश्न करार दिया । पासवान
ने कहा कि उन्होंने मंगलवार को सोनिया गांधी व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात
की थी । लेकिन बातचीत के दौरान गठबंधन को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई । पासवान ने कहा
कि उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं से राज्य की सभी २४३ सीटों से चुनाव लड़ने के लिए
तैयार रहने को कहा है । लेकिन उन्होंने कांग्रेस के साथ चुनावी तालमेल की भी इच्छा
जताई है । नानावटी रिपोर्ट में केंद्रीय वाणिज्य मंत्री कमलनाथ और कांग्रेस के
वरिष्ठ नेता वसंत साठे को १९८४ के दंगों के मामले में क्लीन चिट दी गई है । रिपोर्ट
में कहा गया है कि आयोग को ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला है जिससे यह सिद्ध किया जा
सके कि गुरुद्वारा रकाबगंज में मौजूदगी के दौरान कमलनाथ ने उत्तेजित भीड़ को
भड़काया । इसी प्रकार वसंत साठे की वहां मौजूदगी संबंधी दावे को आयोग ने भ्रामक
माना है । पत्रकार संजय सूरी ने अपने बयान में आयोग को बताया कि ३१ अक्टूबर ८४ को
कमलनाथ गुरुद्वारा रकाबगंज में मौजूद थे तथा वह भीड़ को शांत करने का प्रयास कर रहे
थे । कमलनाथ ने अपने जवाब में भी कहा है कि वे कांग्रेस के एक जिम्मेदार नेता के
रूप में वहां गये थे ताकि कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ नहीं पाये । जब वे वहां
पहुंचे थे तो वहां भारी पुलिस बल मौजूद था और पुलिस आयुक्त भी तभी वहां पहुंच गये
थे । उन्होंने भीड़ को तितर - बितर होने और कानून अपने हाथ में नहीं लेने के लिए
राजी किया । हालांकि आयोग ने इस बात पर आश्चर्य प्रकट किया कि कमलनाथ पुलिस
अधिकारियों से संपर्क किये बगैर कानून व्यवस्था की चिंता के लिए गुरुद्वारा पहुंच
गये । लेकिन कमलनाथ का तर्क था कि २० साल बाद यह बता पाना संभव नहीं है कि वे वहां
कब और कैसे गये । बहरहाल आयोग को दंगे भड़काने में भूमिका होने की बाबत उनके खिलाफ
कोई साक्ष्य नहीं मिला है । वसंत साठे के मामले में मुख्त्यार सिंह नामक एक व्यक्ति
ने उनके गुरुद्धारा रकाबगंज में होने का दावा किया था । लेकिन पत्रकार सूरी ने ऐसा
कोई बयान नहीं दिया । साठे का जवाब है कि उस दिन ग्यारह बजे के आसपास वे तीन मूर्ति
भवन में मौजूद थे जहां इंदिरा का पार्थिव शरीर रखा गया था । वहां इस दौरान उन्होंने
दूरदर्शन की टीम को साक्षात्कार भी दिया था और लोगों से शांति व्यवस्था बनाये रखने
की अपील की थी । आयोग ने मुख्त्यार सिंह के दावे को गलतफहमी माना । भारतीय सैन्य
अकादमी (आईएमए) पर आत्मघाती हमले की साजिश में पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन लश्कर ए
ताइबा के एक आतंकी को पुलिस ने देहरादून में गिरफ्तार कर लिया । आतंकी मोहम्मद
इफ्तखार अहसान मलिक बिहार का रहने वाला है और देहरादून में एक बायोटेक्नोलॅजी
संस्थान में छात्र था । वह आतंकियों को आईएमए से संबंधित जानकारी दे रहा था ।
गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस की विशेष सेल ने शनिवार रात राष्ट्रीय राजधानी में दो
पाकिस्तानी आतंकियों समेत तीन को मुठभेड़ में ढेर कर दिया था और उनके दो साथी
गिरफ्तार कर लिए गए थे । इसी के बाद आईएमए, देहरादून और बंगलोर स्थित नामी
सॉफ्टवेयर कंपनियों को उड़ाने की लश्कर की साजिश का भंडाफोड़ हुआ था । देहरादून के
डॉलफिन इंस्टीटयूट ऑफ बायो मेडिकल ऐंड नेचुरल साइंस में पढ़ रहे मोहम्मद इफ्तखार
अहसान मलिक को दिल्ली पुलिस ने सोमवार रात आईएमए से सटी प्रेम नगर कालोनी स्थित
उसके घर से गिरफ्तार किया । देहरादून की अदालत ने इफ्तखार को दस दिन के पुलिस
रिमांड पर दिल्ली पुलिस के हवाले किया है । संयुक्त पुलिस आयुक्त (विशेष सेल) कर्नल
सिंह ने बताया कि मलिक को पूछताछ के लिए दिल्ली लाया गया है । दिल्ली पुलिस सुनील
को भी साथ ले गई है । इस मकान में डॉलफिन के ही तीन अन्य छात्र मोहम्मद राशिद, नईस
आलम व सिराजुल इसलाम दूसरे कमरे में रहते हैं । मंगलवार देर शाम देहरादून पुलिस ने
इन तीन छात्रों को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया । दिल्ली पुलिस के सूत्रों के
मुताबिक, मुठभेड़ में मारे गए पटना के आतंकी शख्स की डायरी में इफ्तखार के देहरादून
स्थित बैंक खाते का नंबर का उल्लेख है, जिससे संदेह है कि इफ्तखार को आतंकी आर्थिक
मदद भी दे रहे थे । इफ्तखार ने पुलिस को बताया कि उसने वर्ष २००३ में पटना के
बीएलपी कॉलेज से १२वीं पास की । इस दौरान वह पटना के किराए के मकान में रहने के
दौरान आतंकी शख्स के संपर्क में आया । शख्स ने उसे प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट
इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) के लिए काम करने के लिए उकसाया । इफ्तखार ने
सिमी की कई बैठकों में हिस्सा लिया । वर्ष २००३ में इफ्तखार देहरादून आया और उसने
डॉलफिन इंस्टीटयूट ऑफ बायो मेडिकल ऐंड नेचुरल साइंस में बायो टेक्नालॅजी के चार
वर्षीय कोर्स में प्रवेश लिया । इस दौरान उसका शख्स से संपर्क बरकरार रहा । पिछले
साल अक्तूबर में शख्स देहरादून पहुंचा और उसने इफ्तखार को लश्कर ए ताइबा में काम
करने को उकसाया । शख्स ने उसे शाहिद नाम का कोड दिया, ताकि इफ्तखार की पहचान छिपी
रह सके । ७३ भारतीय संगठन आठ देशों के उन ३६० निजी कंपनियों और सरकारी संगठनों में
शामिल हैं जिनकी पहचान महाविनाश के हथियार में इस्तेमाल के लिए उपकरण अथवा तकनीक
खरीदने वाले संगठन के रूप में की गई है । लंदन से प्रकाशित अंग्रेजी दैनिक
'गार्जियन' में छपी एक रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गई है । ब्रिटेन की आंतरिक
खुफिया एजेंसी एमआई ५ द्वारा तैयार की गई सूची की लंबाई यह दर्शाती है कि हथियारों
की खरीद - फरोख्त का बाजार सामान्य अनुमान के मुकाबले काफी बड़ा है । अखबार के
मुताबिक, भारत, ईरान, पाकिस्तान, इस्त्राइल, सीरिया और मिस्त्र के संगठनों को
निर्यात के प्रति भी एमआई ५ ने आगाह किया है । एमआई ५ द्वारा संकलित १७ नौ के
दस्तावेज में लंदन स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग समेत ९५ पाकिस्तानी संगठनों और
विभिन्न सरकारी निकायों का उल्लेख है । इनके बारे में कहा गया है कि इन संगठनों ने
देश के परमाणु कार्यक्रम में सहयोग दिया है । बहरहाल, इस सूची को दो साल पहले तैयार
किया गया था । गौरतलब है कि शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र संघ की परमाणु मामले की
निगरानी करने वाली संस्था अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) और इसके
प्रमुख मोहम्मद अलबरदेई को संयुक्त रूप से इस साल शांति के क्षेत्र में दिए जाने
वाले नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया । इसके मद्देनजर ही इस सूची का खुलासा किया
गया है । हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में सतलुज नदी पर निर्माणाधीन खारो पुल के
बृहस्पतिवार दोपहर अचानक टूट जाने से ३३ सैन्यकर्मी और कुछ सिविलियन डूब गए हैं ।
इनमें सेना के दो अधिकारी, ३१ जवान और कुछ स्थानीय नागरिक भी शामिल हैं । चंडीमंदिर
स्थित पश्चिमी कमान के सूत्रों ने दो अफसरों और १८ जवानों के मरने की पुष्टि की है
। उनके मुताबिक १३ जवान लापता हैं । इससे पहले हिमाचल के प्रशासनिक सूत्रों ने
अफसरों समेत २२ जवानों के डूबने की पुष्टि कर दी थी । युद्धस्तर पर बचाव कार्य शुरू
कर दिए गए हैं । जवानों के शवों को तलाशने और राहत कार्यों के लिए पश्चिमी कमान से
हेलीकॉप्टर से गोताखोर दस्ता घटनास्थल पर पहुंचा है । खारो वेली पुल के टूटकर बह
जाने से डूबने वाले अफसरों में लेफ्टिनेंट कर्नल ए. डी. सिंह और कैप्टन बोक्किल
शामिल हैं । नायब सूबेदार विद्याधरन भी सतलुज में बह गए हैं । किन्नौर के उपायुक्त
अमनदीप गर्ग का कहना है कि लाशों के नाथपा - झाकड़ी के बांध में फंसे होने की
संभावना है, इसलिए वहां जाल डालकर उन्हें ढूंढ़ने की कोशिश हो रही है । उपायुक्त ने
कहा कि सतलुज के पानी का वेग बहुत अधिक है और यह पहाड़ी चट्टानों से गुजरती है,
इसलिए डूबे लोगों के बचने की संभावना नहीं के बराबर है । सरकार ने हादसे का शिकार
हुए जवानों के परिजनों को फौजी तौर पर ५० - ५० हजार रुपयों की राहत राशि देने की
घोषणा की है । पुल टूटने के पीछे यांत्रिक कमी बताई गई है । खारो में निर्माणाधीन
पुल के क्षतिग्रस्त होने से किन्नौर जिले में जनजीवन के पटरी पर लौटने में अब और भी
समय लगेगा । गौरतलब है कि सतलुज नदी में २६ जून को आई बाढ़ के कारण खारो व पोआरी
में बने पुल बह गए थे । किन्नौर जिले में जनजीवन को पटरी पर लाने और किसानों व
बागवानों की नगदी फसलों को मंडियों तक पहुंचाने के मकसद से सरकार ने इन दोनों पुलों
का निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर जारी किया था । खारो में स्पैन ब्रिज के निर्माण का
काम मिलिट्री इंजीनियरिंग रेजिमेंट के जिम्मे है । खारो पुल का निर्माण कार्य पूरा
होने वाला था, मगर इससे पहले कि सेना के जवान इस पुल को जनता को समर्पित कर पाते
काल के क्रूर हाथों ने उन्हें सतलुज में धकेल दिया । इस निर्माणाधीन पुल के काम को
अंजाम देने के लिए सैनिक रोजमर्रा की तरह बृहस्पतिवार को भी खारो पहुंचे । दोपहर तक
सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था, मगर दोपहर बाद करीब पौने एक बजे अचानक ही यह पुल टूट गया
। खारो पुल की लंबाई दो सौ मीटर है, मगर टूटने के बाद इसका महज दस मीटर हिस्सा ही
सड़क में दिखाई दे रहा है । पुल के निर्माण कार्य को अंजाम दे रहे चार जवान ही
डूबने से बचे हैं । ये भाग्यशाली जवान प्रभाकरण, मुगेसकेटी, सी. सुब्रह्मण्यम व के.
संजीवन हैं । पुल का निर्माण १८वीं इंजीनियरिंग रेजीमेंट के हवाले है । पुल के
टूटने के कारणों का अभी तक पता नहीं चल सका है । इस हादसे के प्रत्यक्षदर्शी नुखू
राम ने बताया कि पुल के बहने से पहले महज मामूली आवाज हुई । हादसे के समय पुल पर
ड्यूटी दे रहे होम गार्ड के जवान टाशी डुनडुप ने बताया कि हादसे के वक्त पुल पर ३५
से ४० जवान काम कर रहे थे । खारो में बना यह पुल चौथी बार बहा है । तीन बार सतलुज
की बाढ़ इसे बहा ले गई तो एक बार यह क्षतिग्रस्त हो चुका है । पंचकूला से मिली खबर
के मुताबिक पुल टूटने की सूचना मिलते ही चंडीमंदिर स्थित पश्चिमी कमान मुख्यालय में
आपातकालीन बैठक बुलाई गई । लखनऊ स्थित स्थानीय मुस्लिम नेताओं की ओर से धार्मिक
स्थलों में विदेशियों के प्रवेश पर लगाई गई रोक को देखते हुए ब्रिटिश नागरिकों को
अतिरिक्त सावधानी बरतने और शहर के पवित्र स्थलों की यात्रा स्थगित करने की सलाह दी
गई है । विदेश विभाग की ओर से सोमवार को यह चेतावनी जारी की गई । इससे पहले लखनऊ
स्थित हुसैनबाद ट्रस्ट ने अमेरिकी नेतृत्व वाली गठबंधन सेना द्वारा पवित्र स्थलों
को अपवित्र करने और इराकियों पर अत्याचार करने के विरोध में बड़ा और छोटा इमामबाड़ा
में अमेरिकी, ब्रिटिश और इस्राइली नागरिकों के प्रवेश पर रोक लगा दी थी । विदेश
विभाग ने चेतावनी में अपने नागरिकों से कहा कि उन्हें ऐसे स्थलों का दौरा करते समय
सतर्कता बरतनी चाहिए और उम्मीद है कि हालात सामान्य होने तक वे यात्राएं स्थगित
करेंगे । कुछ दिन पहले तक यहां बंदूकों की आवाजें गूंजा करती थीं, लेकिन अब जम्मू -
कश्मीर के उरी क्षेत्र का कमान पोस्ट नियंत्रण रेखा से बंटे राज्य का एक द्वार बन
गया है । संभवतः इसीलिए इस ब्रिज को 'अमन सेतु' नाम दिया गया है । बृहस्पतिवार को
श्रीनगर - मुजफ्फराबाद बस सेवा शुरू होने से उरी के लोगों को एक नई उम्मीद मिली है
। कमान पोस्ट के नजदीक सीमावर्ती गांव उरूसा के ७२ - वर्षीय मोहम्मद जमान ने बताया
कि 'मेरा यह सपना था कि मेरे मरने से पहले यह सड़क खुल जाए और मेरा यह सपना साकार
हो गया बीते दिनों को याद करते हुए जमान ने बताया कि १९४७ से पहले वह अपने पिता के
साथ तांगे में सवार होकर मुजफ्फराबाद जाया करते थे । वह उस दिन को कोसते हैं जब यह
मार्ग बंद कर दिया । भावविह्वल जमान ने कहा कि राज्य के बंटवारे से पहले उरी
मुजफ्फराबाद की तहसील हुआ करता था । उन्होंने बताया कि 'मेरे गांव में एक भी घर ऐसा
नहीं है जिसके परिजन नियंत्रण रेखा के उस पार नहीं हों लोगों ने बताया कि
मुजफ्फराबाद उरी से मात्र ७० किमी दूर है । सुलेमान ने बताया कि 'यहां से सिर्फ एक
घंटे का सफर है, लेकिन इस दूरी को पाटने में कई दशक लग गए बहरहाल, उरी के लोग बस
सेवा शुरू होने का जशन मनाएंगे । गौरतलब है कि कमान ब्रिज का निर्माण १८८० में हुआ
था । १९४७ की लड़ाई के बाद जब पाकिस्तानी सैनिक पलायन कर रहे थे तो उन्होंने इस
ब्रिज को क्षतिग्रस्त कर दिया और पिछले महीने तक यह ब्रिज उसी अवस्था में था । भारत
और पाकिस्तान ने फरवरी में जब बस चलाने का निर्णय किया तो इसके बाद ही सीमा सड़क
संगठन (बीआरओ) ने सड़क बनाने का काम शुरू किया और महज आठ घंटे में ही लकड़ी की जगह
लोहे का कमान ब्रिज तैयार कर दिया गया । उरी के लोग बस सेवा शुरू होने से बहुत खुश
हैं और संघर्ष विराम के लिए उन्होंने दोनों देश की सरकारों को धन्यवाद दिया ।
उन्होंने कहा कि संघर्ष विराम के कारण उनका जीवन सुरक्षित और जीने के काबिल हो गया
है । बीएसएनएल के उत्तरी कश्मीर के मंडलीय अभियंता राकेश वर्मा ने बताया कि जम्मू
कश्मीर और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के यात्रियों की सुविधा के लिए कमान
पोस्ट पर सात लाइनें व सलामाबाद में दस लाइनें बिछाई गई हैं । यह पंद्रह दिनों की
कड़ी मेहनत का नतीजा है । बीएसएनएल अधिकारियों ने कहा कि विश्व भर से आए मीडिया के
लोगों ने भी अपनी खबरें भेजने के लिए इन्हीं टेलीफोन लाइनों का इस्तेमाल किया ।
उन्होंने कहा कि बीएसएनएल ने उरी शहर, कमान पोस्ट व सलामाबाद में मोबाइल सेवा शुरू
करने के लिए भरसक कोशिश की लेकिन खराब मौसम के कारण यह योजना रद्द करनी पड़ी ।
उन्होंने कहा कि अप्रैल माह के अंत तक इन जगहों पर मोबाइल सेवा शुरू हो जाएगी ।
विदेश मंत्री के. नटवर सिंह ने कहा कि अमेरिका के पाकिस्तान को एफ - १६ विमान बेचने
के निर्णय के बावजूद भारत - अमेरिकी संबंध इतने बेहतर कभी नहीं थे । इसके अलावा
उन्होंने कहा कि भारत पाकिस्तान के सभी प्रस्तावों पर विचार करने को तैयार है लेकिन
वह नक्शे में तब्दीली स्वीकार करके दूसरे बंटवारे को न्योता नहीं दे सकता । बीबीसी
वर्ल्ड को दिए एक इंटरव्यू में वह भारत का नया नक्शा बनाकर दूसरे बंटवारे की बात
छोड़कर पाकिस्तान के सुझाए सभी विकल्पों को सुनने को राजी हैं । उन्होंने कहा कि
भारत - पाक के बीच समग्र बातचीत की प्रगति काफी संतोषजनक है । उन्होंने कहा कि इससे
पहले उन्होंने कभी भी भारत - पाक सीमा पर इतना बेहतर माहौल नहीं देखा । उन्होंने
श्रीनगर - मुजफ्फराबाद बस सेवा के शुरू होने को काफी महत्वपूर्ण घटनाक्रम बताया ।
इसे बहुत ही सावधानीपूर्वक आगे बढ़ाना होगा और इस प्रक्रिया के लिए कोई त्वरित
समाधान नहीं है । इसके अलावा, नटवर सिंह ने कहा कि भारत - अमेरिकी संबंध परिपक्वता
के उस मुकाम पर पहुंच चुके हैं जहां हमारे मतभेद हमारे मूलभूत मित्रतापूर्ण संबंध
को प्रभावित नहीं करते । अमेरिका के साथ भारत के संबंध नए आयाम तक पहुंचे हैं । यह
संबंध इतने बेहतर कभी नहीं थे । विपक्ष में रहते हुए सिंह ने लिखा था कि भारत जैसा
गुटनिरपेक्ष राष्ट्र कभी भी नाटो शक्ति वाले अमेरिका का स्वाभाविक सहयोगी नहीं हो
सकता । अमेरिकी विदेश विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था कि अमेरिका भारत को
२१वीं सदी की एक प्रमुख महाशक्ति के रूप में विकसित करने में मदद करना चाहता है ।
इस बयान पर अपनी असहमति जताते हुए नटवर सिंह ने कहा कि भारत एक महाशक्ति बनने की
जुगत में शामिल नहीं है । नेपाल के हालात पर अप्रसन्नता जताते हुए उन्होंने कहा कि
आपातकाल खत्म होना चाहिए । यह बहुत ही चिंताजनक स्थिति है । पुराने गीतों के नए
रीमिक्स की तरह भारतीय ऋषियों के निर्देशित योग का रीमिक्स भी बाजार में पॉपुलर हो
रहा है । हेलियोथैरेपी और ओजोनथैरेपी जैसे ट्रेंडी नाम योगाभ्यास से ज्यादा असरदार
सिद्ध हो रहे हैं । पंचसितारा होटल की सुविधाओं से युक्त जिम और स्पा में योग को टू
मिनट नूडल्स की शक्ल में परोसा जा रहा है । मुंबई स्थित द कटारिया स्कूल ऑफ हास्य
योगा लोकप्रियता के नए रिकॉर्ड कायम कर रहा है । जरा एक नजर डालिए सूर्य नमस्कार के
रीमिक्स पर । बाजार में इसके तीन रूपों ने जादू कर रखा है । 'पॉवर योगा' के तहत
सूर्य नमस्कार को तेज गति से किया जाता है तो 'बीट योगा' के तहत पॉप म्यूजिक की धुन
पर अंगों को लय में लहराया जाता है । इसके एक अन्य रूप में कमरे में अगरबत्ती जलाकर
या परफ्यूम बिखेरकर सूर्य नमस्कार किया जाता है । ऋषियों द्वारा निर्धारित सूर्य
नमस्कार प्रणाली के तहत कुल बारह तरह के आसनों का विधान है । इन आसनों को एक बार
करने में तकरीबन १० मिनट का समय लगता है । पर 'पॉवर योगा' के रूप में इसे केवल ३
मिनट में ही पूरा कर लिया जाता है । मॉर्निंग वॉक के लिए आपकी भले नींद नहीं खुलती
हो पर यदि कोई 'आनंद योग' की बात करे तो आप जगे बिना नहीं रहेंगे । प्रातः भ्रमण को
'आनंद योग' के रूप में पेश किया जा रहा है । योग को ऐसी शक्ल देनी होगी कि आज का
व्यक्ति उसे अपना सके आरोग्य के नए मंदिर के रूप में पनप रहे स्पा और ब्यूटी सैलून
योग को 'योगिलेट' की शक्ल में प्रस्तुत कर रहे हैं । दिल्ली में वीएलसीसी और ओजोन
नामक स्पा में योग के आधुनिक रूप ग्राहकों के बीच अपनी पैठ बना रहे हैं । 'ओजोन' के
योग निदेशक कहते हैं - 'हम वही दे रहे हैं जो आप चाहते हैं । वित्त मंत्री पी
चिदंबरम ने अपने बजट को जनता के 'हितों का ध्यान रखने वाला तथा साहसी' करार दिया ।
उन्होंने दूरसंचार, नागरिक उड्डयन और बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की
क्षेत्रवार सीमा बढ़ाने के फैसले पर पुनर्विचार करने की संभावना से इनकार किया है ।
वर्ष २००४ - ०५ के लिए यूपीए सरकार के पहले बजट को पेश करने के बाद चिदंबरम ने कहा
कि हमने यह दिखा दिया है कि हमारी सरकार को जनता के हितों का पूरा ध्यान है और वह
साहसी फैसले लेने से पीछे नहीं हटती । उन्होंने कहा कि हम कृषि, ग्रामीण
अर्थव्यवस्था तथा ढांचागत सुविधाओं के क्षेत्र में पेश आने वाली समस्याओं को दूर
करने का प्रयास कर रहे हैं । इसके लिए हम काम के बदले अनाज कार्यक्रम जैसी योजनाएं
शुरू कर रहे हैं । उदारीकरण की राह में आगे कदम बढ़ाकर हमने साहसी फैसला लिया है ।
वित्त मंत्री ने कहा कि एफडीआई तथा पूंजी बाजार के संबंध में हमने साहसी निर्णय लिए
हैं । उन्होंने कहा कि दूरसंचार या नागरिक उड्डयन के क्षेत्र में बंदिशें कम करने
के मुद्दे पर उन्हें किसी प्रकार की समस्या पेश आने की आशंका नहीं है । हमने सिर्फ
इन प्रावधानों को पारदर्शी बना दिया है । अब पूरा ७४ फीसदी एफडीआई प्रत्यक्ष और
पारदर्शी ढंग से होगा । यह पूछने पर कि क्या उन्हें यह चिंता सता रही है कि एफडीआई
की सीमा बढ़ाने से वामपंथी दल उन्हें निशाना बना सकते हैं, चिदंबरम ने कहा कि हमें
हल्की आलोचना की उम्मीद है । मैं उनके नेताओं से बातचीत करूंगा । फिलहाल इससे
निपटने के लिए इसी तरह के विकल्पों पर विचार कर रहा हूं । इस सवाल पर कि क्या
एफडीआई सीमा बढ़ाने के फैसले पर पुनर्विचार करने की संभावना है, उन्होंने कहा कि
काफी विचार - विमर्श के बाद यह फैसला किया गया है । इसमें प्रधानमंत्री भी शामिल थे
। हमने क्षेत्रों की जरूरतों पर विचार किया और उसके बाद इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि
राष्ट्रहित में यह जरूरी है । मेरा मानना है कि ४० और ४९ फीसदी में कोई खास अंतर
नहीं है । प्राचीन 'ग्रेट अंडमानीज' आदिवासी सुनामी लहरों के कहर से बच गए ।
उन्होंने पहाड़ी जंगलों में शरण लेकर अपनी जान बचाई । केवल पचास रह गए इन
आदिवासियों ने अपनी पुरानी परंपराओं को खुद ही खुशी - खुशी छोड़ दिया है । इसके
चलते इस आदिवासी जनजाति का क्षरण हो रहा है । जो परंपराएं इन्हें बाहर की दुनिया से
अलग पहचान देती हैं । ये उसी बाहर की दुनिया के लिए अपनी पहचान खोते जा रहे हैं ।
पहली बार खुद ग्रेट अंडमानीज के राजा ने भी ये बातें स्वीकार की हैं । पोर्ट ब्लेयर
के एक सरकारी अस्पताल में भर्ती ग्रेट अंडमानीज जनजाति के राजा जिरोकी ने बताया कि
सुनामी में उनकी जनजाति का कोई हताहत नहीं हुआ है । हम पांच दिन तक जंगलों में शरण
लिए रहे । इसके बाद हमें भूखे रहना पड़ा ग्रेट अंडमानीज किसी समय में क्षेत्र का
सबसे बड़ा आदिवासी समूह था । १७८९ में इनकी अनुमानित जनसंख्या १०,००० थी । राहत और
बचाव कर्मी स्ट्रेट द्वीप के जंगलों में रहने वाले ग्रेट अंडमानीज आदिवासियों को
पिछले हफ्ते ही पोर्ट ब्लेयर लाये । इस मौके का फायदा उठाते हुए इनके राजा जिरोकी
ने यहां मिरगी का इलाज कराया । लाल टी - शर्ट और शॉर्टस पहने जिरोकी टूटी - फूटी
हिंदी में बताते हैं कि झटके से उनके घर हिलने लगे । इसके बाद मैंने सभी को भागने
के निर्देश दिए । मैं राजा हूं । मैं जैसा कहूंगा उन्हें वैसा ही करना होगा । कुछ
मानवशास्त्रियों की अटकलों के विपरीत सुरमई कहती हैं, उन्हें इस प्राकृतिक आपदा का
किसी तरह का पूर्वाभास नहीं हुआ । ग्रेट अंडमानीज सुनामी के आने के खतरे को भांप
नहीं पाए । मानवशास्त्रियों का कहना है कि ग्रेट अंडमानीज ऐसे लोगों का बेहतरीन
उदाहरण हैं, जो कि बाहरी दुनिया के संपर्क में आकर अपनी सदियों पुरानी परंपराओं व
संस्कृति को भूल चुके हैं । स्वतंत्र अंडमान निकोबार सोसाइटी के प्रमुख समीर आचार्य
ने बताया कि उन्होंने इन आदिवासियों का बारीकी से अध्ययन किया है । इनमें अपनी
पुरानी परंपराओं का कोई भी चिन्ह नजर नहीं आता । वह अपनी हर खूबी भूल चुके हैं ।
उनके कई साथी पुलिस व सरकारी नौकरियों में हैं । आदिवासी नेता ने माना कि उनकी
जिंदगी उनके पूर्वजों की जीनवशैली से एकदम बदल चुकी है । अब वह तीर - कमान इस्तेमाल
नहीं करते बल्कि भाले से मछलियों व सूअरों का शिकार करते हैं । ग्रेट अंडमानीज
परंपरागत रूप से जड़ें, समुद्री भोज्य पदार्थ, कछुए व उनके अंडे खाते हैं । लेकिन,
पिछले कुछ सालों में उन्होंने शेष भारतवासियों की तरह चावल, दाल व रोटी खाना शुरू
किया है । नुकसान देह पेय पीकर वे तरह - तरह की बीमारियों को न्योता दे रहे हैं ।
इस तरह अन्य भारतीयों के संपर्क में आकर ग्रेट अंडमानीज अपने ही अस्तित्व को खतरे
में डाल रहे हैं । आदिम जनजाति में आ रहे बदलाव की झलक ग्रेट अंडमानीज के राजा और
उनकी पत्नी की जिंदगी में भी दिखाई दे रही है । सुरमई को पोर्टब्लेयर रास नहीं आया
। उन्होंने कहा, 'मैं वापस जाना चाहती हूं । मुझे यहां अच्छा नहीं लग रहा है । मैं
जंगलों में रहने की आदी हूं लेकिन, उनके पति जिरोकी इससे असहमत थे । वह कहते हैं
बाहरी दुनिया के संपर्क में आकर अच्छा लग रहा है । इससे पहले हमारा सारा ध्यान
शिकार पर था । अंडमान निकोबार के दक्षिणी द्वीप स्ट्रैट में रहने वाले इन
आदिवासियों के राजा जिरोकी को पहली बार सरकारी अस्पताल में अपनी मिरगी का इलाज
कराने का मौका मिला । आज भी कम से कम पांच झटके इस इलाके में महसूस किए गए । इनसे
जान - माल के नुकसान की खबर नहीं है । रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता ३.१ रिकार्ड
की गई । यहाँ नौ सेकेंड तक भूकंप के झटके महसूस किए गए । इसका केंद्र स्पोर्ट सिटी
के ७३ किलोमीटर दूर स्थित था । मौसम विभाग के अनुसार अंडमान व निकोबार में शुक्रवार
रात १२.२१ बजे रिक्टर पैमाने ५.२ की तीव्रता के साथ भूकंप का झटका महसूस किया गया ।
इसका केंद्र ग्रेट निकोबार द्वीप के पश्चिमी तट की ओर था । इसके बाद शनिवार सुबह
८.१९ बजे रिक्टर पैमाने पर ५ की तीव्रता के साथ दूसरा झटका लगा जिसका केंद्र उत्तरी
अंडमान था । दिन में ११.०० बजे के करीब ५.२ की तीव्रता के साथ तीसरा झटका महसूस
किया गया जिसका केंद्र लिटिल अंडमान का पश्चिमी तट था । इसके थोड़ी देर बाद
सुमात्रा के पश्चिमी तट पर ५.० की तीव्रता का भूकंप रिकॉर्ड किया गया । आज शाम ६.००
बजे दक्षिण अंडमान के पूर्वी केंद्र में रिक्टर पैमाने पर ५.३ की तीव्रता का एक
अन्य झटका महसूस किया गया । सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बेचैन दिल्लीवासियों को राहत
देते हुए केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने देर रात राजधानी के मास्टर प्लान, २००१
में संशोधन की अधिसूचना जारी कर दी, जिसमें रिहायशी क्षेत्रों में मिक्सलैंड यूज के
प्रस्ताव को अनुमति दी गई है । इसके तहत राजधानी के ११८ मार्गों पर रिहायशी परिसरों
के भूतल पर व्यावसायिक गतिविधियों को वैधता प्रदान की जाएगी । इससे लगभग दो लाख
दुकानदारों को राहत मिलने की संभावना है । सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर २९ मार्च से
रिहायशी इलाकों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को बंद किए जाने की कार्रवाई शुरू
होनी है । इस मामले में एमसीडी के प्रवक्ता दीप माथुर का कहना है कि निगम सुप्रीम
कोर्ट के आदेश से बंधा हुआ है । सीलिंग की कार्रवाई के लिए निगम ने ५५ टीमें गठित
की हैं जो बुधवार से कार्रवाई शुरू करेंगी । रिहायशी क्षेत्रों में भूतल पर जो
दुकानें चल रही हैं उनको नहीं छेड़ा जाएगा लेकिन ऊपर के फ्लोर को सील किया जाएगा ।
इसका हवाला अधिसूचना में भी दिया गया है । केंद्रीय शहरी विकास राज्य मंत्री अजय
माकन ने अधिसूचना जारी करने के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि १९६२ के मास्टर
प्लान में डेढ़ सौ व्यक्तियों के बीच एक दुकान का प्रावधान किया गया था । अभी तक की
जानकारी के अनुसार इसकी २० फीसदी दुकानें ही हैं । आवश्यकता के मुताबिक अस्सी फीसदी
दुकानों की कमी है । इसलिए यह जरूरी हो जाता है कि दिल्ली में दुकानों की कमी पूरी
करने के लिए मिश्रित भू उपयोग की नीति को लागू किया जाए । उन्होंने बताया कि
मिश्रित लैंडयूज प्रस्ताव पर रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन की आपत्तियों को नजरंदाज
नहीं किया गया है और इसमें भूतल पर बनी छोटी दुकानों को शत - प्रतिशत अनुमति प्रदान
की गई है । अधिसूचना से बड़े शोरूम को कोई राहत मिलती नजर नहीं आ रही है । उन्होंने
कहा कि उच्चतम न्यायालय ने भी आदेश में छोटे दुकानदारों को राहत दी है । सिर्फ बड़ी
दुकानों को ही बंद करने का आदेश दिया है । इसमें भी १८९ में से ११८ मार्गों को ही
राहत दी गई है । अधिसूचना के मुताबिक १८ मीटर वाली रोड पर व्यावसायिक गतिविधियों की
अनुमति होगी । कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स, दिल्ली संघर्ष मोर्चा, फेडरेशन ऑफ
दिल्ली ट्रेड एसोसिएशन और फोरम ऑफ दिल्ली ट्रेड एसोसिएशन सहित अन्य प्रमुख संगठनों
ने केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय द्वारा मिश्रित लैंडयूज की अधिसूचना का स्वागत
किया है । इस संबंध में कन्फेडरेशन के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने कहा
कि अधिसूचना जारी होने से कुछ हद तक व्यापारियों को राहत मिल सकेगी । लेकिन
व्यापारियों का आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक दिल्ली के पाँच लाख व्यापारियों और
उनसे जुड़े सौ लाख से अधिक लोगों से भय का वातावरण समाप्त नहीं हो जाता । सरकार ने
वर्तमान वित्तीय वर्ष में लाभदायी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) की ४,०००
करोड़ रुपये तक के सीमित विनिवेश की घोषणा की है । यूपीए सरकार ने पिछली राजग सरकार
२००३ - ०४ के १४,५०० करोड़ के विनिवेश लक्ष्य में साढ़े दस हजार करोड़ की कटौती की
है । वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने बृहस्पतिवार को अपने बजट भाषण में कहा कि विनिवेश
और निजीकरण उपयोगी आर्थिक उपकरण हैं । उन्होंने कहा कि अपनी नीतियों के अनुरूप वह
चुनिंदा स्थितियों में ही इस उपकरण का उपयोग करेंगे । चिदंबरम ने सार्वजनिक क्षेत्र
के उपक्रमों के पुनर्गठन के लिए एक बोर्ड (बीआरपीएसई) के गठन का ऐलान किया । इन
सलाहों में हालात के आधार पर विनिवेश, बंदी या फिर बिक्री के विकल्प खुले होंगे ।
सरकार के हिस्से के शेयरों की कीमत वसूलने और मंदी के असर को कम करने के लिए सरकार
एनटीपीसी के पब्लिक इश्यू पर अपनी पकड़ बनाए रखते हुए अपने शेयरों का पाँच फीसदी ही
विनिवेश कर सकती है । चिदंबरम ने कहा कि मौजूदा वित्तीय वर्ष में ये और जो अन्य
मामले विचाराधीन हैं, उनसे ४,००० करोड़ रुपये की उगाही की उम्मीद है । वित्त मंत्री
ने कहा कि सीमित निजीकरण के बावजूद सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों पर अपना
नियंत्रण रखने के प्रति दृढ़ है । उन्होंने कहा कि जहाँ तक पीएसयू पर सरकारी
नियंत्रण क़ायम है और सार्वजनिक क्षेत्र की विशेषताओं पर कोई असर नहीं पड़ता ।
सरकार अपने हिस्से के शेयरों से लोगों की सामाजिक आवश्यकताओं के लिए नए सूत्र भी
बनाएगी । उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के पुनर्गठन बोर्ड (बीआरपीएसई) से
कहा है कि हर मामले की उपयोगिता को परखा जाए और तभी न्यूनतम साझा कार्यक्रम
(सीएमपी) के तहत विनिवेश की सिफारिश की जाए । वित्त मंत्री ने सरकार की पुनर्गठन
नीति पर रोशनी डालते हुए हिंदुस्तान एंटीबायोटिक्स लिमिटेड और इंडियन टेलीफोन
इंडस्ट्री (आईटीआई) को एक पैकेज देने की घोषणा की है । हिंदुस्तान एंटीबायोटिक्स को
पुनर्गठन में वित्तीय सहायता दी जाएगी जबकि आईटीआई को बचाने के लिए ५०८ करोड़ रुपए
की सहायता दी जाएगी । उन्होंने बताया कि ऊर्जा, दूरसंचार, रेलवे, सड़कें,
पेट्रोलियम, कोयला और नागरिक उड्डयन के तहत आने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों
के लिए भारी निवेश किए जाएंगे । विनिवेश से मिलने वाले धन के इस्तेमाल के बारे में
वित्त मंत्री ने कहा कि विनिवेश से मिलने वाला राजस्व भारत सरकार के कोष का हिस्सा
होगा । प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने संतुलित बजट बनाने के लिए वित्त मंत्री पी.
चिदंबरम् की तारीफ की है । उन्होंने कहा है कि कृषि और औद्योगिक क्षेत्र को बढ़ावा
देकर विकास की गति बढ़ाने पर जोर दिया गया है । बृहस्पतिवार को संवाददाताओं से बात
- चीत में प्रधानमंत्री ने कहा है कि तेजी से फैल रहे आर्थिक ढाँचे में गरीबी,
अशिक्षा और बीमारी जैसी समस्याओं का समाधान पाया जा सकता है । उन्होंने कहा कि आयकर
छूट की सीमा बढ़ाने से एक करोड़ से अधिक लोगों को फायदा होगा । उन्होंने कहा कि देश
के १५० सर्वाधिक पिछड़े जिलों में 'काम के बदले अनाज' कार्यक्रम लागू किया जाएगा ।
उन्होंने कहा कि योजनागत व्यय में १०,००० करोड़ रुपये की वृद्धि की गई है जिससे कि
न्यूनतम साझा कार्यक्रम के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी । अगले साल तक
राजकोषीय घाटा ४.४ फीसदी तक सीमित करने के लक्ष्य को 'तार्किक' करार देते हुए कहा
कि सरकार पाँच साल में राजस्व घाटा समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है । उन्होंने कहा
'मेरा हमेशा से मानना है कि व्यवस्थित अर्थ - व्यवस्था और सामाजिक दायित्वों की
पूर्ति के लिए राजस्व सुधार बहुत जरूरी है उन्होंने कहा कि राजकोषीय जिम्मेदारी से
संतुलित अर्थ - व्यवस्था सुनिश्चित हो सकेगी । प्रधानमंत्री ने राजग सरकार पर आरोप
लगाया कि ग्रामीण क्षेत्र के लिए उन्होंने खास उपाय नहीं किए । उन्होंने कहा कि
यूपीए सरकार के बजट में ग्रामीण ढाँचागत विकास फंड (आरआईडीएफ) के लिए बजट में ८०००
करोड़ रुपये रखे गए हैं । वाटरशेड सिंचाई कार्यक्रम और अन्य उपाय से कृषि क्षेत्र
को ही मजबूती मिलेगी । सब्सिडी के मसले पर उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री ने वादा
किया है कि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस ऐंड पॅलिसी इस मसले का अध्ययन
करेगा । संसद और विभिन्न मंचों पर भी इस विषय पर विचार - विमर्श होगा । उन्होंने
कहा कि कृषि ऋण व्यवस्था में कुछ खामियाँ हैं और यूपीए सरकार ने तय किया है कि तीन
साल में कृषि ऋण बढ़ाया जाएगा । सिंह ने कहा कि सहकारी बैंकिंग तंत्र में भी
गड़बड़ियाँ हैं । इस मसले पर एक टास्क फोर्स गठित की गई थी जो इस साल ३१ अक्तूबर तक
अपनी रिपोर्ट दे देगी । प्रधानमंत्री ने कहा कि इस रिपोर्ट की सिफारिश के आधार पर
सुधार के उपाय किए जाएंगे । हरित क्रांति के जनक नोबल पुरस्कार विजेता डॉ. नार्मन
बोर्लेग ने दो टूक कहा है कि सिर्फ जैविक खेती से दुनिया की भूख को नहीं मिटाया जा
सकता । धरती की ६.३ अरब आबादी को अन्न मुहैया कराने के लिए फिलहाल रासायनिक खादों
की जरूरत बनी रहेगी । रासायनिक खादों के बिना खेती के अस्तित्व की बात करने वाले
सिर्फ कल्पनाओं में ही जी रहे हैं । रासायनिक खादों से भूमि व मनुष्य को होने वाले
नुकसान को दरकिनार करते हुए नार्मन ने कहा कि अगर केमिकल फर्टीलाईज़र न हों तो अन्न
को लेकर दुनिया में अफरा - तफरी उत्पन्न हो जाएगी । अमादलपुर के प्रगतिशील किसान
सुरेंद्र सिंह के हारा फार्म को देखने पहुंचे बोर्लेग ने शुक्रवार को 'अमर उजाला'
से बात - चीत में कहा कि साठ - सत्तर के दशक में जब बाकी दुनिया हरित क्रांति से
रूबरू हो रही थी तब भारत अन्न के लिए दूसरे देशों का मुँह ताकता था । उस समय
अमेरिका व अन्य पश्चिमी देशों की यह सोच थी कि भारत अन्न उत्पादन में आत्म - निर्भर
नहीं हो पाएगा, लेकिन भारत ने सारी दुनिया को अचंभित कर दिया । भारतीय किसानों ने
उर्वरकों और समय का सही इस्तेमाल कर यह कमाल दिखाया । कृषि को उन्नत करने में डॉ.
स्वामी नाथन समेत अन्य भारतीय कृषि वैज्ञानिकों का बड़ा योगदान रहा है । बकौल
बोर्लेग, '९१ साल पहले जब मैं पैदा हुआ था, तब दुनिया में १.६ अरब लोग थे । अब यह
संख्या ६.३ अरब को पार कर चुकी है । इतने लोगों का पेट भरने के लिए रासायनिक खादों
का कोई विकल्प नहीं है हालांकि उन्होंने माना कि जैविक खाद बढ़िया है, लेकिन
रासायनिक खादों की जगह नहीं ले सकती । अब तो एग्रो - फोरेस्टरी (कृषि - वानिकी) के
क्षेत्र में भारत उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है और क्रांति की ओर बढ़ रहा है । डॉ.
बोर्लेग का मानना है कि एग्रो फोरेस्टरी रोजगार का बड़ा माध्यम बन रहा है । हारा
फार्म में पापुलर और गेहूं को एक ही खेत में देखकर वे काफी हैरान हुए । उन्होंने
कहा कि भारत में अन्न तो काफी पैदा हो रहा है, लेकिन बहुत से लोगों के पास उसे
खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं । अब एग्रो - फोरेस्टरी से आम लोगों की आर्थिक स्थिति
बदलेगी और उनकी खरीद क्षमता बढ़ सकती है । वर्ष १९७० में कृषि के क्षेत्र में पहला
नोबेल पुरस्कार पाने वाले डॉ. बोर्लेग का कहना है कि इस पुरस्कार का श्रेय डॉ.
स्वामीनाथन् समेत दुनिया भर के कृषि वैज्ञानिकों और हर छोटे - बड़े किसान को जाता
है । सुरेंद्र हारा ने बताया कि वे डॉ. बोर्लेग ही थे, जिन्होंने ७० के दशक में
भारत सरकार को किसानों के लिए ज्यादा से ज्यादा बैंक ऋण देने का प्रावधान रखने का
सुझाव दिया था । हारा ने बताया कि वे अपने खेतों से १० साल के चक्र में औसतन २०
क्विंटल प्रति एकड़ लकड़ी की पैदावार कर रहे हैं, जो कि पश्चिमी देशों से भी ज्यादा
है । उन्होंने कहा कि कृषि वानिकी में अपार संभावनाएं हैं, चूँकि भारत में हर साल ८
- ९ हजार करोड़ रुपये की लकड़ी आयात होती है । यहाँ आए फूड ऐंड फोडर क्रॉप्स के
असिस्टेंट डायरेक्टर डॉ. एस. एन. शुक्ला ने भी एग्रो फोरेस्टरी से जुड़े किसानों को
हर मदद मुहैया करवाने की बात कही । रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध इस्तेमाल पर
उन्होंने कहा कि जैविक खाद भी इस्तेमाल की जानी चाहिए । आयकर भवन में शुक्रवार की
शाम को दो आतंकियों के दाखिल होने के बाद शुरू हुई मुठभेड़ २५ घंटे तक चलने के बाद
शनिवार की शाम दूसरे आतंकी की मौत के साथ समाप्त हो गई । हालांकि पहले माना जा रहा
था कि दूसरा आतंकी भी मारा गया है, लेकिन शनिवार सुबह जब जवान इमारत में दाखिल हुए
तो उन पर फायरिंग शुरू हो गई । आज दूसरे दिन मुठभेड़ के दौरान एसओजी का एक जवान
शहीद हो गया, जबकि तीन अन्य जवान जख्मी हो गए । मुठभेड़ में कुल चार सुरक्षाकर्मी
शहीद हुए व सात घायल हुए । इसके अलावा आयकर विभाग के एक कर्मचारी की लाश भी बरामद
हुई है । आतंकियों का संबंध लश्कर - ए - ताइबा के अल मंसूरियन गुट से था । दोनों
आतंकियों के पास से दो एसॉल्ट राइफलें, सात मैगज़ीन व अन्य विस्फोटक सामग्री मिली
है । शुक्रवार की रात को जब एक आतंकी के मारे जाने के बाद दूसरा आतंकी भी कुछ देर
फायरिंग करने के बाद इमारत के एक कमरे में छिपकर बैठ गया तो सुरक्षा - बलों व अन्य
सभी एजेंसियों ने मान लिया कि वह भी मारा गया है । शनिवार की सुबह ९.०० बजे सुरक्षा
- बलों ने इमारत में तलाशी शुरू की । जम्मू - कश्मीर पुलिस के एसओजी दस्ते के जवान
जैसे ही इमारत में दाखिल हुए, दूसरे आतंकी ने फायरिंग शुरू कर दी । आतंकी ने जवानों
पर पहले ग्रेनेड भी फेंका । इस अप्रत्याशित हमले में एसओजी का एक जवान मोहम्मद अशरफ
खान मौके पर ही शहीद हो गया । इसके बाद आतंकी तभी फायर करता था, जब सुरक्षाकर्मी
इमारत के उस हिस्से में दाखिल होने का प्रयास करते, जहाँ वह पोजीशन लिए हुए था ।
शाम ४.३० बजे के करीब एसओजी के सुरक्षा - बलों ने आतंकी जिस कमरे में छिपा था,
उसमें पहले हथगोले फेंके और बाद में फायरिंग की । कमरे में हथगोला फटने के बाद
आतंकी फायरिंग करता हुआ बाहर निकला । बाहर जवान पोजीशन लिए तैयार खड़े थे ।
उन्होंने इस आतंकी को ढेर कर दिया । डोडा में हुई मुठभेड़ में भी सेना का एक जवान
शहीद हुआ है । श्रीलंका के सरकारी रेडियो ने शनिवार को दावा किया कि २६ दिसंबर को
आई सुनामी लहरें लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईल्म (लिट्टे) प्रमुख वी प्रभाकरन को भी
अपने साथ बहा ले गई । इस खबर से समुद्री कहर से बुरी तरह तबाह इस प्रायद्वीप में
सरकार और विद्रोहियों के बीच नया तनाव पैदा हो गया है । विद्रोहियों ने सरकार के
दावे को खारिज करते हुए प्रभाकरन को महफूज़ बताया है । लेकिन, इस कहर के बाद से
प्रभाकरन को लेकर रहस्य बरकरार है । दरअसल प्रभाकरन को लेकर २८ दिसंबर से अटकलें
हैं । 'एशियन ट्रिब्यून' नामक अखबार ने सुनामी के कहर के दो दिन बाद ही प्रभाकरन के
लापता होने का दावा किया था । शनिवार को श्रीलंका के सरकारी रेडियो ने खबर दी कि
पिछले हफ्ते सुनामी लहरों के तांडव में तमिल टाइगर प्रमुख वेलुपिल्लई प्रभाकरन और
उसके खुफिया प्रमुख पोट्टू अम्मान मारे गए या लापता हैं । हालांकि विद्रोहियों ने
तुरंत इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया । अखबार की रिपोर्ट के बाद विद्रोहियों की ओर से
प्रभाकरन के नाम से श्रीलंका के सुनामी प्रभावित इलाकों में अंतर्राष्ट्रीय मदद की
अपील की गई थी । लेकिन, आमतौर पर विद्रोहियों के रेडियो से अपने संदेश जारी करने
वाले प्रभाकरन की आवाज तमिल विद्रोहियों के इलाकों में अब तक सुनाई नहीं दी । एशियन
ट्रिब्यून के मुताबिक वह सुनामी आपदा के मद्देनजर ३० दिसंबर को जाफना में बुलाई गई
लिट्टे हाईकमान की बैठक में भी मौजूद नहीं था । गौरतलब है कि सुनामी के कहर से
श्रीलंका का ७० फीसदी तटीय इलाका प्रभावित हुआ है । इसमें उत्तर की तरफ का वह इलाका
भी है, जहाँ लिट्टे का कब्जा है । इसी इलाके के मुलातिवियू में प्रभाकरन का ठिकाना
है । बयान में कहा गया है कि 'यह समय अफवाहें फैलाने या गलत मंशा से प्रचार करने का
नहीं है बयान में कहा गया है कि लिट्टे और तमिल जनता श्रीलंका ब्रॉडकास्टिंग
कॉरपोरेशन की इस शरारत भरी रिपोर्ट का विरोध करेंगे । पूरा देश इस समय दैवी आपदा से
जूझ रहा है और दुख की बात है कि सरकार का जिम्मेदार मीडिया ही अफवाह फैलाकर लोगों
को गुमराह करने में लगा है । रेडियो रिपोर्ट में वाइस एडमिरल दया संदागिरी के हवाले
से कहा गया है कि सुनामी से मची तबाही में प्रभाकरन और अम्मान या तो मारे गए या वे
लापता हैं । असम विधानसभा चुनाव में एक साल का समय शेष रह गया है । लेकिन मुख्य
विपक्षी पार्टी असम गण परिषद (अगप) में आपसी खींच - तान जोरों पर है । सोमवार से
पार्टी के संचालन समिति की बैठक शुरू हो रही है, जिसमें नेतृत्व का मुद्दा छाए रहने
की संभावना है । पार्टी के दो वरिष्ठ नेताओं पूर्व मुख्यमंत्री प्रफुल्ल कुमार महंत
तथा पूर्व गृह मंत्री भृगुकुमार फूकन का साथ आना पार्टी अध्यक्ष बृंदाबन गोस्वामी
और उनके समर्थकों के लिए अच्छा संकेत नहीं माना जा रहा है । गोस्वामी कैंप ने महंत
को दरकिनार कर दिया है । उनके समर्थकों ने दूसरी महिला से संबंध रखने के आरोप में
उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर कर दिया था । पार्टी के संस्थापक महंत अब इस झटके
से उबर चुके हैं और उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर हमला तेज कर दिया है । पार्टी की
गतिविधियों में फिर दिलचस्पी ले रहे महंत को दोस्त से दुश्मन बन चुके फूकन से भी
हाथ मिलाने से गुरेज नहीं है । फूकन भी पार्टी में अपनी उपेक्षा से आहत हैं । फूकन
के खारगुली हिल स्थित आवास पर हुई बैठक के मद्देनज़र अगप की किस्मत बदलने की उम्मीद
जताई जा रही है । गोस्वामी पहले कह चुके हैं कि पार्टी में किसी भी कीमत पर अनुशासन
बनाए रखा जाएगा । लेकिन उन्होंने महंत और फूकन के कमजोर नेतृत्व के आरोप पर टिथी
करने से इन्कार कर दिया । दोनों नेताओं ने गोस्वामी पर आरोप लगाया है कि उनके कमजोर
नेतृत्व के कारण पार्टी जनता में लोकप्रिय नहीं हो सकी । गोस्वामी ने कहा कि उन्हें
लोकतांत्रिक तरीके से चुना गया है और उन्होंने पार्टी के नियमों का सख्ती से पालन
किया है । यह असम की जनता को फैसला करना है कि कौन सी पार्टी अगली सरकार बनाएगी ।
विदेश मंत्री नटवर सिंह शुक्रवार को श्रीलंका की तीन - दिवसीय यात्रा पर रवाना होने
वाले हैं । नटवर सिंह का यह दौरा दोनों देशों के बीच आर्थिक एवं राजनीतिक सहयोग की
दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है । गौरतलब है कि श्रीलंका की सुनामी
पुनर्निर्माण परियोजना में भारत श्रीलंका को महत्वपूर्ण रूप से मदद प्रदान कर रहा
है । दौरे के दौरान नटवर सिंह भारत - श्रीलंका संयुक्त आयोग की बैठक की श्रीलंका के
विदेश मंत्री लक्ष्मण कादिर गमर के साथ मिलकर अध्यक्षता करेंगे । भारतीय विदेश
मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि सिंह श्रीलंका की राष्ट्रपति,
प्रधानमंत्री तथा अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ विभिन्न मुद्दों पर बात - चीत भी
करेंगे । गौरतलब है कि 2003 में भारत - श्रीलंका संयुक्त आयोग की बैठक के बाद से ही
दोनों देशों के बीच नए सहयोग के दौर की शुरुआत हुई है । सिंह का श्रीलंका दौरा ऐसे
समय में हो रहा है जब सुनामी पुनर्निर्माण योजना में श्रीलंका को भारी
अंतर्राष्ट्रीय ऋण का भी सामना करना पड़ रहा है । श्रीलंका सरकार यह चाहती है कि
अरबों रुपये की इस पुनर्निर्माण योजना में तमिल टाईगर भी सहयोग करे, लेकिन श्रीलंका
के कई प्रमुख राजनीतिक दल सरकार की इस योजना का भारी विरोध कर रहे हैं । सत्तारूढ़
गठबंधन में शामिल जनता विमुक्ति पेरामुना ने धमकी दी है कि अगर इस योजना में तमिल
टाईगर को शामिल किया गया तो वह सरकार से अलग हो जाएगी । भारत श्रीलंका की क्षेत्रीय
अखंडता को महत्व देने के साथ - साथ श्रीलंका के जातीय विवाद में भी मध्यस्थता करने
का प्रस्ताव रख चुका है । सिंह के इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच इस मुद्दे
पर भी बात - चीत की जाएगी । श्रीलंका की सुनामी पुनर्निर्माण योजना के लिए भारत ने
लगभग 3 करोड़ डॉलर की मदद का प्रस्ताव दिया है । छत्तीसगढ़ में माओवादियों के कारण
खतरे में पड़े आदिवासी समूहों के सर्वे पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद इसे रद्द कर
दिया गया है । ये आदिवासी अबुझमादिया समुदाय से संबंधित हैं । इनकी संख्या 19,401
बताई जाती है । सरकारी आंकड़ों के अनुसार इनका अस्तित्व खतरे में है । ये आदिवासी
महाराष्ट्र से सटे छत्तीसगढ़ के जंगलों में रहते हैं । अबुझमाद वन 6 हजार वर्ग
किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है । इन आदिवासियों तक कभी ब्रिटिश भी नहीं पहुँच
पाए थे । यह जंगल अब माओवादियों का एक महत्वपूर्ण गढ़ बन गया है । माओवादियों के
यहाँ कई प्रशिक्षण केंद्र हैं । आदिवासी शोध और प्रशिक्षण संस्थान के संयुक्त
निदेशक टी. आर. वैष्णव ने कहा कि पिछले महीने हम लोगों को सर्वे बंद करने पर मजबूर
कर दिया गया, क्योंकि माओवादियों की ओर से हमें कई बार धमकी दी गई हैं । देश में
पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार ने अलग पंचायती राज
मंत्रालय का गठन तो डेढ़ साल पहले कर दिया, लेकिन मंत्रालय के लिए सृजित 66 पदों
में से 49 पद अभी तक रिक्त पड़े हैं । इन डेढ़ सालों में सरकार महज 17 पदों पर
नियुक्ति कर पाई जिसके चलते मंत्रालय की योजनाएं धरातल पर तो दूर कागजों में भी ठीक
से नहीं बन पा रही हैं । सरकार के रवैये से नाराज संसद की स्थाई समिति ने खाली पदों
को न भरने पर मंत्रालय को फटकार लगाई है । यूपीए सरकार ने पंचायती राज संस्थाओं को
मजबूत बनाने और स्थानीय निकायों को सामाजिक न्याय और आर्थिक विकास का जरिया बनाने
का दावा करते हुए 27 मई 2004 को पंचायती राज मंत्रालय का गठन किया था । अलग
मंत्रालय के गठन का उद्देश्य यह भी था कि पंचायती राज से संबंधित मुद्दों पर अलग से
ध्यान दिया जा सके । पहले यह ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत पूर्ण विभाग के रूप में
काम कर रहा था । मंत्रालय को सुचारू रूप से चलाने और प्रशासनिक काम - काज के लिए
वित्त मंत्रालय ने विभिन्न ग्रेडों में कुल 66 पद सृजित किए जाने की मंजूरी दी थी ।
लेकिन एक साल से ज्यादा समय बीतने के बाद भी अब तक केवल 17 पदों पर नियुक्ति हो सकी
है । संसद की स्थाई समिति ने मंत्रालय के इस रवैये पर खासी नाराजगी और चिंता जाहिर
की है । समिति ने कहा है कि कायदे से मंत्रालय के विभाजन से पहले ही प्रशासनिक
कठिनाईयों को दूर कर लिया जाना चाहिए था । समिति ने खाली पड़े पदों पर नियुक्ति किए
बिना मंत्रालय के गठन के उद्देश्य की पूर्ति में संदेह व्यक्त किया है । समिति ने
आश्चर्य व्यक्त किया कि पर्याप्त जनशक्ति के बिना मंत्रालय अपना काम - काज कैसे
पूरा कर पा रहा है । बहरहाल, समिति की रिपोर्ट पर मंत्रालय की बोलती बंद है । भारत
और पाकिस्तान के बीच आपसी विश्वास बढ़ाने की प्रक्रिया के तहत पाकिस्तान ने भारत से
जम्मू कश्मीर में सैनिकों की कटौती करने के लिए कहा है । दोनों देशों के बीच
ऐतिहासिक कश्मीर बस सेवा 7 अप्रैल से शुरू होने वाली है । पाकिस्तान का यह भी कहना
है कि भारत अगर निषेधात्मक व्यापार नीति को हटा लेता है तो उसे सर्वाधिक वरीयता
प्राप्त राष्ट्र (एमएफएन) का दर्जा देने पर विचार किया जा सकता है । पाकिस्तानी
अखबार दि नेशन में राजनयिक सूत्रों के हवाले से छपी खबर के मुताबिक पाकिस्तान का
मानना है कि जम्मू कश्मीर में सैनिकों की कटौती से दोनों देशों के बीच विश्वास
बहाली में मदद मिलेगी । अखबार के मुताबिक जम्मू - कश्मीर में 60 हजार सैनिक तैनात
हैं और इनमें से ज्यादातर की तैनाती कश्मीर घाटी में की गई है । दूसरी ओर भारत का
कहना है कि पाकिस्तान के नियंत्रण वाले कश्मीर से आंतकवादी कैंपों को खत्म करने के
बाद ही सेना में कटौती पर विचार किया जाएगा । इससे पहले भारत ने दोनों के बीच
विश्वास बहाली के उपायों के तहत जम्मू - कश्मीर से सेना में कटौती की घोषणा की थी ।
तब जम्मू डिवीजन और अनंतनाग से तकरीबन 6 हजार जवानों को वापस बुला लिया गया था ।
अखबार लिखता है कि कश्मीर घाटी से बड़ी तादाद में सैनिकों की कटौती के बाद ही
कश्मीरी लोगों का विश्वास जीता जा सकता है । मालूम हो कि कश्मीर के सभी
प्रतिनिधियों ने कश्मीर बस सेवा की शुरुआत का स्वागत किया है । सर्वाधिक वरीयता
प्राप्त देश का दर्जा देने के मामले में पाकिस्तान के वाणिज्य मंत्री हुमायूँ अख्तर
खान ने कहा कि हमने ऐसे क्षेत्रों की पहचान की है जो भारत की वाणिज्यिक नीति के
कारण कुप्रभावित रहे हैं । पाकिस्तान भारत के खिलाफ शुल्क, गैर - शुल्क और अर्ध -
शुल्क अवरोधों की शिकायत करता रहा है । भारत के इस रवैये के कारण पाकिस्तानी
निर्यातकों को भारी वित्तीय नुक़सान हो रहा है । बिहार के जेलमंत्री राघवेंद्र
प्रताप सिंह ने राजद के बाहुबली सांसद पप्पू यादव द्वारा बेउर जेलकर्मियों को जान
से मारने की धमकी के आरोप की जाँच के आदेश दिए हैं । महानिरीक्षक जेल जाँच के बाद
उन्हें रिपोर्ट सौंपेंगे । शिकायत के बाद कल शाम से बेउर जेल में एक कार्यकारी
मजिस्ट्रेट को भीड़ से निपटने के लिए तैनात कर दिया गया है । जेल में अतिरिक्त
सुरक्षा बल भी तैनात किया जाएगा । गौरतलब है कि जेल प्रशासन ने जब इस बाहुबली नेता
को उनसे मिलने आए लोगों से भेंट नहीं करने दी तो शनिवार को उन्होंने जेलकर्मियों को
परिणाम भुगतने की धमकी दी । उन्होंने कथित तौर पर जेलर भोला सिंह को जान से मार
डालने की धमकी दी । कारागार मंत्री सिंह ने बताया कि उन्होंने जेल महानिरीक्षक दीपक
कुमार सिंह को मामले की जाँच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है । उन्होंने बताया
कि रिपोर्ट आने पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी । बेउर जेल के जेलर भोला सिंह और कुछ
अन्य कर्मचारियों ने कारागार विभाग को कल दिए गए एक लिखित आवेदन में बताया है कि
माकपा विधायक अजित सरकार की हत्या के मामले में जेल में बंद पप्पू यादव ने
मुलाकातियों से मिलने से मना करने पर उन्हें जान से मारने की धमकी दी । उन्होंने
परिस्थिति से निपटने के लिए मजिस्ट्रेट की निगरानी में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात
करने की भी माँग की है । जेल से एक फैक्स संदेश मिलने के बाद पुलिस अधीक्षक ने जेल
में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती के निर्देश दिए हैं । कैदियों से मिलने आने वालों
की भीड़ के कारण जेलकर्मियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था । वरिष्ठ पुलिस
अधीक्षक एन. के. खान ने फुलवारी शरीफ थाने के प्रभारी को मामले को देखने और जेल में
अतिरिक्त पुलिस - बल तैनात करने का आदेश दिया है । बताया जाता है कि इसके पूर्व
मधेपुरा से राजद के सांसद पप्पू यादव की उनसे मिलने बड़ी संख्या में आने वाले
अनाधिकृत मुलाकातियों को रोकने के मामले में जेल महानिरीक्षक से भी नोक - झोंक हो
चुकी है । इस घटना पर सुप्रीम कोर्ट की भी निगाह है, जिसने मामले की जाँच के लिए
सीबीआई से कहा है । हालांकि समंदर की हर लहर को पहचानने वाले मछुआरों का दावा है कि
दक्षिण भारतीय समुद्री जल क्षेत्र में भारी हेर - फेर हुआ है । सुनामी लहरों के
उफान के बाद सागर की गहराई कम होने का दावा किया जा रहा है । यानि समुद्र में ठहरे
पानी का जल स्तर ही कम नहीं हुआ बल्कि समुद्र तल भी ऊँचा हुआ है । मछुआरों के
अनुसार, इसके अलावा समुद्र से घिरे तट भी बीस - बीस मीटर तक समुद्र ने अपने आगोश
में ले लिए हैं । हालांकि कुछ क्षेत्रों में मछुआरों ने ऐसी मछलियाँ देखने का दावा
किया जो कि इस क्षेत्र में पहले कभी नहीं देखी गई हैं । साउथ इंडियन फिशरमैन
सोसाइटी फेडरेशन के अध्यक्ष विवेकानंदन ने बताया कि मछुआरों ने उनसे कहा है कि
समुद्र की गहराई में खासी कमी आई है । उन्होंने बताया कि विगत शनिवार को
पुतुपुत्तिनम गाँव के मछुआरे समुद्र में गए थे । इन मछुआरों ने बताया कि मछलियाँ यह
क्षेत्र छोड़ कर दूसरे स्थानों पर जा चुकी हैं । उन्होंने बताया कि आमतौर पर
चक्रवात या बाढ़ आने पर मछुआरों को मछलियाँ ज्यादा मिलती हैं । लेकिन इस बार उन्हें
अधिक मछलियाँ नहीं मिलीं । इसके अलावा जो एक और बड़ा परिवर्तन देखा गया, उसके
मुताबिक दक्षिण भारतीय तटों की बीस मीटर की भूमि समुद्र में समा चुकी है । एक
अध्ययन तुतिकोरिन स्थित फिशरीज़ कॉलेज एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट करेगा । इसके तहत
समुद्र की भौतिक व जैविक स्थितियों का आंकलन होगा । दूसरा अध्ययन समुद्री विभाग
कराएगा जिसमें सुनामी के प्रभाव के तौर पर समुद्री जीवन व जल की गुणवत्ता के प्रभाव
पर गहन विचार - विमर्श होगा । हाल ही में नेपाल में संपन्न पालिका चुनावों की
विश्वसनीयता पर परोक्ष रूप से सवालिया निशान लगाते हुए भारत ने कहा कि किसी भी
चुनाव की विश्वसनीयता के लिए उसमें मुख्य धारा की सभी पार्टियों की भागीदारी बेहद
जरूरी है । लेकिन नेपाल में हुए चुनावों में यह चीज नहीं देखी गई । बृहस्पतिवार को
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नवतेज सरना ने कहा कि नेपाल गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा
है । वहाँ शांतिपूर्ण राजनीतिक समाधान के लिए यह जरूरी है कि सभी पक्षों के साथ बात
- चीत और उनकी भागीदारी सुनिश्चित की जाए । सरना ने एक बयान में कहा कि नेपाल में
चुनाव ऐसे समय में हुए जब बड़ी राजनीतिक पार्टियों ने उनकी गतिविधियों पर रोक लगाए
जाने के कारण इसके बायकॉट का ऐलान किया था और इन पार्टियों के नेताओं की गिरफ्तारी
और हिरासत में लिया जाना जारी है । उन्होंने कहा कि किसी भी चुनाव की विश्वसनीयता
के लिए यह जरूरी है कि मुख्यधारा की पार्टियों की उसमें भागीदारी हो । इसके बाद ही
देश में लोकतंत्र को बहाल किया जा सकता है और राजनीतिक स्थिरता लाई जा सकती है ।
प्रवक्ता ने कहा कि भारत का नेपाल के साथ करीबी रिश्ता है । उसकी यह इच्छा है कि
वहाँ जल्द शांति और स्थिरता बहाल हो और वह विकास के रास्ते पर आगे बढ़े । सरना ने
चुनावों के दौरान माओवादियों के कई हिंसक हमलों का भी जिक्र किया । नेपाल नरेश
ज्ञानेंद्र ने निकाय चुनावों को लोकतंत्र बहाली की ओर पहला कदम करार दिया है । ये
चुनाव बुधवार को राजनीतिक दलों के बायकॉट और माओवादी हमलों के बीच हुए । पूरे नेपाल
में ३६ नगर - पालिकाओं के लिए कराए गए इस चुनाव में बहुत कम संख्या में मतदाताओं ने
हिस्सेदारी की । चुनावी विरोधी प्रदर्शन के दौरान सेना की फायरिंग में एक व्यक्ति
की मौत हो गई थी तथा एक अन्य घायल हुआ था । रक्षा मंत्री प्रणब मुखर्जी ने बुधवार
को राज्यसभा में कहा कि केंद्र सरकार जम्मू - कश्मीर में नियंत्रण - रेखा (एलओसी)
पर एक और बाड़ लगाने पर विचार नहीं कर रही है । मुखर्जी ने लिखित जवाब में कहा कि
चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के निर्देशों पर आधारित रक्षा स्टाफ के एकीकरण के लिए एक
संयुक्त जल - स्थल सेल का गठन किया है, जो तीनों सेवाओं के प्रशिक्षण और अभियानों
के लिए मार्च २००३ से काम कर रहा है । मुखर्जी ने संसद को बताया है कि पाकिस्तान की
जेलों में भारत के ६२ सैनिक बंद हैं । मुखर्जी ने कहा कि सुनामी राहत अभियान को
एकीकृत रक्षा स्टॉफ द्वारा प्रभावशाली और संयुक्त रूप से अंजाम दिया गया है । एक
अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी पर कमेटी ने
इंडियन नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी और नेशनल डिफेंस कॉलेज (दिल्ली), नेशनल डिफेंस
एकेडमी (पुणे), इंस्टीट्यूट ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट (सिकंदराबाद) और डिफेंस सर्विस
स्टॉफ कॉलेज (वेलिंगटन) जैसे संस्थानों को इसमें शामिल करने की सिफारिश की है ।
सेनाओं के आधुनिकीकरण के तहत भारतीय सेना के अपने सैटेलाइट की जरूरत के बारे में
रक्षा मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के हितों को ध्यान में रखते हुए सदन में
इसके बारे में सूचना नहीं दी जा सकती है । उन्होंने कहा कि सरकार तीन बड़ी
परियोजनाओं पर ९५४१ करोड़ रुपये व्यय कर रही है । सदन में प्रश्नकाल के दौरान अहमद
ने पाकिस्तान को अमेरिका द्वारा हथियार देने की रिपोर्ट पर गंभीर चिंता जताते हुए
कहा कि इससे भारत में अमेरिकी छवि को नुकसान पहुँचेगा । उन्होंने कहा कि इसके
दुष्परिणामों के संबंध में अमेरिकी सरकार को अवगत करा दिया गया है । नेपाल में
लोकतंत्र की बहाली के बिना अल्पसंख्यकों के हितों की बात करना क्या संभव हो पाएगा ।
विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक नेपाल में लोकतंत्र की स्थापना नहीं होगी तब तक वहाँ
मानवाधिकार और अल्पसंख्यक जैसे विषयों पर बात करना बेमानी है । अल्पसंख्यकों के
हितों के लिए काम करने और विश्व का ध्यान उनकी समस्याओं की ओर खींचने के लिए
श्रीलंका, पाकिस्तान और बांग्लादेश के अल्पसंख्यक समुदायों ने कोशिशें तेज कर दी
हैं, लेकिन नेपाल को लेकर आशंका अब भी बनी हुई है । हाल में ही दक्षिण एशियाई
क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) देशों के अल्पसंख्यक समुदायों ने अल्पसंख्यकों की
शैक्षणिक, सामाजिक और आर्थिक बेहतरी के लिए दक्षिण एशियाई अल्पसंख्यक परिषद का गठन
किया है । अब सार्क देशों को स्थानीय परिषद बनानी है ताकि अल्पसंख्यकों की आवाज को
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जा सके । लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि नेपाल में
लोकतंत्र नहीं होने के बावजूद परिषद का गठन तो होगा लेकिन उसे काम नहीं करने दिया
जाएगा । नेपाल मामलों के विशेषज्ञ और वरिष्ठ पत्रकार आनंद स्वरूप वर्मा मानते हैं
कि जिस देश में नागरिकों के खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई हो रही है वहाँ इस तरह के
परिषद की जरूरत तो है लेकिन उसे काम करने से रोका जाएगा । उनका मानना है कि जब तक
नेपाल में लोकतंत्र की स्थापना नहीं हो जाती तब तक वहाँ के नागरिक घुटते ही रहेंगे
। आनंद बताते हैं कि नेपाल की जनजातियों व अल्पसंख्यकों ने अलग - अलग मोर्चे बनाकर
अपनी स्वायत्तता के खिलाफ जनांदोलन छेड़ रखा है । दूसरी तरफ दक्षिण एशियाई
अल्पसंख्यक परिषद के भारत के आयोजक और राष्ट्रीय एकता परिषद के सदस्य नाबिद हामिद
कहते हैं कि सिविल सोसाइटी के लोग हमारे साथ हैं । इसलिए लोकतंत्र नहीं होने के
बावजूद परिषद के काम - काज पर आयोजकों को शंका नहीं है । यह परिषद अल्पसंख्यकों की
सुरक्षा और उनकी बेहतरी के लिए नेपाल में लोकतंत्र की माँग पर भी जोर देगी । भारतीय
वायुसेना का एक दल फ्रांसीसी वायु सेना के साथ दूसरे संयुक्त लड़ाकू अभ्यास गरूड़ -
२ में हिस्सा लेने के लिए बृहस्पतिवार को फ्रांस के लिए रवाना हो गया । इस दल में
छह एसयू - ३० के लड़ाकू विमान और एक आईएल - ७८ मिड एअर रीफ्यूलर शामिल हैं ।
वायुसेना के उपाध्यक्ष एअर मार्शल एस. के. मलिक ने २४ स्क्वॅड्रन से एसयू - ३० को
और आगरा स्थित मिड एअर रीफ्यूलिंग स्क्वॅड्रन से आईएल - ७८ को झंडी दिखा कर रवाना
किया । इस मौके पर एअर मार्शल मलिक ने वायुसैनिकों से बेहतर अभ्यास कर भारतीय वायु
सेना की प्रतिष्ठा बढ़ाने का आह्वान किया । उन्होंने कहा कि प्रतिष्ठा बनाना बहुत
मुश्किल है और उससे ज्यादा मुश्किल उसे बनाए रखना है । उन्होंने कहा कि इस अभ्यास
से उन्हें एक अलग माहौल में उड़ान भरने की एक बड़ी चुनौती मिलेगी । अभ्यास के मकसद
के बारे में पत्रकारों को जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि गरूड़ - २ वायु रक्षा
तकनीकों पर केंद्रित होने के साथ - साथ भारतीय वायुसेना के बारे में भी जानकारी दे
सकेगा । जिसमें सुखोई विमानों को फ्रांस की वायुसेना के मिराज २००० - ५ लड़ाकू
विमानों के साथ - साथ पुराने मिराज २००० सी संस्करण के साथ अभ्यास करने का मौका मिल
सकेगा । अभ्यास का मुख्य लक्ष्य जमीनी हमलों के बजाय हवाई रक्षा है । एअर मार्शल
मलिक ने कहा कि दोनों पक्ष लड़ाकू भूमिका में रहने के साथ - साथ समूहों में उड़ान
भरेंगे । उन्होंने कहा कि हमारे वायुसेनाकर्मी फ्रांस के अनुभवों से सीख रहे हैं ।
के. आर. नारायणन को देश के राष्ट्रपति के रूप में अपनी सक्रिय भूमिका के लिए हमेशा
याद किया जाएगा । उन्होंने समय - समय पर राजनीतिक सत्ता को उसके गलत फैसलों पर
चेताया और बेबाकी से अपनी राय रखी । वर्ष १९९७ और २००१ के बीच राष्ट्रपति के रूप
में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने राजनीतिक दूरदर्शिता के साथ देश की उदार और
धर्मनिरपेक्ष परंपराओं का निर्वाह किया । कई मामलों में उनकी राय राजनीतिक सत्ता की
राय से अलग भी होती थी । १९९७ में भाजपा नेतृत्व वाली सरकार के समय उन्होंने बिहार
में राष्ट्रपति शासन लागू करने की कैबिनेट की सिफारिश को लौटा दिया था । वर्ष २००२
में गुजरात के मुस्लिम विरोधी दंगों के दौरान नारायणन ने कानून व्यवस्था को लेकर
तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सामने कुछ कड़े विचार भी रखे थे । वे
देश के सर्वोच्च पद पर पहुंचने वाले पहले दलित थे । नारायणन का शुरुआती जीवन
संघर्षो से भरा रहा । जाति व्यवस्था के कारण उन्हें तमाम सामाजिक और आर्थिक
दिक्कतों का सामना करना पड़ा । मध्य केरल के उझवुर में २७ अक्टूबर, १९२० को एक दलित
परिवार में जन्मे नारायणन सात भाई - बहनों में चौथे नंबर पर थे । तंगी के बावजूद
पिता रमन वैद्यन ने उन्हें अच्छी प्राथमिक शिक्षा दिलाई । नारायणन दस किलोमीटर पैदल
चलकर स्कूल जाते थे । बाद में उन्होंने कोट्टायम के सीएमएस कॉलेज में दाखिला लिया ।
इंटरमीडिएट में उन्हें छात्रवृत्ति मिली । त्रिवेंद्रम के महाराजा कॉलेज से बीए
(साहित्य) की परीक्षा दी और यूनीवर्सिटी में प्रथम स्थान प्राप्त किया । उन्होंने
यूनीवर्सिटी में प्रवक्ता की नौकरी पाने की कोशिश की । यूनीवर्सिटी ने एक दलित को
लेक्चरर की नौकरी देने से इनकार कर क्लर्क की नौकरी करने का प्रस्ताव रखा । समय
चक्र घूमा और पचास साल बाद नारायणन देश के उपराष्ट्रपति बन गए । तब उसी यूनीवर्सिटी
ने उनसे डिग्री स्वीकार करने का अनुरोध किया । नारायणन दिल्ली चले आए और भारतीय
विदेश विभाग में असिस्टेंट की नौकरी की । फिर पत्रकारिता शुरू कर दी । इस दौरान
उन्होंने महात्मा गांधी का इंटरव्यू लिया । जेआरडी टाटा की मदद से उन्होंने लंदन
स्कूल ऑफ इकोनॅमिक्स में दाखिला लिया और १९४९ में लौटकर वे भारतीय विदेश सेवा में
शामिल हो गए । इस दौरान नारायणन कई देशों में भारत के प्रतिनिधि रहे । १९८४ में
विदेश सेवा से लौटने के बाद वे केरल के ओट्टापलम से संसद के लिए निर्वाचित हुए ।
राजीव गांधी सरकार में वे विज्ञान एवं तकनीकी मंत्री रहे । बाद में उपराष्ट्रपति
बने । इस बार बजट में सेना की तीनों इकाइयों के लिए पूंजीगत खर्चों में बढ़ोतरी की
गई है । इससे अपेक्षा की जा रही है कि भारतीय सेना अपने लिए कुछ नए किस्म के
हथियारों को खरीदने की व्यवस्था कर सकेगी । वर्तमान बजट में इसके लिए ७७,००० करोड़
रुपये का फंड रखा गया है । पिछले बजट में यह राशि ६५,३०० करोड़ रुपये ही थी । इस
राशि में से केवल ६०,३०० करोड़ रुपये ही प्रयोग में लाये जा सकें । उच्च पदस्थ
रक्षा सूत्रों ने स्पष्ट किया कि फंड में बढ़ोत्तरी होने से सेना के लिए कुछ नए
संवेदनशील उपकरणों की खरीद - फरोख्त करने में मदद मिलेगी । उन्होंने बताया कि पिछली
सरकार ने कुछ रक्षा सौदे किए थे, जिनको पूरा करने में अब आसानी होगी । इन सौदों में
रूसी एयरक्राफ्ट कैरियर पोत एडमिरल गाशकोव, ६६ एडवांस जेट ट्रेनर और फॉल्कन राडार
प्रणाली शामिल हैं । सूत्रों का कहना है कि सरकार के पास इस वक्त कुछ और रक्षा सौदे
बीच रास्ते में ही लटके पड़े हैं । इनमें से कुछ के लिए तो राजनीतिक स्वीकृति की
जरूरत है और कुछ सौदे पैसे के लेनदेन को लेकर अटके हैं । पूरे रक्षा बजट में भारतीय
वायु सेना के हिस्से में नए विमानों की खरीद के लिए १२,८२५ करोड़ रुपये रखे गए हैं
। इसके अलावा अन्य उपकरणों की खरीद के लिए १५०० करोड़ रुपयों का प्रावधान रखा गया
है । नए विमानों में मिग - २१ एस की जगह मिराज २००० - ५ लड़ाकू विमानों के खरीदे
जाने की बात चल रही है । भारतीय सेना को भी नए उपकरणों की खरीद के लिए ६,५२१ करोड़
रुपये दिए गए हैं । रक्षा बजट में नौसेना के लिए भी ४४६० करोड़ रुपये का प्रस्ताव
रखा गया है । इसमें विभिन्न सौदों को तय सीमा के अंदर पूरा किया जा सकेगा ।
न्यूयॉर्क एक्सचेंज में कल दर्ज भारी तेजी के असर से आज दिल्ली सर्राफा बाजार में
भी दोनों बहुमूल्य धातुओं में उछाल का रुख रहा । न्यूयॉर्क में कल सोना ५ डॉलर
बढ़कर ४२४.५० डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ था । इसके असर से आज दिल्ली में सोना
स्टैंडर्ड तेजी का नया रिकॉर्ड बनाते हुए ६३३० रुपये प्रति १० ग्राम पर बंद हुआ ।
इसके पूर्व १२ जनवरी को सोने के दाम ६३२५ रुपये प्रति १० ग्राम पर पहुंचे थे ।
दूसरी तरफ मुंबई में सोना स्टैंडर्ड ३५ रुपये मजबूत होकर ६३६५ रुपये प्रति दस ग्राम
पर बंद हुआ । दिल्ली में चांदी हाजिर, ९९९ टंच का दाम ९० रुपये उछलकर ११२२० रुपये
प्रति किलो पर पहुंच गया । समर्थन में चांदी सिक्का व गिन्नी में भी भारी तेजी दर्ज
की गई । राजग संयोजक जॉर्ज फर्नांडिस ने बुधवार को लोकसभा में आरोप लगाया कि ताबूत
घोटाला सोनिया गांधी ने पिछली राजग सरकार को बदनाम करने के लिए उठाया था । जॉर्ज की
इस टिथी पर सदन में काफी देर तक हंगामा हुआ । जब यह मामला उठा तो उस समय कांग्रेस
के कम सांसद सदन में थे लेकिन उनकी मदद को रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव व राजद के
सांसद फौरन आगे आए । हंगामे को नियंत्रित करने में लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी को
खासी मुश्किल आई । लालू ने कहा कि विपक्ष को हर बात में सोनिया का नाम लेने की आदत
पड़ गई है । सदन में जब यह मामला उठा तो उस समय सोनिया गांधी मौजूद नहीं थीं ।
कांग्रेस के सांसद भी कम संख्या में थे । ऐसे में राजद सांसदों ने कमी पूरी की ।
उन्होंने जॉर्ज से कहा कि ताबूत घोटाले के असली कर्ताधर्ता तो जॉर्ज ही हैं ।
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस की बजाय जॉर्ज ने ताबूत घोटाले
की चर्चा छेड़ दी । उन्होंने सफाई दी कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखकर वह कह
चुके हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष लंबे समय से उनके खिलाफ ताबूत घोटाले का दुष्प्रचार
कर रही हैं और अब नई सरकार को इसकी जांच करनी चाहिए । जॉर्ज ने सवाल उठाया कि आखिर
इसकी जांच क्यों नहीं हो रही है । जॉर्ज ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष भी जानती हैं
कि यह सब झूठ है । जॉर्ज उस समय अचानक भड़क गए जब उनके भाषण में टोकाटाकी की जा रही
थी और सत्ताधारी दल की ओर से ताबूत घोटाले और तहलका घोटाले की बातें उछाली जा रही
थीं । उत्तेजित जॉर्ज ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर टिथी की जिस पर
सत्ताधारी दल की ओर से सदस्य भी उत्तेजित हो गए । खासतौर से आरजेडी सदस्य इसमें
शिरकत करते देखे गए । रामकृपाल यादव ने जॉर्ज के बारे में फिर आपत्तिजनक शब्द कहे
जिन्हें लेकर भाजपा की बेंच से भी सदस्य उठ खड़े हुए । करीब १५ मिनट तक हंगामा होता
रहा । इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने कहा कि बिना नोटिस के आप किसी का
नाम नहीं ले सकते । तब नेता प्रतिपक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि जॉर्ज जब
रक्षामंत्री थे तब भी उनके खिलाफ इस खास मुद्दे को लेकर झूठा प्रचार किया जा रहा था
। अब उन्होंने प्रधानमंत्री को लिखा है तो उन्हें इसका जिक्र करने दिया जाना चाहिए
। जॉर्ज ने फिर दावा किया कि वह इस की प्रति संसद के पटल पर रखने को राजी हैं ।
उन्होंने कहा कि तहलका के मामले में भी जिस तरह से कुछ लोगों ने यह मामला तैयार
किया है उसका पूरा ब्योरा वह सदन के पटल पर रखने को तैयार हैं । जॉर्ज का आरोप था
कि यह सत्ताधारी दल के कुछ नेताओं के इशारे पर तैयार किया गया था । भाषण के लिए
जॉर्ज को दिए गए १० मिनट का समय खत्म हो जाने के बाद भाजपा सदस्यों ने स्वेच्छा से
अपने हिस्से का समय भी दे दिया । इस सारे मामले में खास बात यह दिखाई पड़ी कि दो
दिन पहले बिहार में राष्ट्रपति शासन के फैसले पर कैबिनेट बैठक का बहिष्कार करने
वाले लालू प्रसाद यादव सोनिया गांधी का जमकर बचाव करते दिखाई दिए । कांग्रेस की ओर
से जगदीश टाइटलर और पवन बंसल की आवाज सुनाई दे रही थी । पवन बंसल ने सवाल उठाया कि
आखिर सोनिया गांधी के खिलाफ क्या साजिश रची जा रही है । सत्ताधारी दल की ओर से कुछ
सदस्य जॉर्ज के इस बयान पर माफी मांगने की बात कर रहे थे । गुटखा निर्माता रसिकलाल
माणिकचंद धारीवाल ने अंडरवर्ल्ड के साथ संबंधों के मामले में कोर्ट में पेश न होने
पर जारी गैर जमानती वारंट को रद्द करने के लिए अब सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की
है । धारीवाल की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका में बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा उनकी
गैर जमानती वारंट रद्द करने की याचिका खारिज करने के २२ फरवरी के आदेश को चुनौती दी
गई है । मुंबई पुलिस ने अपनी दलील में कहा था कि सच्चाई जानने के लिए धारीवाल को
हिरासत में लेकर पूछताछ करना जरूरी है । जबकि सीबीआई का कहना है कि फिलहाल धारीवाल
को गिरफ्तार करने की उसकी कोई मंशा नहीं है, लेकिन पूछताछ के बाद जरूरी होने पर नया
मामला दर्ज कराया जा सकता है । अंडरवर्ल्ड से रिश्ते के मामले की जांच पहले मुंबई
पुलिस कर रही थी और उसके अनुरोध पर धारीवाल के खिलाफ वारंट जारी किए गए हैं ।
सीबीआई को इस मामले की जांच हाल ही में सौंपी गई है । तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग से आज मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के खिलाफ स्थानीय
निकायों और विधानसभा चुनावों में धांधली करने की शिकायत की । उन्होंने माकपा पर
राज्य में लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगाया । माकपा के खिलाफ शिकायतों और आरोपों का
पिटारा लेकर चुनाव आयोग पहुंची ममता ने चुनाव आयोग से इस मामले की जांच के लिए
विशेष पर्यवेक्षक भेजने की मांग की है । ममता ने मुख्य चुनाव आयुक्त बी. बी. टंडन
को अपना ज्ञापन सौंपा । उनके साथ तृणमूल के अन्य नेता भी थे । तकरीबन एक घंटे तक
चली मुलाकात के बाद ममता बनर्जी ने पत्रकारों को बताया कि राज्य में निष्पक्ष और
स्वतंत्र चुनाव कराना वक्त की जरूरत है । क्योंकि सीपीएम चुनाव में बड़े पैमाने पर
धांधली और लोकतंत्र की हत्या कर बार - बार जीत रही है । उन्होंने आरोप लगाते हुए
कहा कि जो लोग माकपा को वोट नहीं देना चाहते हैं उनके साथ जबरदस्ती की जाती है और
फर्जी वोट डाले जाते हैं । पूरी चुनावी प्रक्रिया में सीपीएम की भूमिका को संदेह के
घेरे में लेते हुए उन्होंने कहा कि मतदाता सूची और ईवीएम मशीनों में छेड़खानी कर और
मतदान केंद्र लूट कर ही माकपा नेता पिछले कई सालों से पश्चिम बंगाल में सत्ता में
बने हुए हैं । ममता ने कहा कि यदि आयोग राज्य में निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कराए
तो राज्य से माकपा का नामोनिशान मिट जाएगा । पंजाब विधानसभा के पूर्व स्पीकर और
शिरोमणि अकाली दल के सांसद व दलित नेता चरणजीत सिंह अटवाल को लोकसभा के उपाध्यक्ष
पद पर सर्वसम्मति से चुन लिया गया है । बुधवार को सदन में पूर्व प्रधानंमत्री अटल
बिहारी वाजपेयी ने उनके नाम का प्रस्ताव किया, जिसका समर्थन पूर्व उपप्रधानमंत्री
लालकृष्ण आडवाणी और रक्षा मंत्री प्रणव मुखर्जी ने किया । लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ
चटर्जी ने जैसे ही अटवाल के उपाध्यक्ष चुने जाने की घोषणा की, पूरे सदन में मेजें
थपथपाकर स्वागत किया गया । 67 वर्षीय अटवाल प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बाद दूसरे
ऐसे सिख नेता हैं, जो देश के किसी महत्वपूर्ण पद पर काब़िज़ हुए हैं । अपने चुनाव
के बाद सभी को धन्यवाद देते हुए अटवाल ने कहा कि ऐसी ही लोकतांत्रिक प्रक्रिया से
सदन की कार्रवाईयां आसानी से चलतीं हैं । उन्होंने कहा कि उन्हें यह मान सम्मान
इसलिए मिला क्योंकि वह हमेशा अकाली दल के अनुशासित सिपाही के रूप में काम करते रहे
हैं । अटवाल ने जोर देकर कहा कि सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच वह अच्छा तालमेल बिठाने
की कोशिश करेंगे । उनका कहना था कि ऐसा कोई मसला नहीं है जिसका हल नहीं निकल सकता
हो । हम सबको साथ लेकर चलने की कोशिश करेंगे । इसके पहले लोकसभा में प्रधानमंत्री
मनमोहन सिंह ने कहा कि अटवाल विशिष्ट सांसद रहे हैं और उनके नेतृत्व और मार्गदर्शन
में सदन की कार्यवाही सुचारु ढंग से चलेगी । लोकसभा में कांग्रेस के नेता प्रणव
मुखर्जी ने कहा कि यह हमारे लोकतंत्र की परिपक्वता को दिखाता है कि लोकसभा अध्यक्ष
और उपाध्यक्ष का चुनाव सर्वसम्मति से हुआ । विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी अटवाल
के नाम पर थोड़ा गड़बड़ाए और उन्होंने उन्हें सोहन सिंह कह दिया । आडवाणी ने कहा कि
उनके पास विधानसभा अध्यक्ष का भी अनुभव है और उन्होंने उम्मीद जताई कि वह अपने
दायित्व को बखूबी निभाएंगे । अटल बिहारी वाजपेयी ने भी उम्मीद जताई कि चरणजीत सिंह
अटवाल के सहयोग से कार्यवाही का ठीक ढंग से संचालन हो सकेगा । सोनिया गांधी ने
उम्मीद जताई कि सदन को उनके मार्गदर्शन और अनुभव का लाभ मिलता रहेगा । समाजवादी
पार्टी के नेता रामगोपाल यादव ने अटवाल को बधाई दी और राजग पर कटाक्ष किया कि
हंगामे को देखते हुए सहयोग देने के आश्वासनों पर भरोसा नहीं रहा है लेकिन सपा
उन्हें पूरा सहयोग देगी । जनता दल (यू) के नितीश कुमार ने चुटकी ली कि उधर सरदार
मनमोहन सिंह हैं और इधर सरदार चरणजीत सिंह अटवाल हैं । ममता बनर्जी ने कहा कि पंजाब
और पश्चिम बंगाल का संबंध पुराना रहा है । उनका कहना था कि रवींद्रनाथ टेगौर ने भी
राष्ट्रगान में पंजाब का नाम प्रमुखता से लिया है । शिरोमणि अकाली दल नेता सुखदेव
सिंह ढींढसा ने कहा कि उन्हें डबल खुशी हो रही है । उन्होंने अकाली दल को यह पद दिए
जाने के लिए वाजपेयी और आडवाणी का आभार जताया । उन्होंने ठहाकों के बीच कहा कि मुझे
मौका देते रहेंगे तो सदन ठीक चलता रहेगा । किसानों के ऋण माफ करने से साफ इन्कार
करते हुए वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने लोकसभा को बताया कि इस समय किसानों के लिए
पूर्व घोषित राहत पैकेजों के तहत रियायत देने का विकल्प ही मौजूद है । वामदलों समेत
कई पार्टियों के सदस्यों ने कहा कि किसान समुदाय के लिए संस्थागत ऋणों में वृद्धि
भारी कर्ज के नीचे दबे किसानों की मदद नहीं करेगी । इस पर वित्त मंत्री ने कहा कि
फार्म पैकेज का उद्देश्य अधिक से अधिक संख्या में किसानों को वित्त संस्थानों के
तहत लाना है । जिससे किसानों को गैर संस्थागत क्षेत्रों से ऋण लेने से बचाया जा सके
। ये संस्थान अत्यधिक ब्याज लेते हैं । उन्होंने कहा कि किसी भी अन्य विकल्प पर
विचार करने से पहले सरकार इस पैकेज को ईमानदारी से लागू करना चाहती है । वित्त
मंत्री इस पैकेज को लागू करने के लिए निगरानी संबंधी कोई आयोग गठित करने के सुझाव
से सहमत नहीं हुए । चिदंबरम ने कहा कि अगर पैकेज लागू नहीं हो रहा है तो इसकी सूचना
उन्हें दी जाए । वह इसके खिलाफ कड़े कदम उठाएंगे । चिदंबरम ने अर्थव्यवस्था में 7.0
फीसदी की दर से वृद्धि की बात कही । उन्होंने कहा कि जिस तरह पिछले साल कृषि में
विकास हुआ हम वैसा नहीं चाहते । हम उम्मीद करते हैं कृषि में उचित दर से विकास हो ।
अगर उद्योग और सेवाएं अपनी वृद्धि दर को बनाए रखते हैं तो हम 6 - 7.4 फीसदी की दर
पर रह सकते हैं । उन्होंने कहा कि वह वृद्धि दर 7 फीसदी अवश्य चाहेंगे । कांग्रेस
के रुख को भांपते हुए मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने भी अपने तेवर सख्त कर लिए
हैं । हालांकि, यादव यह कहने से नहीं चूके कि वह इसी कांग्रेस से काफी लंबी लड़ाई
लड़ चुके हैं और संघर्ष के दौरान उन्हें जेल भी जाना पड़ा था । कांग्रेस द्वारा
प्रदेश की कानून व्यवस्था के मामले को तूल देने पर भी मुलायम ने उलट कर जवाब दिया
कि कांग्रेस पहले दिल्ली की व्यवस्था ही ठीक तरह से संभाल ले । उन्होंने कहा कि अब
जहां भी आपराधिक वारदातों में बढ़ोत्तरी होगी वहां जिम्मेदारी तय कर दोषी लोगों के
खिलाफ कार्रवाई की जाएगी । बीएड बेरोजगारों के मसले पर प्रदेश में बढ़ती नाराजगी के
मसले पर मुख्यमंत्री ने साफ किया कि अभी पहली सूची ही जारी की गई है, जल्दी ही और
सूची जारी होगी और प्रयास किया जाएगा कि सभी को समायोजित किया जा सके । मुख्यमंत्री
के साथ खेलकूद एवं युवा कल्याण मंत्री आर. के. चौधरी और कुंडा विधायक रघुराज प्रताप
सिंह उर्फ राजा भैया भी यहां पहुंचे । पांडेय के यहां शोक व्यक्त करने पहुंचने
वालों में कांग्रेस विधान मंडल दल के नेता प्रमोद तिवारी, पूर्व सांसद अभय प्रताप
सिंह, पूर्व मंत्री यशवंत सिंह, विधान परिषद सदस्य शैलेन्द्र प्रताप सिंह, जिला
पंचायत अध्यक्ष बिंदेश्वरी पटेल, विधायक रामनाथ सरोज, पूर्व सांसद सीएन सिंह,
जिलाध्यक्ष सियाराम यादव समेत तमाम लोग मौजूद थे । चिंकारा शिकार मामले में जोधपुर
की एक स्थानीय अदालत सोमवार को अपना फैसला सुनाएगी । इस मामले में बॉलीवुड अभिनेता
सलमान खान आरोपी हैं । सलमान के वकील हस्तीमल सारस्वत ने रविवार को इसकी जानकारी
देते हुए बताया कि चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने २८ मार्च को बचाव पक्ष की दलील
सुनी थी और इसके बाद फैसला सुनाने के लिए १० अप्रैल की तारीख तय की । इस दौरान
सलमान खान और पांच अन्य आरोपी बाल आंग्रे, प्रताप सिंह, ओम सिंह, दुष्यंत सिंह और
गोवर्धन सिंह भी मौजूद रहेंगे । यह मामला वर्ष १९८८ का है जब घोरा फार्महाउस में
सलमान और अन्य आरोपियों ने एक चिंकारा (हिरण की एक प्रजाति) को मार दिया था ।
बहरहाल, सारस्वत ने कहा कि सात अप्रैल को चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने सलमान की
याचिका ठुकरा दी थी । याचिका के माध्यम से मामले के एक गवाह हरीश दुलानी को बुलाने
की मांग की गई थी । दुलानी कई वर्षों से अदालत में हाजिर नहीं हो रहा है । दुलानी
के बारे में बताया जाता है कि वह शिकार मामले में मुख्य गवाह है । कारगिल के एक
धर्मस्थल में धर्मग्रंथ के अपमान को लेकर दो संप्रदायों के बीच झड़पों के बाद लेह
और इसके आसपास के इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया गया है । इसके साथ ही सावधानी बरतते
हुए प्रशासन की मदद के लिए सेना और भारत - तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) को भी बुला
लिया गया है । हालात को देखते हुए सेना ने फ्लैग मार्च किया । कश्मीर रेंज के पुलिस
महानिरीक्षक के. राजेंद्र ने लेह से बताया कि राज्य पुलिस ने झड़पों के सिलसिले में
अभी तक ३१ लोगों को गिरफ्तार किया है । राजेंद्र ने कहा कि स्थिति नियंत्रण में है
और कर्फ्यू लगा दिया गया है । किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सेना और
आईटीबीपी को भी बुलाया गया है । कारगिल से शुरू होकर तनाव लद्दाख में भी फैल गया था
। एक रक्षा प्रवक्ता ने बताया कि लेह में कानून - व्यवस्था को कायम रखने के लिए
प्रशासन ने सेना की सहायता मांगी । इसके बाद सेना ने दोपहर को फ्लैग मार्च किया ।
प्राप्त सूचना के मुताबिक, गुस्साई भीड़ ने कारगिल में दो घरों और तीन वाहनों को भी
क्षतिग्रस्त कर दिया । कश्मीर के डिवीजनल कमिश्नर बशारत अहमद डार ने कहा कि स्थिति
पूरी तरह नियंत्रण में है । कश्मीर समस्या पर मध्यस्थता करने के अनुरोध को अमेरिका
की ओर से सार्वजनिक रूप से खारिज किए जाने के बाद पाकिस्तान ने बृहस्पतिवार को इसके
दशकों पुराने रुख में बदलाव की घोषणा की । पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल परवेज
मुशर्रफ ने कहा कि कश्मीर समस्या द्विपक्षीय मसला है और वह इसे त्रिपक्षीय या
बहुपक्षीय मसला नहीं बनाना चाहते हैं । एक निजी टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में
मुशर्रफ ने कहा कि हम द्विपक्षीय वार्ता में शामिल हैं । हम इसे त्रिपक्षीय या
बहुपक्षीय मसला नहीं बनाना चाहते हैं । मुशर्रफ अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्लू.
बुश की हाल की टिप्पणियों के संबंध में पूछे गए सवालों का जवाब दे रहे थे । बुश ने
कहा था कि वह कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता नहीं करेंगे, लेकिन समस्या के हल के लिए
दोनों देशों को लगातार प्रोत्साहित करते रहेंगे । इससे पहले मुशर्रफ ने पिछले
सप्ताह इस्लामाबाद में संयुक्त प्रेस में कहा था कि उन्होंने बुश से कश्मीर समेत
सभी मुद्दों को सुलझाने में मध्यस्थता करने का अनुरोध किया है । उन्हें लगता है कि
दोनों चीजों के एक ही मायने हैं । भारत और पाकिस्तान के बीच चल रही शांति प्रक्रिया
वार्ता की स्थिति के बारे में पूछे जाने पर पाकिस्तानी राष्ट्रपति ने कहा कि
विश्वास से काम करने के उपायों की अपेक्षाकृत अच्छे परिणाम हैं लेकिन विवादों के
समाधान की दिशा में कोई प्रगति नहीं है । वोल्कर मामले में जांच के लिए संयुक्त
संसदीय समिति (जेपीसी) गठित किए जाने की राजग की मांग को खारिज करते हुए सरकार ने
शुक्रवार को कहा कि जस्टिस पाठक जांच प्राधिकरण अपना काम शुरू कर चुका है और उसकी
जांच का दायरा भी काफी व्यापक है । लिहाजा उसे अभी जेपीसी के गठन का कोई औचित्य
नहीं दिखता । संसद के दोनों सदनों में शुक्रवार को राजग ने शून्यकाल के दौरान यह
मांग उठाई । लेकिन सरकार ने विपक्ष की यह मांग नामंजूर कर दी । इसके विरोध में राजग
ने लोकसभा से वाकआउट भी किया । वहीं वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने वोल्कर मामले में
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया है । चिदंबरम ने इस
बात से इनकार किया कि इस संबंध में ईडी की अंतरिम जांच रिपोर्ट की कोई प्रति उन्हें
मिली है । इस जांच में सभी पहलुओं को शामिल किया जाएगा । इसलिए विपक्ष की जेपीसी
गठित करने की मांग मंजूर करने लायक नहीं है । उन्होंने कहा कि अनिल मथेरानी ने अब
एक नई बात कही है कि कांग्रेस पार्टी को इस बारे में पहले से पता था । बाद में यह
मांग ठुकराए जाने के विरोध में विपक्ष ने सदन की कार्यवाही से वाकआउट कर दिया ।
राज्यसभा में प्रतिपक्ष के नेता जसवंत सिंह ने यह मामला उठाया । जिसका कांग्रेस और
माकपा ने विरोध किया । सपा के अमर सिंह ने कहा कि अब चूंकि एक जांच इस मामले में
शुरू हो गयी है इसलिए जेपीसी जांच का कोई औचित्य नहीं है । राजग को यह मांग पहले
करनी चाहिए थी । सरकार की तरफ से संसदीय कार्य राज्यमंत्री सुरेश पचौरी ने विपक्ष
की मांग को खारिज करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में इसकी कोई जरूरत नहीं है
तथा पाठक प्राधिकरण मामले की तह तक जाएगा । उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि पाठक
की जांच रिपोर्ट और उस पर कार्यवाही रिपोर्ट को सरकार सदन के पटल पर रखेगी । भोजन,
शुद्ध पेयजल और चिकित्सा सेवा लोगों को उपलब्ध करवाने के लिए अब राष्ट्रीय
मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) आगे आ रहा है । नए साल में आयोग इन्हीं मुद्दों पर सबसे
अधिक ध्यान देगा और इसके लिए रूपरेखा तैयार हो चुकी है । आयोग विचाराधीन कैदियों की
स्थिति पर भी गंभीर है और उनकी स्थिति को सुधारने के लिए तरह - तरह का प्रयास कर
रहा है । अभी तक आयोग का ज्यादा ध्यान आतंकवाद और उग्रवाद प्रभावित इलाके पर ही
रहता था । क्योंकि, मानवाधिकार हनन की सबसे अधिक शिकायतें इन्हीं इलाकों से थीं ।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के एक अधिकारी का कहना है कि शुद्ध पेयजल हर व्यक्ति को
मुहैया हो यह मानवाधिकार के दायरे में है । स्वस्थ और सम्मानपूर्ण जीवन के लिए
शुद्ध पेयजल जरूरी है । शुद्ध पेयजल के लिए पैमाना भी आयोग ने ही तय किया है । इसी
तरह चिकित्सा सुविधा भी मानवाधिकार के दायरे में है । इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर
एक एक्शन प्लान बनाया गया है । यह एक्शन प्लान पांच क्षेत्रीय और एक राष्ट्रीय लोक
अदालत के निष्कर्षों पर तैयार किया गया है । इसी तरह भूख से मौत के मामलों को आयोग
ने गंभीरता से लिया है और इसके लिए राज्य सरकारों को आवश्यक निर्देश जारी किया गया
है । अधिकारियों का कहना है कि आयोग नए साल में इन्हीं सभी मुद्दों पर अपना ध्यान
विशेष रूप से केंद्रित करेगा । इसके अलावा जेलों में पड़े विचाराधीन कैदियों की
स्थिति के बारे में भी आयोग गंभीर है । देश के सभी जेलों में क्षमता से अधिक कैदी
हैं । कुल कैदियों में 75 फीसदी विचाराधीन हैं । कई विचाराधीन कैदी तो वर्षों से
जेल में पड़े हैं । विचाराधीन कैदियों की स्थिति में सुधार के लिए आयोग तरह - तरह
के प्रयास कर रहा है । पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ ने कहा है कि
कश्मीर समस्या के समाधान के लिए वे सितंबर माह में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से
मुलाकात कर सकते हैं । मुशर्रफ ने कहा कि भारत ने कश्मीर समस्या के समाधान के लिए
कुछ सकारात्मक संकेत दिए हैं और सितंबर में न्यूयार्क में इस पर भारतीय
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से बातचीत करेंगे । जंग अखबार से बातचीत करते हुए मुशर्रफ
ने कहा कि भारत - पाक रिश्ते में अपेक्षित सुधार के लिए कश्मीर समस्या का समाधान
जरूरी है । मुशर्रफ ने जोर देकर कहा कि कश्मीर केंद्रीय मसला है और इसका हल होते ही
दोनों देशों का संबंध सहज हो जाएगा । उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत अपने दृष्टिकोण
में बदलाव लाएगा । ऐसे में मैं भ्रमित हो जाता हूं । उन्होंने कहा कि बातचीत के
दौरान तो भारतीय वार्ताकार गंभीर नजर आते हैं, लेकिन कभी - कभी वे सार्वजनिक तौर पर
अलग ही राग अलापते हैं । ऐसे में भ्रम पैदा होता है । मुशर्रफ ने कहा कि मैंने भारत
के इस दोहरे रवैये के बारे में भारतीय विदेश मंत्री नटवर सिंह से शिकायत की थी ।
मैंने नटवर सिंह को बताया कि भारत की ओर से कश्मीर को लेकर स्पष्ट बयान नहीं आता ।
मुशर्रफ ने यह भी कहा कि हो सकता है कि भारत की नयी गठबंधन सरकार की अपनी सीमा होगी
और वह जनता के डर से खुलकर कहने की स्थिति में नहीं होगी । मुशर्रफ ने कहा कि भारत
की जनता शांति चाहती है और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय भी कश्मीर समस्या के समाधान के
लिए दबाव बनाता रहा है । अगर अल्लाह के शुक्र से इस समस्या का समाधान हो गया तो सभी
जेहादी संगठनों को बोरिया बिस्तर बांधना होगा । उन्होंने कहा कि हाल के कुछ महीनों
में भारत और पाकिस्तान ने द्विपक्षीय रिश्ते में सुधार के लिए कई सराहनीय कदम उठाए
हैं । अब हम विवादित मसलों पर खुलकर बातचीत कर रहे हैं । छत्तीसगढ़ के दांतेवाड़ा
जिले में नक्सलियों ने शुक्रवार को तड़के नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के एक
विस्फोटक डिपो पर हमला कर दिया । नक्सलियों से मुठभेड़ में केंद्रीय औद्योगिक
सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के आठ जवान शहीद हो गए और नौ घायल हो गए । नक्सली हमले के
बाद उत्तर प्रदेश - छत्तीसगढ़ सीमा पर चौकसी बढ़ा दी गई है । उग्रवादियों और
सुरक्षाबलों के बीच कई घंटे तक गोलीबारी जारी रही । राज्य के पुलिस महानिदेशक
ओमप्रकाश राठौर ने बताया कि उग्रवादी किरानदुल के नजदीक हिरोली स्थित डिपो से भारी
मात्रा में विस्फोटक और हथियार अपने साथ ले गए । दांतेवाड़ा के पुलिस सूत्रों के
मुताबिक हथियारों से लैस लगभग 400 नक्सली डिपो से भारी मात्रा में अमोनियम नाइट्रेट
ले जाने में सफल रहे । इसके अलावा वे अपने साथ 14 एसएलआर, नौ एमएम की एक पिस्तौल,
दो वायरलेस सेट व गोलाबारूद ले गए । कई विस्फोट करने के बाद नक्सलियों ने डिपो की
सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ के जवानों पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी । समझा जाता
है कि विस्फोटक सामग्री व हथियार लूटने के उद्देश्य से नक्सलियों ने डिपो पर हमला
किया । सूत्रों के मुताबिक नक्सलियों ने डिपो की बिजली आपूर्ति भी काट दी, जिससे
वहां की संचार व्यवस्था ठप पड़ गई । इसके चलते अंधेरे में बचाव कार्य में बाधा आई ।
हमले के कई घंटे बाद स्थानीय पुलिस घटनास्थल पर पहुंच पाई । पुलिस के मुताबिक
सीआईएसएफ के मारे गए जवानों की पहचान कर ली गई है । ये जवान बिहार, कर्नाटक,
छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश व महाराष्ट्र के रहने वाले थे । सलवा जुदुम नक्सली हिंसा के
खिलाफ स्थानीय आदिवासियों का आंदोलन है । स्थानीय आदिवासियों को आंदोलन में भाग
लेने से हतोत्साहित करने के लिए नक्सलियों ने बारगढ़ में आदिवासियों के पांच मकानों
को आग लगा दी । पिछले छह महीने से दक्षिण बस्तर के लोग नक्सलियों के खिलाफ अभियान
चला रहे हैं । हाल के दिनों में राज्य में नक्सली हिंसा में बढ़ोतरी दर्ज की गई है
। सोमवार को नक्सलियों ने दांतेवाड़ा जिले के कोट्टाचेरू क्षेत्र में हमला कर नागा
बटालियन के नौ जवानों की हत्या कर दी थी और नौ जवानों को घायल कर दिया था । ये जवान
इस क्षेत्र में नक्सली विरोधी अभियान को अंजाम देने वाले दल का हिस्सा थे । सोमवार
को ही एक अन्य घटना में नक्सलियों ने जशपुर जिले में अरा पुलिस स्टेशन पर हमला कर
दो पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी । उत्तर प्रदेश में कानून - व्यवस्था को लेकर
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के हमले से बौखलाए मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने
बृहस्पतिवार को जवाबी हमला करते हुए कहा कि मुंबई और दिल्ली के हालात खराब हैं और
दावा किया कि उन्हें सत्ता से हटाना आसान नहीं है । उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश
में कानून - व्यवस्था की स्थिति देश के किसी भी दूसरे राज्य से बेहतर है । यादव ने
कहा कि जो लोग उलटी - सीधी टिप्पणियां कर रहे हैं, उन्हें पहले मुंबई और दिल्ली के
हालात देखने चाहिए, जहां अपराध का ग्राफ सबसे ऊपर है । यह पूछे जाने पर कि क्या
उनकी सरकार को गिराने का संदेह है, यादव ने कहा कि उन्हें हटाना आसान काम नहीं है ।
सब जानते हैं कि सरकार को हटाना इतना आसान नहीं है । कांग्रेस के साथ अपने संबंधों
के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रताड़ना के बावजूद भी उनकी पार्टी समर्थन
दे रही है । पार्टी महासचिव अमर सिंह की पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के
साथ हाल की बैठक के बारे में उन्होंने कहा कि इसका कोई राजनीतिक अर्थ नहीं निकाला
जाना चाहिए । पूर्व प्रधानमंत्री की भाजपा विधायक और गोंडा से लोकसभा उम्मीदवार
घनश्याम शुक्ला की पिछले महीने हुई मौत की जांच को लेकर कुछ शिकायतें थीं ।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार इस संबंध में जल्दी ही कोई फैसला करेगी । राज्य
विधानसभा में अखिलेश सिंह की मौजूदगी को लेकर कांग्रेस के दावे के बारे में
मुख्यमंत्री ने कहा कि वह कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा के लिए चुने गए हैं ।
अखिलेश सिंह पर रायबरेली के कांग्रेस नेता कृष्ण प्रताप सिंह पर हमला करने का आरोप
है । अखिलेश का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि यदि उनके साथ अन्याय होता है, तो हम
उनका समर्थन करेंगे । केंद्र में यूपीए सरकार की खिंचाई करते हुए उन्होंने कहा कि
चलती ट्रेनों में यात्रियों की हत्याएं की जा रही हैं । पर्याप्त बिजली अभाव के
मद्देनजर महाराष्ट्र में डेमोक्रेटिक फ्रंट की सरकार ने मंगलवार को चुनाव - पूर्व
अपने वादे को अब नहीं निभाने का फैसला किया है । लोकतांत्रिक मोर्चा ने किसानों को
मुफ्त में बिजली मुहैया कराने का वादा किया था । हालांकि अब किसानों को मुफ्त में
बिजली नहीं मिलेगी । मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख ने राज्य मंत्रिमंडल की बैठक के
बाद इसकी घोषणा की । उड़ीसा विधानसभा में बुधवार को उस समय जबरदस्त हंगामा हुआ जब
विपक्ष ने सत्ता पक्ष के सदस्यों पर अपराधियों से सांठगांठ का आरोप लगाया ।
विधानसभा अध्यक्ष महेश्वर मोहंती को शोरशराबे के कारण विधानसभा की कार्यवाही को चार
बार स्थगित करना पड़ा । विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस सदस्य तारा
प्रसाद बाहिनीपति ने एक अखबार लहराते हुए कहा कि इसमें एक अपराधी के साथ सत्तारूढ़
पार्टी के एक सदस्य की तस्वीर छपी है । उस अपराधी को भुवनेश्वर में एक हत्या के
आरोप में गिरफ्तार किया गया था । इस पर अध्यक्ष ने कहा कि प्रश्नकाल के बाद वह उनकी
बात सुनेंगे लेकिन कांग्रेस के सदस्य हाल ही में टेंडर देने के मामले में सात लोगों
की हत्या की जांच सीबीआई से कराने की मांग करते रहे । खाद्य पदार्थों में मिलावट को
रोकने के लिए भारतीय मानक ब्यूरो यानि बीआईएस जल्द ही एक 'क्विक टेस्ट किट' को
भारतीय उपभोक्ताओं के लिए लाने की योजना बना रहा है । इस तकनीक के जरिए रोजमर्रा की
जरूरत के खाद्य पदार्थों में मिलावट होने की शिकायत पर आसानी से जांच की जा सके ।
दरअसल भारतीय मानक ब्यूरो को सबसे ज्यादा खाद्य पदार्थों में मिलावट की शिकायतें
मिलती हैं । हालांकि देश भर में बीआईएस के कार्यालय मौजूद हैं जहां खाद्य पदार्थों
में मिलावट की जांच की जाती है । लेकिन अंतर्राष्ट्रीय स्तर की कोई तकनीक न होने के
कारण अकसर अधिकारियों को मिलावट करने वाले के खिलाफ कार्रवाई करने में दिक्कत होती
थी । लेकिन अब इस तकनीक के आ जाने से खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच आसानी से
की जा सकेगी । इसके लिए ब्यूरो स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद लेगी और उन्हें यह किट
उपलब्ध कराएगी । जो मिलावट की शिकायत होने पर मौके पर जाकर जांच करेगी । इससे उपकरण
के जरिए तुरंत ही मिलावट की जांच हो जाएगी । आतंकियों द्वारा किसी विमान के अपहरण
या आत्मघाती हमले को अंजाम देने की कोशिश किए जाने की खुफिया जानकारी पर देश भर के
हवाई अड्डों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है । केंद्रीय गृह मंत्रालय ने
बुधवार देर रात 'सामान्य अलर्ट' जारी कर दिया, जिसमें खासतौर पर मुंबई एयरपोर्ट का
जिक्र करते हुए सुरक्षा बलों से हवाई अड्डे आने वाले सभी वाहनों पर कड़ी निगरानी
रखने को कहा गया है । समझा जाता है कि खुफिया विभाग द्वारा आतंकियों के बीच बातचीत
के अंश सुने जाने के बाद अलर्ट जारी किया गया, जिसमें विमान अपहरण के उद्देश्य से
आत्मघाती हमले का प्रयास करने के संकेत मिले हैं । अलर्ट के बाद हवाई अड्डों की
सुरक्षा में तैनात केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के त्वरित कार्रवाई
दलों को तैयार रहने को कहा गया और विभिन्न स्थानों पर अतिरिक्त बैरिकेड लगाकर
सुरक्षा इंतजाम बढ़ा दिए गए । दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी हवाई अड्डे पर अतिरिक्त
बैरिकेड लगाए गए हैं । हालांकि इस बात का ध्यान रखा जा रहा है कि इससे यात्रियों के
आवागमन में कोई बाधा न हो । श्रीनगर और जम्मू में भी सीआरपीएफ जवानों ने एयरपोर्ट
में गश्त बढ़ा दी है और आतंकी हमले को रोकने के लिए परिसर के चारों तरफ बहु -
स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था कर दी गई है । कोलकाता स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस
अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी सुरक्षा कड़ी कर दी गई है । हैदराबाद व चेन्नई
जैसे राज्यों की राजधानियों में एयरपोर्ट कर्मियों सहित हवाई अड्डे पर आने वाले सभी
यात्रियों की जांच की जा रही है । कोच्चि के समीप स्थित नेदुमबास्सेरी
अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है । विश्व हिंदू
परिषद सुप्रीमो अशोक सिंघल ने कहा है कि दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह के समय से
सिखों का उदय एक अलग धार्मिक समुदाय के रूप में हुआ । परिषद द्वारा कथित रूप से
सिखों को हिंदुओं का एक हिस्सा बताए जाने के बयान से उभरे विवाद के बीच सिंघल का यह
बयान आया है । राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष तरलोचन सिंह को लिखे अपने एक
बयान में सिंघल ने कहा है, गुरु गोबिंद सिंह के काल से ही सिखों का उदय एक अलग
धार्मिक समुदाय के रूप में हुआ । उन्होंने कहा है कि यही वजह है कि यह अन्य भारतीय
धर्मों की तरह विहिप सिख पंथ को भारी प्रशंसा और गर्व के साथ देखता है । पंजाब
अधिकार मंच की ओर से मिली एक शिकायत के मद्देनजर सिंह ने लिखकर सिंघल से इस मुद्दे
पर 'पक्का बयान' चाहा था । इसी के जवाब में सिंघल ने यह लिखा । कहा गया था कि हाल
ही में अमृतसर में संघ परिवार के एक सम्मेलन के दौरान विहिप के कुछ नेताओं ने कथित
रूप से सिखों को हिंदुओं का हिस्सा बताया था । सिंह ने कहा, हमें नहीं लगता कि
सिखों को एक अलग धार्मिक समुदाय मानने में विहिप को कोई आपत्ति है । तीन दिन पहले
लंदन में हुए ताबड़तोड़ धमाकों से खौफजदा ब्रिटेन अभी उबर भी नहीं पाया है कि
शनिवार रात बर्मिंघम शहर में हमले की धमकी के बाद ३० हजार लोगों को सुरक्षित जगहों
पर ले जाना पड़ा । लेकिन, किसी भी संदेहास्पद पैकेट में विस्फोटक नहीं मिलने के बाद
चेतावनी वापस ले ली गई । वहीं, मेट्रो और डबल डेकर बस पर हुए विस्फोटों में अलकायदा
का हाथ सामने आने के बाद से मुस्लिमों के खिलाफ गुस्सा भड़क गया है । ब्रिटेन के
बाद न्यूजीलैंड में चार इस्लामिक केंद्रों में गुस्साए लोगों ने तोड़फोड़ की ।
पुलिस के मुताबिक ७ / ७ के हमले में मारे गए लोगों की आत्मा की शांति के लिए जब
शनिवार को पूरे ब्रिटेन के चर्चों में प्रार्थना की जा रही थी, तभी बर्मिंघम के
सिटी सेंटर पर हमले की धमकी मिली । उनके मुताबिक दुनिया में आतंकवाद के मौजूदा
परिदृश्य को देखते हुए यह कदम उठाया गया । लेकिन, बाद में बम रोधी दस्ते के
बर्मिंघम के सिटी सेंटर के नजदीक एक बस में पाए गए चार संदिग्ध पैकेटों को
निष्क्रिय करने पर पता चला कि ये बम नहीं थे । लेकिन तब तक सारे शहर में अफरा तफरी
फैल चुकी थी । इसके चलते हजारों लोगों को एस्टोन विश्वविद्यालय के कैंपस में रात
गुजारनी पड़ी । पुलिस ने ब्रॉड स्ट्रीट एंटरटेनमेंट डिस्ट्रिक्ट और चाइनीज क्वार्टर
को अपने कब्जे में ले लिया था । यहां बार, थियेटर, रेस्तरां और होटल स्थित हैं ।
आखिरकार दस घंटे बाद चेतावनी वापस ले ली गई । गौरतलब है कि ७ जुलाई को मेट्रो रेल
और बस में हुए विस्फोटों में ५० से ज्यादा लोग मारे गए थे और सात सौ से ज्यादा लोग
घायल हो गए थे । हमलावरों के बारे में अब तक कुछ पता नहीं चल पाया है । लेकिन, एक
पूर्व पुलिस कमिश्नर लॉर्ड स्टीवन ने कहा है कि हमले में शामिल आतंकी ब्रिटेन के हो
सकते हैं । शनिवार रात आकलैंड स्थित न्यूजीलैंड मुस्लिम एसोसिएशन मस्जिद की
खिड़कियां तोड़ दी गईं । इसके अलावा दो और मस्जिदों और अलफराक कल्चरल सेंटर में भी
तोड़फोड़ की गई है । न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री हेलेन क्लार्क ने इन हमलों की
निंदा की है । राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष तरलोचन सिंह ने कहा कि
गुरुद्वारे पर हमले की खबर से सिख समुदाय सकते में है क्योंकि दशकों से ब्रिटेन में
समुदाय के लोग शांतिपूर्ण तरीके से रह रहे हैं । भाजपा अध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी के
इस्तीफे की वापसी के बाद विश्व हिंदू परिषद के हाथ कुछ नहीं लगा है । जिन्ना को
सेक्यूलर बताने पर आडवाणी को राष्ट्रद्रोही बताने वाले विहिप नेता प्रवीण भाई
तोगड़िया को निराशा हुई है । विहिप नेता आचार्य गिरिराज किशोर और प्रवीण तोगड़िया
ने आडवाणी के इस्तीफे की वापसी की आलोचना करते कहा कि आडवाणी की अध्यक्ष पद पर
वापसी नहीं होनी चाहिए थी । विहिप नेता तो पाकिस्तान की यात्रा के दौरान ही लाल
कृष्ण आडवाणी द्वारा बाबरी मस्जिद विध्वंस पर खेद प्रकट करने और अखंड भारत की
अवधारणा से पल्ला झाड़ने की आलोचना कर रहे थे । पर मामला और गंभीर तब हुआ जब आडवाणी
ने जिन्ना को सेक्यूलर नेता बताया । इसके बाद विहिप नेता प्रवीन तोगड़िया ने आडवाणी
को देशद्रोही कहा । उनकी इस भाषा से संघ ने भी नाराजगी जताई । भाजपा और संघ में कोई
भी जिन्ना को सेक्यूलर मानने को तैयार नहीं था पर आडवाणी को देशद्रोही कहा जाय इस
पर कोई सहमत नहीं था । प्रवीण तोगड़िया के बाद संघ ने उनको भाषा संयम की सलाह भी दी
। आडवाणी के इस्तीफे की वापसी के लिए तैयार मसौदे में संघ की जीत हुई है । इस
प्रस्ताव में जिस तरह से भाजपा ने जिन्ना को हिंदू - मुस्लिम धर्म के आधार पर भारत
पाकिस्तान विभाजन का जिम्मेदार ठहराया है उससे संघ की विचारधारा की जीत हुई है पर
विहिप को निराशा ही हाथ लगी है । विहिप नेता लगातार दबाव बनाए हुए थे कि आडवाणी का
इस्तीफा वापस न हो और उनकी जगह कोई अन्य हिंदुत्व छवि वाला व्यक्ति भाजपा अध्यक्ष
पद की कुर्सी संभाले । बृहस्पतिवार को शाम पार्टी नेता मुरली मनोहर जोशी के जिन्ना
मुद्दे पर आडवाणी के खिलाफ खुलकर सामने आने से विहिप नेताओं को आशा हुई थी कि शायद
संघ के दबाव के चलते किसी नए चेहरे को भाजपा अध्यक्ष का पद सौंप दिया जाये । विहिप
नेता गिरिराज किशोर ने कहा कि आडवाणी को अपने इस्तीफे को लेकर अडिग रहना चाहिए था ।
उन्होंने कहा कि विहिप बाबरी विध्वंस और जिन्ना मुद्दे पर आडवाणी के विचारों से
सहमत नहीं है । विहिप नेताओं ने यह भी कहा कि अगर आडवाणी लौहपुरुष होते तो अपना
इस्तीफा कभी वापस नहीं लेते । भारत संचार निगम लिमिटेड ने अपने कर्मचारियों को नए
साल पर तोहफे दिए हैं । बीएसएनएल बोर्ड की बैठक में कर्मियों के भत्तों में बढ़ोतरी
का निर्णय किया गया । भत्ते व सुविधाएं एक जनवरी 2005 से प्रभावी मानी जाएंगी ।
बैठक में यह भी तय किया गया कि ये सारी सुविधाएँ 31 दिसंबर 2006 तक रहेंगी । एक
जनवरी 2007 को इसे पुनः संशोधित किया जाएगा । बीएसएनएल सूत्रों ने बताया कि 14
फरवरी को दिल्ली में बीएसएनएल बोर्ड और बीएसएनएल यूनियन की संयुक्त बैठक हुई । कई
घंटे तक चली बैठक के बाद ग्रुप सी व डी के कर्मचारियों के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय
लिए गए, जो पूरे देश के लिए लागू किए गए हैं । कर्मचारियों का फूड भत्ता 250 रुपये
प्रतिमाह किया गया है । पहले यह 150 रुपये था । कर्मचारी अब 300 रुपये प्रतिमाह
परिवहन भत्ता पाएंगे । यह भत्ता ए वन एवं ए क्लास शहर के लिए लागू होगा । पहले यह
भत्ता 100 रुपये प्रतिमाह था । इसके अलावा अन्य शहर के लिए अब 225 रुपए प्रति महीने
दिए जाएंगे जबकि पहले केवल 75 रुपये ही कर्मचारियों को मिलते थे । इसके अलावा
ग्रामीण क्षेत्रों में नियुक्त कर्मचारियों को केवल 100 रुपया परिवहन भत्ता दिया
जाएगा । कर्मचारियों को पहले 1,500 रुपये त्यौहार के लिए एडवांस मिलता था । लेकिन,
अब वे 5,000 रुपये ले सकते हैं जिसे कर्मचारियों द्वारा विभाग को दस आसान किश्तों
में वापस लौटाना होगा । कर्मचारियों के लिए दिल खोलकर मेहरबान बीएसएनएल अब उनके
वेतन का सौ गुना लोन मकान बनाने के लिए देगा । जैसे किसी कर्मचारी का बेसिक वेतन दस
हजार रुपये है तो उसे दस लाख तक का लोन मकान बनाने के लिए दिया जा सकता है । यह लोन
बीएसएनएल किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक से दिलाएगा और ब्याज बीएसएनएल रेट पर ही भुगतान
करना होगा । इसके अतिरिक्त पसर्नल लोन एक लाख रुपये तक कर दिया गया है । इंफाल में
असम राइफल के कर्मी द्वारा मनोरमा देवी की तथाकथित हत्या के विरोध में अनेक महिलाओं
द्वारा शुक्रवार को कर्फ्र्यू तोड़ने और जुलूस निकालने की कोशिश के दौरान हिंसा
भड़कने से कई लोग घायल हो गए । घायलों में अधिकतर महिलाएं शामिल हैं । सरकारी
सूत्रों ने कहा कि लोग 10 जुलाई को मनोरमा देवी की हत्या के विरोध में कर्फ्र्यू
तोड़ कर जुलूस निकालने की कोशिश कर रहे थे । भड़की हिंसा के दौरान भीड़ को तितर -
बितर करने के लिए पुलिस ने आँसू गैस के गोले छोड़े व हवा में रबर की गोलियाँ चलाई ।
जिससे कुछ लोग घायल हो गए । पुलिस की इस कार्रवाई में छिंगमारोंग इलाके में दो
महिलाएँ और कोंगबा इलाके में चार लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं । अधिकारिक सूत्रों
के मुताबिक अज्ञात लोगों ने कर्फ्र्यू के नियमों का उल्लंघन कर बृहस्पतिवार रात तीन
सरकारी कार्यालयों में आग लगा दी । राज्यसभा के पूर्व सदस्य और कांग्रेस नेता संजय
निरुपम ने राजग सरकार द्वारा आईटीडीसी के 18 होटलों का निजीकरण करने के मामले की
जाँच कराने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखा है । निरुपम ने ही मुंबई के
सेंटूर होटल की बिक्री का मामला पहली बार राज्यसभा में उठाया था । उन्होंने आरोप
लगाया है कि इन होटलों की खरीद कुछ भाजपा सांसदों ने की । प्रधानमंत्री को लिखे
पत्र में निरुपम ने कहा है कि आईटीडीसी की परिसंपत्तियों की कीमत काफी कम आँकी गई ।
उन्होंने केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) से मामले की जाँच कराने की माँग की है ।
हाल ही में शिवसेना छोड़कर कांग्रेस में शामिल संजय ने अपने इस पत्र की एक प्रति
यूपीए अध्यक्ष सोनिया गाँधी को भी भेजी है । उन्होंने कहा, आईटीडीसी के ये 18 होटल
सिर्फ करीब 300 करोड़ रुपये की क़ीमत में ही बेच दिए गए, जबकि मुंबई में होटल
कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की दो परिसंपत्तियों की क़ीमत 230 करोड़ बताई जाती है । बाद
में इसकी एकल निविदा आयोजित की गई ताकि भाजपा सांसदों और भाजपा से करीबी रहने वाले
लोगों को इन्हें खरीदने में आसानी हो । निरुपम ने आईटीडीसी की परिसंपत्तियों के
मूल्याँकन के लिए एजेंसी के चयन की पूरी प्रक्रिया, आरक्षित मूल्य तय करने की शर्त
और एक पार्टी को निविदा के लिए इजाज़त देने की सीवीसी से जाँच कराने की माँग की है
। 12 मई को लिखे अपने इस पत्र में उन्होंने कहा है, एचसीआई के स्वामित्व वाले
सेंटॉर होटल पर महानियंत्रक और लेखा परीक्षक की रिपोर्ट ने सार्वजनिक जीवन में
शुचिता के मेरे पुराने रुख की पुष्टि की है । कैग रिपोर्ट में दो सेंटॉर होटलों की
बिक्री में अनियमितता की बात कही गई थी । इस पर कार्रवाई करते हुए सरकार ने निजीकरण
की जाँच के आदेश दिए हैं । वरिष्ठ माकपा नेता ज्योति बसु ने बिहार में होने वाले
विधानसभा के चुनावों में माकपा, फारवर्ड ब्लॉक व आरएसपी द्वारा लोक - जनशक्ति
पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला करने पर अफसोस जताया । उन्होंने कहा कि
इससे वाम मतों का विभाजन होगा, जिसका फायदा भाजपा के नेतृत्व वाले राजग को मिलेगा ।
बसु ने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव में वाम मतों को एकजुट रखना मुश्किल हो गया है
। यह पूछे जाने पर कि क्या वे वाम मतों के विभाजन को रोकने के लिए कोई पहल करेंगे,
उन्होंने कहा कि मैं क्या कर सकता हूँ । दिल्ली में हमारे नेता इसके लिए प्रयास कर
रहे हैं । वाम मतों के विभाजन के बारे में लोगों को निर्णय लेना होगा । एक अन्य
सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि वाम मतों में विभाजन का लाभ एनडीए को मिलेगा ।
उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद यादव की राजद के नेतृत्व वाले कांग्रेस व एनसीपी
गठबंधन को माकपा समर्थन दे रही है । इससे पहले वामदलों ने बिहार के राजनीतिक
परिदृश्य के मद्देनज़र आपसी मतभेदों के बावजूद राज्य में होने वाले चुनाव में
धर्मनिरपेक्ष मतों के विभाजन को रोकने का फैसला किया था । वामदलों के नेताओं के साथ
बातचीत के बाद माकपा के महासचिव प्रकाश करात ने कहा था कि बिहार में चुनाव को लेकर
वामदलों में मतभेद हैं, लेकिन हमारा मानना है कि धर्मनिरपेक्ष मतों का विभाजन नहीं
होना चाहिए । जेल में बंद विवादास्पद राजद सांसद सैयद शहाबुद्दीन को एक और झटका लगा
है । सीवान की एक अदालत ने बृहस्पतिवार को शस्त्र अधिनियम में शहाबुद्दीन की पत्नी,
पिता और भाई के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिए हैं । सीवान के सब - डिवीजनल
मजिस्ट्रेट कोमल राम ने पुलिस की प्रार्थना पर शहाबुद्दीन की पत्नी हिना सहाब, पिता
एस. एम. हबीबुल्लाह और भाई शम्सुद्दीन के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिए ।
पिछले वर्ष सीवान के तत्कालीन जिला अधिकारी सी. के. अनिल ने शहाबुद्दीन की आपराधिक
पृष्ठभूमि और उन्हें लाइसेंस जारी किए जाने में बरती गईं अनियमितताओं के मद्देनज़र
उनके शस्र लाइसेंस निरस्त किए थे । लेकिन इसके बाद भी शहाबुद्दीन व उनके
रिश्तेदारों ने पुलिस को दस हथियार नहीं सौंपे थे, जिस पर पुलिस ने उनके, उनकी
पत्नी, पिता और भाई के खिलाफ थाने में मामला दर्ज कराया था । खास बात यह है कि
अदालत का यह फैसला सीवान के सत्र न्यायाधीश आर. एस. राय द्वारा एक अन्य मामले में
शहाबुद्दीन की जमानत अर्जी खारिज किए जाने के एक दिन बाद आया है । इस मामले में
शहाबुद्दीन पर वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव के नामांकन के दौरान अपने खिलाफ लंबित
आपराधिक मामलों के बारे में गलत हलफनामा दाखिल करने के आरोप हैं । सीवान पुलिस ने
शहाबुद्दीन के खिलाफ छह मामलों में आरोप दाखिल किए हैं, जिनमें से एक मामले में
पिछले वर्ष अप्रैल में उनके प्रतापपुर स्थित आवास पर छापे के दौरान विदेश निर्मित
हथियारों और पाकिस्तान की एक शस्र फैक्ट्री की मोहर वाले कारतूसों की बरामदगी के
आधार पर राजद्रोह का आरोप लगाया गया है । इस वक्त वह भागलपुर जेल में है । भारत
जल्द ही विदेशों में काम कर रहे भारतीय नागरिकों को पेश आ रही आव्रजन संबंधी
समस्याओं और स्वदेश में वापसी की निवेश योजनाओं में सहयोग के लिए पाँच देशों में
विशेष कार्यालय खोलेगा । इसके अलावा, सरकार बजट सत्र के दौरान संसद में एक बिल
लाएगी जिससे प्रवासी भारतीयों को भी मताधिकार मिलेगा । प्रवासी भारतीय मामलों के
मंत्री वायलार रवि ने संवाददाताओं को बताया कि पश्चिम एशिया, यूरोप, अमेरिका और
दक्षिण पूर्व एशिया में खोले जाने वाले ये विशेष कार्यालय 'प्रवासी कल्याण केंद्र'
कहलाएँगे । ये केंद्र विदेशों में भारतीय मामलों के मंत्रालय (एमओआईए) के सीधे
नियंत्रण में रहेंगे । उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में दो केंद्र खुलेंगे ।
यहां पर बड़ी तादाद में भारतीय रहते हैं । इसके अलावा, प्रवासी भारतीय मामलों के
मंत्री ने बताया कि सरकार मौजूदा बजट सत्र में एक विधेयक पारित कराके प्रवासी
भारतीयों को वोट डालने का अधिकार दिलाएगी । उन्होंने कहा कि इसके लिए जनप्रतिनिधि
अधिनियम की धारा 20 में संशोधन करना होगा । इस विधेयक के मसौदे को केंद्रीय
मंत्रिमंडल ने बुधवार को ही मंजूरी दी है । कानून में संशोधन के जरिए विदेशों में
रोज़गार, शिक्षा या अन्य कारणों से रह रहे भारतीय नागरिकों को भारत स्थित अपने
वास्तविक निवास के आधार पर मतदाता सूची में अपना नाम डलवाने और मताधिकार प्रयोग का
अधिकार होगा । केंद्रीय वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री नमो नारायण मीणा ने कहा कि
ओजोन परत की सुरक्षा के लिए अनेक गंभीर प्रयास किये हैं । पिछले 12 सालों के दौरान
ओजोन परत को नुकसान पहुँचाने वाले 11 हजार टन उत्पादों तथा क्षीर्ण करने वाले 12
हजार टन तत्वों को खत्म किया गया । इसमें सरकारी तथा ग़ैर सरकारी क्षेत्रों की
भूमिका महत्वपूर्ण रही । इस अवसर पर उन्होंने वनों एवं परती भूमि के विकास के लिए
21 लोगों और संस्थाओं को इंदिरा प्रियदर्शिनी वृक्ष मित्र पुरस्कार भी प्रदान किए ।
ओजोन परत के संरक्षण के लिए 11वां अन्तर्राष्ट्रीय दिवस मनाया गया । पुरस्कार पाने
वालों में उन्नाव के टेलीफोन कर्मचारी संतोष कुमार वाजपेयी भी शामिल हैं । उन्होंने
दस हेक्टेयर क्षेत्र में दो लाख पौधे लगाने का उल्लेखनीय कार्य किया है । पुरस्कार
स्वरूप एक लाख रुपये नक़द और प्रशस्ति पत्र प्रदान किये गये । इसके अलावा वर्गीकरण
विज्ञान के लिए प्रो. टी. सी. नरेंद्रन को ई. के. जानकी अम्माल नेशनल अवार्ड 2004
प्रदान किया गया । टीआरएफआई जबलपुर के डॉ. जमालुद्दीन और के. एस. राव को विशिष्ट
वैज्ञानिक पुरस्कार दिया गया । उत्तरांचल में जल संसाधनों के प्रबंधन के लिए डॉ.
भगवती प्रसाद पुरोहित को मैदीनी पुरस्कार योजना 2003 के तहत सम्मानित किया । यूपीए
सरकार की महत्वाकांक्षी योजना भारत निर्माण को औपचारिक रूप से लाँच करते हुए
प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने इसे ग्रामीण विकास की समयबद्ध योजना करार दिया ।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वह किसानों को मुफ्त बिजली देने के खिलाफ हैं । अगर किसानों
को लगातार बिजली मिले तो वे इसकी क़ीमत चुकाने को तैयार होंगे । इसी सिलसिले में
उद्योग चैंबर सीआईआई की ओर से आयोजित सम्मेलन में मनमोहन सिंह ने कहा कि ग्रामीण व
शहरी भारत के बीच अंतर लगातार बढ़ता जा रहा है, जो देश की सामाजिक व आर्थिक स्थिरता
के लिए एक बड़ा खतरा है । इस अंतर को पाटने की जरूरत है और भारत निर्माण कार्यक्रम
भारत व इंडिया के बीच के अंतर को कम करने में मददगार होगा । इस अवसर पर अंग्रेजी के
कवि ओलिवर गोल्डस्मिथ की कविता 'द डेजर्टेड विलेज' की याद दिलाते हुए प्रधानमंत्री
ने कहा कि वंचित लोगों के विकास से ही देश का आर्थिक विकास संभव है । मनमोहन ने कहा
कि कृषि क्षेत्र में विकास की संभावना पैदा करने के लिए सिंचाई व्यवस्था पर उचित
ध्यान देना जरूरी है । इसी वजह से भारत निर्माण कार्यक्रम के तहत एक करोड़ अतिरिक्त
भूमि को सिंचित क्षेत्र बनाने का लक्ष्य रखा गया है । कार्यक्रम के तहत 1000 से
ज्यादा आबादी वाले सभी गाँवों को पक्की सड़कों से जोड़ा जाएगा । इसके अलावा पहाड़ी
व आदिवासी क्षेत्रों के 500 से अधिक आबादी वाले गाँवों तक पक्की सड़कें पहुँचाई
जाएँगी । मनमोहन ने कहा कि देश में फिलहाल करीब 1.5 करोड़ मकानों की कमी है । भारत
निर्माण कार्यक्रम के तहत 60 लाख नए मकान बनाए जाएँगे । उन्होंने कहा कि पिछले 25
वर्ष के दौरान 50 हजार करोड़ रुपये का निवेश होने के बावजूद अभी तक 55,000 गाँव ऐसे
हैं, जहाँ पीने का साफ पानी उपलब्ध नहीं है । इस समस्या को भारत निर्माण कार्यक्रम
के तहत दूर किया जाएगा । मनमोहन ने कहा कि राजीव गाँधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना
के तहत वर्ष 2009 तक देश के हर गाँव में बिजली पहुँचाई जाएगी । उन्होंने कहा कि
भारत निर्माण के तहत सरकार के काफी ऊँचे लक्ष्य रखे हैं, लेकिन राज्य सरकारों के
सक्रिय सहयोग से इन लक्ष्यों को पाने की पूरी - पूरी उम्मीद है । अभिनेत्री
प्रियंका चोपड़ा के पिता अशोक चोपड़ा के स्वास्थ्य में अब काफी सुधार है । कैंसर
पीड़ित चोपड़ा को पिछले दिनों मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया था ।
उनकी बीमारी से प्रियंका की शूटिंग भी प्रभावित हो रही थी । प्रियंका के सेक्रेटरी
चाँद मिश्रा के अनुसार सितंबर में अमेरिका में आयोजित प्रियंका के शो के दौरान अशोक
चोपड़ा भी फाईनल चेकअप के लिए वहाँ जा सकते हैं । इसी १९ अगस्त को प्रियंका की
फिल्म 'बरसात' रिलीज़ होने वाली है । इसके अलावा वह 'कृश', 'ब्लफ मास्टर' और 'गॉड
तुसी ग्रेट हो' आदि फिल्मों में भी काम कर रही हैं । हाल ही में उन्होंने फिल्म
'डॉन' की रीमेक की जा रही इसी नाम की फिल्म साइन की है । फरहान अख्तर निर्देशित इस
फिल्म में प्रियंका ज़ीनत अमान वाली भूमिका निभाएँगी । आंध्रप्रदेश सरकार ने बात -
चीत के लिए बुधवार को नक्सलियों के खिलाफ संघर्ष विराम की घोषणा की है । राज्य के
गृह मंत्री के. जानारेड्डी ने एक प्रेस काँफ्रेंस में तीन महीने के लिए संघर्ष
विराम की घोषणा की । मंगलवार को नक्सली संगठन पीपुल्स वार ग्रुप ने संघर्ष विराम,
इसके लागू होने पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन करने के लिए कमेटी बनाने और इसके
प्रतिनिधियों को वार्ता में भाग लेने के लिए सुरक्षा देने की माँग की थी । 
